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बेटी को डोली में बैठाने की हसरत पूरी नहीं कर सके शिक्षामित्र दिनेश
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कोरोना काल में मौत का शिकार हुए शिक्षामित्र दिनेश चंद्र की पत्नी व बच्चे।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यरत शिक्षामित्र दिनेश चंद्र की बेटी को डोली में बैठाने की हसरत अधूरी ही रह गई। पंचायत चुनाव के बाद शिक्षामित्र की हालत बिगड़ती चली गई। आर्थिक स्थिति ठीक न होने पाने के कारण समुचित इलाज भी नहीं करवा सके और तीन मई को घर में उनकी मौत हो गई। अब शिक्षामित्र के परिवार के आगे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बीसलपुर तहसील क्षेत्र के गांव किशनपुर निवासी दिनेश चंद्र (45) प्राथमिक विद्यालय रुरिया धुरिया में शिक्षामित्र थे। 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर दिनेश चंद्र शिक्षक पद पर समायोजित हो गए। शिक्षक बनने के बाद दिनेश चंद्र ने भी बच्चों की बेहतर शिक्षा और बेटी प्रियंका की अच्छे घर में शादी का सपना संजोया था, मगर 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजित शिक्षकों को समायोजन रद्द कर दिया गया। दिनेश चंद्र फिर शिक्षामित्र के पद पर समायोजित कर दिए गए।
दिनेश चंद्र की पुत्री प्रियंका ने बताया कि पिता ने पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उसके तीन दिन बाद उन्हें काफी खांसी आने लगी। इस पर एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली थी। हालत में सुधार न होने पर पिता की मतदान ड्यूटी भी काट दी गई। 29 अप्रैल को पिता की तबीयत एक बार फिर तेजी से बिगड़ने लगी। खांसी आने के साथ उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। इस पर उन्हें एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया गया। घर आकर पिता परिवार से अलग होकर रहने लगे, लेकिन उनकी तबीयत में सुधार की जगह हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। तीन मई की सुबह पिता की मृत्यु हो गई। इतना कहते ही प्रियंका फफक-फफक रो पड़ी।
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मृतक शिक्षामित्र की पत्नी तारावती (43) ने बताया कि पति अक्सर बेटी प्रियंका की शादी के बारे में बात करते थे। कहते थे कि बेटी के इंटर पास होने के बाद वह जल्द शादी कर देंगे लेकिन उनकी इच्छा अधूरी ही रह गई।
अब परिवार के आगे रोजी-रोटी का संकट
शिक्षामित्र दिनेश चंद्र के घर में उनकी पत्नी तारावती के अलावा पुत्री प्रियंका (20), पुत्र अमन (17), कौशल (15) और सरवन (12) हैं। दिनेश चंद्र अपने घर में अकेले कमाने वाले थे। उनकी मौत के बाद परिवार के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पत्नी का कहना है कि पति जब शिक्षक बने थे तो एक आस लगी थी कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन अब कुदरत ने उसका सबकुछ तबाह कर दिया। अब कैसे घर चलेगा, बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और बेटी की शादी कहां से करूंगी, यह चिंता सता रही है। सरकार को सिर्फ मेरी ही नहीं, कोरोना काल में दिवंगत हुए सभी शिक्षामित्रों के परिवार की सहायता करनी चाहिए।
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बीसलपुर तहसील क्षेत्र के गांव किशनपुर निवासी दिनेश चंद्र (45) प्राथमिक विद्यालय रुरिया धुरिया में शिक्षामित्र थे। 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर दिनेश चंद्र शिक्षक पद पर समायोजित हो गए। शिक्षक बनने के बाद दिनेश चंद्र ने भी बच्चों की बेहतर शिक्षा और बेटी प्रियंका की अच्छे घर में शादी का सपना संजोया था, मगर 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजित शिक्षकों को समायोजन रद्द कर दिया गया। दिनेश चंद्र फिर शिक्षामित्र के पद पर समायोजित कर दिए गए।
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दिनेश चंद्र की पुत्री प्रियंका ने बताया कि पिता ने पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उसके तीन दिन बाद उन्हें काफी खांसी आने लगी। इस पर एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली थी। हालत में सुधार न होने पर पिता की मतदान ड्यूटी भी काट दी गई। 29 अप्रैल को पिता की तबीयत एक बार फिर तेजी से बिगड़ने लगी। खांसी आने के साथ उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। इस पर उन्हें एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया गया। घर आकर पिता परिवार से अलग होकर रहने लगे, लेकिन उनकी तबीयत में सुधार की जगह हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। तीन मई की सुबह पिता की मृत्यु हो गई। इतना कहते ही प्रियंका फफक-फफक रो पड़ी।
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मृतक शिक्षामित्र की पत्नी तारावती (43) ने बताया कि पति अक्सर बेटी प्रियंका की शादी के बारे में बात करते थे। कहते थे कि बेटी के इंटर पास होने के बाद वह जल्द शादी कर देंगे लेकिन उनकी इच्छा अधूरी ही रह गई।
अब परिवार के आगे रोजी-रोटी का संकट
शिक्षामित्र दिनेश चंद्र के घर में उनकी पत्नी तारावती के अलावा पुत्री प्रियंका (20), पुत्र अमन (17), कौशल (15) और सरवन (12) हैं। दिनेश चंद्र अपने घर में अकेले कमाने वाले थे। उनकी मौत के बाद परिवार के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पत्नी का कहना है कि पति जब शिक्षक बने थे तो एक आस लगी थी कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन अब कुदरत ने उसका सबकुछ तबाह कर दिया। अब कैसे घर चलेगा, बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और बेटी की शादी कहां से करूंगी, यह चिंता सता रही है। सरकार को सिर्फ मेरी ही नहीं, कोरोना काल में दिवंगत हुए सभी शिक्षामित्रों के परिवार की सहायता करनी चाहिए।

शिक्षामित्र दिनेश चंद्र (फाइल फोटो)- फोटो : PILIBHIT