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Pilibhit News: आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति-पत्नी बरी
Sat, 10 Jan 2026 11:37 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:37 PM IST
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पीलीभीत। प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता की ओर से आत्महत्या किए जाने के मामले में सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार (चतुर्थ) ने अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर आरोपी पति-पत्नी को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही झूठे साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मुकदमा के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी पारित किए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना गजरौला कलां क्षेत्र के ग्राम बिठौराकलां निवासी रविशंकर पुत्र दोदराम ने 10 सितंबर 2014 को थाना गजरौला कलां में तहरीर दी थी। तहरीर में बताया था कि उसके सगे भाई मदनलाल और भाभी रुकमणी देवी उसके घर के पास ही रहते हैं और दोनों मिलकर उसकी पत्नी चंदा देवी को लगातार ताने देते थे। आरोप लगाया था कि कुछ दिन पूर्व आरोपियों ने उसकी पत्नी के साथ मारपीट की थी। इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 10 सितंबर 2014 को आरोपियों ने फिर उसकी पत्नी के साथ गालीगलौज की। इससे मानसिक रूप से परेशान होकर उसकी पत्नी चंदा देवी ने आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन आरोपों को साबित करने में असफल रहा और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप प्रमाणित नहीं हो सका। इन परिस्थितियों में सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मदनलाल और रुकमणी देवी को बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि वादी की ओर से झूठे और भ्रामक साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इस पर वादी मुकदमा के विरुद्ध विधिक कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना गजरौला कलां क्षेत्र के ग्राम बिठौराकलां निवासी रविशंकर पुत्र दोदराम ने 10 सितंबर 2014 को थाना गजरौला कलां में तहरीर दी थी। तहरीर में बताया था कि उसके सगे भाई मदनलाल और भाभी रुकमणी देवी उसके घर के पास ही रहते हैं और दोनों मिलकर उसकी पत्नी चंदा देवी को लगातार ताने देते थे। आरोप लगाया था कि कुछ दिन पूर्व आरोपियों ने उसकी पत्नी के साथ मारपीट की थी। इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 10 सितंबर 2014 को आरोपियों ने फिर उसकी पत्नी के साथ गालीगलौज की। इससे मानसिक रूप से परेशान होकर उसकी पत्नी चंदा देवी ने आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन आरोपों को साबित करने में असफल रहा और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप प्रमाणित नहीं हो सका। इन परिस्थितियों में सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मदनलाल और रुकमणी देवी को बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि वादी की ओर से झूठे और भ्रामक साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इस पर वादी मुकदमा के विरुद्ध विधिक कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं।
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