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पीलीभीत: हत्या कर लाश छिपाने वाले को आजीवन कारावास की सजा
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पीलीभीत। हत्या कर लाश छिपाने के मामले में जनपद न्यायाधीश सुधीर कुमार ने आरोपी को दोषी पाते हुए तेरह हजार रुपये अर्थ दंड लगाते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। इस मामले में एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर दस हजार रुपये मृतक के माता-पिता को दिए जाने का आदेश भी दिया गया है।
थाना बिलसंडा के ग्राम करेली के ओमप्रकाश ने 16 अक्तूबर 2016 में थाने में तहरीर देकर कहा कि 13 अक्तूबर 2016 को एक बजे उसका पुत्र रामवीर मौर्य घास काटने गया था। शाम तक जब वह नहीं लौटा तो गांव वालों के साथ उसकी तलाश की गई। अगले दिन दो बजे रामवीर मौर्य का शव चांदपुर की पूर्व प्रधान कुसमा देवी के गन्ने के खेत में शीशम के पेड़ पर फंदे से लटका मिला। पोस्टमार्टम में गला घोंटकर हत्या होने की बात सामने आई।
पुलिस ने अज्ञात हत्यारे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना में गांव के ही महेश व सुरेश (सगे भाइयों) के नाम सामने आए। पता चला कि सरकारी नल पर पहले पानी भरने को लेकर रामवीर का दोनों भाइयों से विवाद हुआ था। इसी विवाद के चलते दोनों ने उसकी हत्या कर दी।
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पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह न्यायालय में पेश किए। दौरान मुकदमा आरोपी सुरेश की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी महेश को दोषी पाते हुए तेरह हजार रुपये अर्थदंड समेत आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध )महेंद्र पाल गंगवार और उनके सहयोगी बृजेंद्र मोहन दीक्षित ने की।
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थाना बिलसंडा के ग्राम करेली के ओमप्रकाश ने 16 अक्तूबर 2016 में थाने में तहरीर देकर कहा कि 13 अक्तूबर 2016 को एक बजे उसका पुत्र रामवीर मौर्य घास काटने गया था। शाम तक जब वह नहीं लौटा तो गांव वालों के साथ उसकी तलाश की गई। अगले दिन दो बजे रामवीर मौर्य का शव चांदपुर की पूर्व प्रधान कुसमा देवी के गन्ने के खेत में शीशम के पेड़ पर फंदे से लटका मिला। पोस्टमार्टम में गला घोंटकर हत्या होने की बात सामने आई।
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पुलिस ने अज्ञात हत्यारे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना में गांव के ही महेश व सुरेश (सगे भाइयों) के नाम सामने आए। पता चला कि सरकारी नल पर पहले पानी भरने को लेकर रामवीर का दोनों भाइयों से विवाद हुआ था। इसी विवाद के चलते दोनों ने उसकी हत्या कर दी।
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पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह न्यायालय में पेश किए। दौरान मुकदमा आरोपी सुरेश की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी महेश को दोषी पाते हुए तेरह हजार रुपये अर्थदंड समेत आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध )महेंद्र पाल गंगवार और उनके सहयोगी बृजेंद्र मोहन दीक्षित ने की।