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एंटीजन से रिपोर्ट निगेटिव आए तो लापरवाही न बरतें, लैब से जांच जरूर कराएं
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पीलीभीत। अगर किसी में कोरोना के लक्षण दिखते हैं। वह एंटीजन किट से जांच करा लेता है। उसमें जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है तो ऐसे मरीज को सावधानी बरतने की जरूरत है। वह एंटीजन किट की जांच को शत प्रतिशत सही मानकर न चले क्योंकि एंटीजन जांच में निगेटिव आने वाले 15 प्रतिशत मरीजों की रियल टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिप्श्न पॉलीमर्स चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) जांच कोरोना पॉजिटिव आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी इसकी तस्दीक कर रहे हैं।
कोरोना के दौर में मरीज लैब के अलावा ट्रूनेट मशीन और एंटीजन किट से भी जांच कराते हैं। अगर किसी एक में भी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ जाए तो वह निश्चिंत हो लेते हैं। मगर, जिला अस्पताल, प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों के अलावा दिल्ली और लखनऊ के डॉक्टर भी एंटीजन किट की जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। वह आरटीपीसीआर की जांच को ही 99 प्रतिशत तक सही मानते हैं, जबकि एंटीजन की जांच को 85 प्रतिशत तक। विशेषज्ञों ने एंटीजन किट से निगेटिव आने वाले मरीजों की आरटीपीसीआर से जांच करने की सलाह दी है। कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया है। मरीजों की जांच संख्या बढ़ाने में एंटीजन किट का विशेष योगदान है। शुरुआत में एंटीजन किट से प्रतिदिन 100 से अधिक लोग पॉजिटिव आ रहे थे। लेकिन अब हालात यह हैं कि एंटीजन किट से रोजाना निगेटिव रिपोर्ट आने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। मगर, चिकित्सा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन लोगों की रिपोर्ट एंटीजन किट से निगेटिव है, वह अपनी दोबारा कोरोना जांच आरटीपीसीआर से भी करा लें। स्वास्थ्य विभाग एंटीजन किट से निगेटिव आने वाले मरीजों की आरटीपीसीआर जांच नहीं कराता है। इसकी वजह यह है कि आरटीपीसीआर की जांच में भी पांच से 15 प्रतिशत तक मरीज पॉजिटिव मिल जाते हैं।
जांचें कम होने से बढ़ा खतरा
बीते एक महीने से कोरोना की पर्याप्त संख्या में जांचें नहीं हो रही हैं। इसलिए कोरोना संक्रमण का खतरा लगातार बरकरार है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ प्रमोद अग्रवाल का कहना है कि एंटीजन किट से जांच पर अब तक कोई सवाल तो नहीं खड़े हुए हैं, लेकिन यह जरूर है कि एंटीजन किट से निगेटिव आने वाले 100 में 15 फीसदी मरीज आरटीपीसीआर से जांच में पॉजिटिव मिल जाते हैं। ऐसे में जिन लोगों की जांच रिपोर्ट एंटीजन किट से निगेटिव है, वह लापरवाही न बरतें, जब तक कि उनकी जांच की रिपोर्ट आरटीपीसीआर से निगेटिव नहीं आ जाती।
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एंटीजन किट से कोरोना जांच सस्ती, आरटीपीसीआर की जांच महंगी
एंटीजन किट से जांच बेहद सस्ती है। एक किट की कीमत करीब 500 रुपये के आसपास है। इसमें समय की भी बचत होती है। जांच रिपोर्ट भी पांच से 10 मिनट के अंदर पता चल जाती है। हालांकि एंटीजन जांच रिपोर्ट 85 प्रतिशत तक अब तक सही आंकी गई है। एक कंपनी ने 65 से 70 फीसदी तक रिपोर्ट की प्रमाणिकता की बात कही वहीं, आरपीटीसीआर से जांच में 1500 रुपये का खर्च आता है। इसकी रिपोर्ट 99 प्रतिशत तक सही मानी जाती है। आरपीटीसीआर की एक जांच में दो से तीन घंटे लग जाते हैं।
एंटीजन टेस्ट को इस तरह समझें
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रमाकांत सागर का कहना है कि एंटीजन किट से जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति में वायरस का प्रोटीन है या नहीं। यदि वह मौजूद है, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। मगर, इसकी प्रमाणिकता थोड़ी कम होती है। यही वजह है कि जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर आरटीपीसीआर से भी जांच करानी चाहिए।
आरटीपीसीआर में स्वैब से होती है जांच-
आरटीपीसीआर या रियल टाइम पीसीआर टेस्ट के लिए स्वैब का सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में कोरोना वायरस आरएनए जीनोम का पता लगाया जाता है। नाक और गले के दो ऐसे हिस्से होते हैं, जहां पर वायरस के मौजूद होने की आशंका सबसे अधिक रहती है। स्वैब से इन्हीं कोशिकाओं के जरिए कोरोना वायरस का पता लगाया जाता है। स्वैब की जांच आरटीपीसीआर मशीन से होती है।
एंटीजन किट, आरटीपीसीआर और ट्रूनेट मशीन से कोरोना की जांच की जाती है। एंटीजन किट से नेगेटिव आने वाले लोगों की दोबारा आरटीपीसीआर भी जांच कराई जाती है क्योंकि एंटीजन शरीर में वायरस का अगर अधिक लोड होता है, तभी अपनी रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव बताता है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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कोरोना के दौर में मरीज लैब के अलावा ट्रूनेट मशीन और एंटीजन किट से भी जांच कराते हैं। अगर किसी एक में भी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ जाए तो वह निश्चिंत हो लेते हैं। मगर, जिला अस्पताल, प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों के अलावा दिल्ली और लखनऊ के डॉक्टर भी एंटीजन किट की जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। वह आरटीपीसीआर की जांच को ही 99 प्रतिशत तक सही मानते हैं, जबकि एंटीजन की जांच को 85 प्रतिशत तक। विशेषज्ञों ने एंटीजन किट से निगेटिव आने वाले मरीजों की आरटीपीसीआर से जांच करने की सलाह दी है। कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया है। मरीजों की जांच संख्या बढ़ाने में एंटीजन किट का विशेष योगदान है। शुरुआत में एंटीजन किट से प्रतिदिन 100 से अधिक लोग पॉजिटिव आ रहे थे। लेकिन अब हालात यह हैं कि एंटीजन किट से रोजाना निगेटिव रिपोर्ट आने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। मगर, चिकित्सा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन लोगों की रिपोर्ट एंटीजन किट से निगेटिव है, वह अपनी दोबारा कोरोना जांच आरटीपीसीआर से भी करा लें। स्वास्थ्य विभाग एंटीजन किट से निगेटिव आने वाले मरीजों की आरटीपीसीआर जांच नहीं कराता है। इसकी वजह यह है कि आरटीपीसीआर की जांच में भी पांच से 15 प्रतिशत तक मरीज पॉजिटिव मिल जाते हैं।
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जांचें कम होने से बढ़ा खतरा
बीते एक महीने से कोरोना की पर्याप्त संख्या में जांचें नहीं हो रही हैं। इसलिए कोरोना संक्रमण का खतरा लगातार बरकरार है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ प्रमोद अग्रवाल का कहना है कि एंटीजन किट से जांच पर अब तक कोई सवाल तो नहीं खड़े हुए हैं, लेकिन यह जरूर है कि एंटीजन किट से निगेटिव आने वाले 100 में 15 फीसदी मरीज आरटीपीसीआर से जांच में पॉजिटिव मिल जाते हैं। ऐसे में जिन लोगों की जांच रिपोर्ट एंटीजन किट से निगेटिव है, वह लापरवाही न बरतें, जब तक कि उनकी जांच की रिपोर्ट आरटीपीसीआर से निगेटिव नहीं आ जाती।
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एंटीजन किट से कोरोना जांच सस्ती, आरटीपीसीआर की जांच महंगी
एंटीजन किट से जांच बेहद सस्ती है। एक किट की कीमत करीब 500 रुपये के आसपास है। इसमें समय की भी बचत होती है। जांच रिपोर्ट भी पांच से 10 मिनट के अंदर पता चल जाती है। हालांकि एंटीजन जांच रिपोर्ट 85 प्रतिशत तक अब तक सही आंकी गई है। एक कंपनी ने 65 से 70 फीसदी तक रिपोर्ट की प्रमाणिकता की बात कही वहीं, आरपीटीसीआर से जांच में 1500 रुपये का खर्च आता है। इसकी रिपोर्ट 99 प्रतिशत तक सही मानी जाती है। आरपीटीसीआर की एक जांच में दो से तीन घंटे लग जाते हैं।
एंटीजन टेस्ट को इस तरह समझें
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रमाकांत सागर का कहना है कि एंटीजन किट से जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति में वायरस का प्रोटीन है या नहीं। यदि वह मौजूद है, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। मगर, इसकी प्रमाणिकता थोड़ी कम होती है। यही वजह है कि जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर आरटीपीसीआर से भी जांच करानी चाहिए।
आरटीपीसीआर में स्वैब से होती है जांच-
आरटीपीसीआर या रियल टाइम पीसीआर टेस्ट के लिए स्वैब का सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में कोरोना वायरस आरएनए जीनोम का पता लगाया जाता है। नाक और गले के दो ऐसे हिस्से होते हैं, जहां पर वायरस के मौजूद होने की आशंका सबसे अधिक रहती है। स्वैब से इन्हीं कोशिकाओं के जरिए कोरोना वायरस का पता लगाया जाता है। स्वैब की जांच आरटीपीसीआर मशीन से होती है।
एंटीजन किट, आरटीपीसीआर और ट्रूनेट मशीन से कोरोना की जांच की जाती है। एंटीजन किट से नेगेटिव आने वाले लोगों की दोबारा आरटीपीसीआर भी जांच कराई जाती है क्योंकि एंटीजन शरीर में वायरस का अगर अधिक लोड होता है, तभी अपनी रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव बताता है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ