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इंदौर वाला कोरोना वायरस हुआ तो ज्यादा खतरे में डाल सकता है
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पीलीभीत। चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस अलग-अलग देश में अपनी पहचान बना चुका है। अब तक देश में 17 तरह की इसकी प्रजाति पाई जा चुकी है। अकेले इंदौर में 12 सौ से अधिक मामले पाए जाने के बाद वहां फैले वायरस को काफी खतरनाक माना जा रहा है। अब डर यह है कि इंदौर से आए टोडरपुर गांव के युवक में इंदौर में फैला वायरस ही न हो। हालांकि इसकी अलग से अभी पहचान नहीं हो पाई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक देश में अब तक 17 से ज्यादा देशों के वायरस पाए जा चुके हैं। इस संबंध में कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. विजय बहादुर राम ने बताया कि वायरस की प्रवृत्ति जानने के लिए इसके स्ट्रेन को चेक किया जाता है। स्ट्रेन की संख्या बढ़ने और घटने के आधार पर ही इसकी पहचान की जाती है। इसी से पता चलता है कि यह किस देश का वायरस है।
नोडल अधिकारी ने बताया कि रैपिड डायग्नोस्टिक किट से जांच संभव नहीं है। इससे केवल शरीर में एंटीबॉडीज का ही पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में अभी तक मात्र ओरोफेरिंजल (मुंह से लिया जाने वाले स्लाइवा) और निजोफेरिंजल (नाक से लिया जाने वाला सैंपल) के माध्यम से ही जांच की जा रही है। अभी शासन स्तर से यही गाइडलाइन आई हुई है। इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक देश में अब तक 17 से ज्यादा देशों के वायरस पाए जा चुके हैं। इस संबंध में कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. विजय बहादुर राम ने बताया कि वायरस की प्रवृत्ति जानने के लिए इसके स्ट्रेन को चेक किया जाता है। स्ट्रेन की संख्या बढ़ने और घटने के आधार पर ही इसकी पहचान की जाती है। इसी से पता चलता है कि यह किस देश का वायरस है।
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नोडल अधिकारी ने बताया कि रैपिड डायग्नोस्टिक किट से जांच संभव नहीं है। इससे केवल शरीर में एंटीबॉडीज का ही पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में अभी तक मात्र ओरोफेरिंजल (मुंह से लिया जाने वाले स्लाइवा) और निजोफेरिंजल (नाक से लिया जाने वाला सैंपल) के माध्यम से ही जांच की जा रही है। अभी शासन स्तर से यही गाइडलाइन आई हुई है। इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
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