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एसआईटी ने कोरोना किट खरीद से जुड़े सभी अभिलेख मांगे
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पीलीभीत। कोरोना किट घोटाले की जांच की आंच आखिरकार पीलीभीत तक पहुंच गई। पूरे प्रदेश में कोरोना किट घोटाले का शोर मचने के बाद राज्य सरकार से गठित एसआईटी ने डीएम पुलकित खरे से कोरोना किट खरीद से जुड़े तमाम अभिलेख तलब किए हैं। डीएम के निर्देश पर सीडीओ जनपद में हुई कोरोना किट खरीद की जानकारी जुटाने में लगे हैं। वहीं, जिला पंचायत राज विभाग में कोरोना किट खरीद की जांच से खलबली बढ़ गई है।
कोरोना संकट काल में तत्कालीन प्रशासनिक अफसर के आदेश पर पंचायत राज विभाग ने सभी 721 ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की खरीद तय रेट से ढाई गुने महंगे दामों में लखनऊ की एक फर्म से कराई थी। यह फर्म शासन के एक बड़े अफसर के खास ठेकेदार की थी। यहां सभी 721 ग्राम पंचायतों में उसी फर्म ने तय रेट 2800 रुपये से ढाई गुने ज्यादा 6558 रुपये प्रति किट के हिसाब से बेचा। तमाम ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की सप्लाई पहुंची भी नहीं, केवल भुगतान के लिए बिल पहुंचे। कोरोना किट में थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि शामिल थे। हालांकि कोरोना किट में जो चिकित्सा उपकरण थे, उनके रेट शासन से भी अधिक तय किए गए थे।
सबसे पहले अमर उजाला ने 21 जुलाई के अंक में खबर प्रकाशित कर इस घपले के बारे में बताया था। इसके बाद अब आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कुछ समय पहले आरोप लगाया है कि ऑनलाइन खरीद में थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर समेत पूरी कोरोना किट की कीमत ही 1800 रुपये से अधिक नहीं है। फिर भी शासन ने कोरोना किट का रेट 2800 रुपये तय कर दिया और पीलीभीत में एक बड़े प्रशासनिक अफसर के लिखित आदेश पर लखनऊ की एक फर्म द्वारा 6558 रुपये में किटें खरीदी गईं। अब राज्य स्तर पर गठित एसआईटी ने कोरोना किट खरीद से जुड़े समस्त अभिलेख तलब किए हैं। अभी तक अफसर कोरोना किट खरीद से जुड़े अभिलेख दबाए बैठे थे। डीएम पुलकित खरे ने जब जानकारी की तो उन्हें मुख्यालय पर कोरोना किट खरीद से जुड़े कोई अभिलेख न होने की बात कह दी गई थी। मगर, जबसे पूरे प्रदेश में घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और एसआईटी ने पीलीभीत के डीएम से जानकारी मांगी, तब से पंचायत राज विभाग में हड़कंप है।
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कोरोना किट खरीद में शासन से क्या गाइड लाइन जारी की गई, किस तरह से और कितने दाम पर कोरोना किट किस फर्म से खरीदी गई? फर्म को अब तक कोरोना किट खरीद का कितना भुगतान कर दिया गया और कितना अभी बाकी है? एसआईटी की पूछताछ में इसी तरह के तमाम बिंदु शामिल किए गए हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर सीडीओ श्रीनिवास मिश्र जिला पंचायत राज विभाग से सभी पंचायतों में हुई खरीद का ब्योरा जुटा रहे हैं। एसआईटी द्वारा अभिलेख मांगे जाने के बाद कोरोना किट खरीद में शामिल अफसर-कर्मचारियों को कार्रवाई का डर सताने लगा है।
एसआईटी ने कोरोना किट खरीद से जुड़ी जानकारी मांगी है। किट खरीद से पूरा डाटा सीडीओ के निर्देशन में जुटाया जा रहा है। जल्द रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।- पुलकित खरे , डीएम
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कोरोना संकट काल में तत्कालीन प्रशासनिक अफसर के आदेश पर पंचायत राज विभाग ने सभी 721 ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की खरीद तय रेट से ढाई गुने महंगे दामों में लखनऊ की एक फर्म से कराई थी। यह फर्म शासन के एक बड़े अफसर के खास ठेकेदार की थी। यहां सभी 721 ग्राम पंचायतों में उसी फर्म ने तय रेट 2800 रुपये से ढाई गुने ज्यादा 6558 रुपये प्रति किट के हिसाब से बेचा। तमाम ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की सप्लाई पहुंची भी नहीं, केवल भुगतान के लिए बिल पहुंचे। कोरोना किट में थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि शामिल थे। हालांकि कोरोना किट में जो चिकित्सा उपकरण थे, उनके रेट शासन से भी अधिक तय किए गए थे।
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सबसे पहले अमर उजाला ने 21 जुलाई के अंक में खबर प्रकाशित कर इस घपले के बारे में बताया था। इसके बाद अब आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कुछ समय पहले आरोप लगाया है कि ऑनलाइन खरीद में थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर समेत पूरी कोरोना किट की कीमत ही 1800 रुपये से अधिक नहीं है। फिर भी शासन ने कोरोना किट का रेट 2800 रुपये तय कर दिया और पीलीभीत में एक बड़े प्रशासनिक अफसर के लिखित आदेश पर लखनऊ की एक फर्म द्वारा 6558 रुपये में किटें खरीदी गईं। अब राज्य स्तर पर गठित एसआईटी ने कोरोना किट खरीद से जुड़े समस्त अभिलेख तलब किए हैं। अभी तक अफसर कोरोना किट खरीद से जुड़े अभिलेख दबाए बैठे थे। डीएम पुलकित खरे ने जब जानकारी की तो उन्हें मुख्यालय पर कोरोना किट खरीद से जुड़े कोई अभिलेख न होने की बात कह दी गई थी। मगर, जबसे पूरे प्रदेश में घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और एसआईटी ने पीलीभीत के डीएम से जानकारी मांगी, तब से पंचायत राज विभाग में हड़कंप है।
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कोरोना किट खरीद में शासन से क्या गाइड लाइन जारी की गई, किस तरह से और कितने दाम पर कोरोना किट किस फर्म से खरीदी गई? फर्म को अब तक कोरोना किट खरीद का कितना भुगतान कर दिया गया और कितना अभी बाकी है? एसआईटी की पूछताछ में इसी तरह के तमाम बिंदु शामिल किए गए हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर सीडीओ श्रीनिवास मिश्र जिला पंचायत राज विभाग से सभी पंचायतों में हुई खरीद का ब्योरा जुटा रहे हैं। एसआईटी द्वारा अभिलेख मांगे जाने के बाद कोरोना किट खरीद में शामिल अफसर-कर्मचारियों को कार्रवाई का डर सताने लगा है।
एसआईटी ने कोरोना किट खरीद से जुड़ी जानकारी मांगी है। किट खरीद से पूरा डाटा सीडीओ के निर्देशन में जुटाया जा रहा है। जल्द रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।- पुलकित खरे , डीएम