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पीएम आवास : सिर ढकने को नहीं बन सका आशियाना

Wed, 01 Dec 2021 05:12 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 05:12 PM IST
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could not build a house to cover the head
रनपुर के मोहल्ला साहूकारा में तिरपाल में रहने को मजबूर परिवार। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। आवास की जरूरत पूरी होने की उम्मीद किस्त न मिलने से नौ महीने में भी पूरी नहीं हो सकी। जिससे पीएम आवास के लाभार्थियों को सर्दी में तिरपाल के नीचे परिवार के साथ रात काटनी पड़ रही है। काम में मन नहीं लग रहा। हर समय यही डर सताता है कि सर्दी में बच्चे बीमार न हो जाए।
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मोहल्ला साहूकारा कुरैशियान निवासी अफसरोज मजदूरी करते हैं। उनकी पत्नी राजिया बीबी ने बताया कि मोहल्ला में कई लोगों को प्रधानमंत्री आवास मिलने की जानकारी पर पति से राय के बाद करीब एक साल पहले आवेदन कर दिया। आठ माह पहले आवास की पहली किस्त भी आ गई। तब सोचा था कि आशियाना बन जाएगा। सिर ढकने को जीर्णशीर्ण आवास को तुड़वाकर मिली किस्त से आवास बनवाना शुरू कर दिया। दरवाजे की ऊंचाई तक निर्माण पूरा हुआ। मगर आठ माह बाद दूसरी किस्त अब तक नहीं मिल पाई। नेताओं, अफसरों के चक्कर काटना शुरू किया। हर बार यहीं आश्वासन मिला कि शीघ्र ही दूसरी किस्त मिलेगी। किस्त न मिलने पर आवास अधूरा है। मजबूरन तिरपाल में बच्चों के साथ रात गुजारनी पड़ रही है। मोहल्ला रजागंज निवासी जीशान मजदूरी पर फर्नीचर बनाने का काम करता है। जीशान ने बताया कि उनकी मां और वह अलग-अलग रहते हैं। दोनों लोगों के नाम से आवास के लिए आवेदन किया। पहली किस्त नौ महीने पहले जर्जर और जीर्णशीर्ण आवास को तुड़वाकर नए आवास का निर्माण शुरू कराया। इसके बाद दूसरी किस्त अब तक नहीं आई। पड़ोस में किराये के घर में रह रहा हूं। किराया प्रतिमाह साढ़े तीन हजार है। मजदूरी कर बच्चों का पेट पाले या किराया भरे। इसको लेकर कई महीनों से परेशान हूं। ब्याज पर उधारी लेकर मजबूरन आवास निर्माण कराना शुरू किया है।
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आवास के लिए आठ महीने पहले पहली किस्त मिली थी। इसके बाद दूसरी किस्त के लिए चक्कर लगा रही हूं। हर जगह से किस्त जल्दी आने का आश्वासन मिल रहा है।
- राजिया बीबी
नौ महीने से आवास की दूसरी किस्त आने का इंतजार और अफसरों के चक्कर काटकर परेशान हो गया हूं। चक्कर काटने पर कई दिन मजदूरी करने भी नहीं जा पाया।
- जीशान
वार्ड के कई लाभार्थियों को दूसरी, तीसरी किस्त छह महीने से अधिक समय निकल जाने पर नहीं मिली है। लाभार्थी परेशान हैं। कोई तिरपाल डालकर तो कोई किराये पर रहने को मजबूर है। समस्या पर परियोजना अधिकारी को, परियोजना के प्रांत स्तरीय अफसरों को पत्र भेजा। मगर बजट न होने से किस्त जारी न होने की जानकारी दी गई।
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- तौफीक अहमद कादरी, सदस्य नगरपालिका
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