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गंभीर संक्रमित मरीजों के लिए मिले 30 रेमडेसिविर एंटी वायरल इंजेक्शन
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पीलीभीत। पहले कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर रखकर ऑक्सीजन दी जाती थी। मगर, अब गंभीर कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होने पर रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाएगा। कई जिलों में इस इंजेक्शन से कोरोना संक्रमितों की जान बचाई गई है। शासन ने भी इस इंजेक्शन पर भरोसा जताते हुए स्वास्थ्य विभाग को 30 इंजेक्शन उपलब्ध कराए हैैं। हालांकि अभी यहां कोई गंभीर कोरोना संक्रमित मरीज नहीं है।
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद शासन ने पीलीभीत को 30 रेमडेसिविर एंटी वायरल इंजेक्शन उपलब्ध कराए हैं। इन इंजेक्शन का प्रयोग ऐसे मरीजों पर किया जाएगा, जो कोरोना संक्रमण की बेहद गंभीर स्थिति में होंगे। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को 30 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले हैं। हालांकि उनकी अभी जरूरत नहीं पड़ी है। मगर, एहतियात के तौर पर शासन से दिए गए हैं। यह इंजेक्शन गंभीर और अति गंभीर कोरोना संक्रमित मरीजों को लगाया जाएगा। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद मरीजों में गंभीर और अति गंभीर श्रेणी के दो वर्ग बनाए गए हैं। सांस की गति एक मिनट में 24 से अधिक बार होने लगे और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 90 प्रतिशत से कम हो तो वह मरीज गंभीर की श्रेणी में आते हैं। सांस लेने की गति एक मिनट में 30 से अधिक बार हो और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 85 प्रतिशत से कम हो तो उन मरीजों को अति गंभीर मरीजों की श्रेणी में रखकर इलाज किया जाता है।
स्वस्थ्य लोग एक मिनट में 16 से 20 बार लेते हैं सांस
सामान्य तौर पर स्वस्थ लोग एक मिनट में 16 से 20 बार सांस लेते हैं। उनके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 94 प्रतिशत से अधिक होती है। ऐसे में गंभीर मरीजों को बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन पहले देने की जरूरत होती है। इस इंजेक्शन से गंभीर कोरोना संक्रमितों की हालत में तेजी से सुधार होता है। मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
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कोरोना संक्रमण फैलने के बाद शासन ने पीलीभीत को 30 रेमडेसिविर एंटी वायरल इंजेक्शन उपलब्ध कराए हैं। इन इंजेक्शन का प्रयोग ऐसे मरीजों पर किया जाएगा, जो कोरोना संक्रमण की बेहद गंभीर स्थिति में होंगे। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को 30 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले हैं। हालांकि उनकी अभी जरूरत नहीं पड़ी है। मगर, एहतियात के तौर पर शासन से दिए गए हैं। यह इंजेक्शन गंभीर और अति गंभीर कोरोना संक्रमित मरीजों को लगाया जाएगा। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद मरीजों में गंभीर और अति गंभीर श्रेणी के दो वर्ग बनाए गए हैं। सांस की गति एक मिनट में 24 से अधिक बार होने लगे और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 90 प्रतिशत से कम हो तो वह मरीज गंभीर की श्रेणी में आते हैं। सांस लेने की गति एक मिनट में 30 से अधिक बार हो और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 85 प्रतिशत से कम हो तो उन मरीजों को अति गंभीर मरीजों की श्रेणी में रखकर इलाज किया जाता है।
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स्वस्थ्य लोग एक मिनट में 16 से 20 बार लेते हैं सांस
सामान्य तौर पर स्वस्थ लोग एक मिनट में 16 से 20 बार सांस लेते हैं। उनके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा 94 प्रतिशत से अधिक होती है। ऐसे में गंभीर मरीजों को बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन पहले देने की जरूरत होती है। इस इंजेक्शन से गंभीर कोरोना संक्रमितों की हालत में तेजी से सुधार होता है। मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
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