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आइए, खाइए और जाइए.....
पीलीभीत।
Updated Mon, 31 Jul 2017 08:05 PM IST
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Come on, eat and go .....
- फोटो : Come on, eat and go .....
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जिले में 102 जर्जर स्कूलों में जान जोखिम में डाल पढ़ रहे हैं बच्चे
सुनील यादव
परिषदीय विद्यालयों के बारे में जो आम धारणा है, उसमें कहीं न कहीं सच्चाई भी है। हकीकत तो यह है कि कहीं कहीं तस्वीर इससे भी बदतर है। जर्जर भवन, स्कूलों में घूमते आवारा पशु, गंदगी से पटे शौचालय, शिक्षकों की कमी, गिने चुने बच्चे। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षा का स्तर क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। स्कूलों तक बच्चों को खींचने के लिए मिड डे मील, निशुल्क यूनिफार्म योजना आदि शुरू की गई, लेकिन शिक्षक स्कूलों में मिड डे मील को ही सर्वोपरि मानकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं। यानी आइए, खाइए और जाइए। इसी के मद्देनजर अमर उजाला ने शनिवार को जिले के परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की, तो तस्वीर कुछ यूं नजर आई।
विद्यालय भवन बने खतरे की पाठशाला
जिले में 1800 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय है। शासन द्वारा अनुरक्षण अनुदान के तहत प्रत्येक विद्यालय को मरम्मत आदि के लिए पांच-पांच हजार व रंगाई पुताई को सात-सात हजार रुपये दिए जातेे हैं। इन सबके बावजूद परिषदीय स्कूल दुर्दशा का शिकार ही रहते हैं। बेसिक शिक्षा के आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे जिले में लगभग 102 परिषदीय स्कूल जर्जर हालत में हैं। खास बात यह है कि इनमेें कुछ तो पहले ही कंडम घोषित कर दिए गए, लेकिन अभी तक कई स्कूलों में बच्चे खतरे में जान डालकर पढ़ाई कर रहे हैं।
यह है कुछ जर्जर स्कूलों की दशा
अमरिया ब्लाक का प्राथमिक स्कूल परेवा वैश्य वर्ष 1993 में बनाया गया था। यहां चार अतिरिक्त कक्ष भी है। खास बात यह है कि यहां छह सात साल पहले बने अतिरिक्त कक्ष गिरताऊ हाल में हैं। मजबूरन यहां के बच्चों को पुराने जर्जर घोषित हो चुके भवन में जान जोखिम में डालकर पढना पढ़ रहा है। प्राथमिक विद्यालय मुड़सैना मदारी का भवन भी जर्जर है, यहां एक अतिरिक्त कक्ष से ही काम चलाया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय माधोटांडा नंबर दो के जर्जर होने के चलते यहां एक अतिरिक्त कक्ष बनाया गया है। शहर का हाल देखे तो परिषदीय आर्दश प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय विभाग के रडार पर जर्जर नहीं है, लेकिन यह स्कूल भी जर्जर हो चुके हैं।
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कभी भी बन सकते हैं हादसे का सबब
विभाग द्वारा 102 स्कूलों को जर्जर तो घोषित कर दिया गया, लेकिन यह सभी अभी विद्यालय की बाउंड्रीवॉल के भीतर ही खड़े हैं। विभाग द्वारा इनकी नीलामी भी अभी तक नहीं की गई है। तर्क दिया जा रहा है कि जहां जर्जर स्कूल हैं, वहां अतिरिक्त कक्ष बनाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर अतिरिक्त कक्षों की संख्या कम होने पर इन्हीं जर्जर भवनों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
जिले के 587 शौचालय भी बदहाल
स्वच्छ भारत अभियान के तहत साफ सफाई के साथ शौचालयों आदि पर विशेष जोर दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार के के इस अभियान का असर परिषदीय स्कूलों पर चलता दिखाई नहीं दे रहा है। इसका खुलासा डीएम शीतल वर्मा द्वारा ली गई बैठक के दौरान हुआ। जिसमें विभाग के मुताबिक प्राथमिक विद्यालयों में 431 व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 156 शौचालय बदहाल चल रहे हैं। यह अलग बात है कि डीएम ने इन बदहाल शौचालयों को 31 जुलाई तक दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे, जो अभी तक ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं।
बच्चों के आगे पीने के पानी का भी संकट
परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के आगे पीने के पानी का भी संकट चल रहा है। स्कूलों की पेयजल व्यवस्था पर गौर करें तो जिले भर में करीब 246 हैंडपंप खराब चल रहे हैं। विभाग के मुताबिक इसमें 176 हैंडपंप रिबोर होने हैं, जबकि 70 हैंडपंपों की मरम्मत की जानी है। इन सबके चलते बच्चों को पीने के पानी के लिए स्कूलों से बाहर जाना पड़ रहा है। जिला समन्वयक निर्माण पंकज शाक्य ने बताया कि शौचालयों व हैंडपंपों को सूची डीपीआरओ को भेज दी गई है।
स्कूल परिसर में मोहल्ले वाले फेंकते हैं कूड़ा
चिराग तले अंधेरा, यह कहावत बीएसए कार्यालय परिसर में संचालित हो रहे स्कूलों पर काफी हद तक ठीक बैठती है। इस परिसर में प्राथमिक विद्यालय बागगुलशेर खां व भीमसेन ब्रजरानी प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों के सामने परिसर में ही तालाब है। आसपास के मोहल्लेवासी इस तालाब में लंबे अरसे से कूड़ा फेंकते चले आ रहे हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों के अलावा इधर से गुजरने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ब्लाकों से जर्जर स्कूल भवनों की सूची मंगा ली गई हैं। यह सूची पीडब्ल्यूडी विभाग को दे दी गई। प्रमाणपत्र मिलने के बाद शीघ्र मूल्यांकन कराकर इन्हें नीलाम कराया जाएगा। वहीं शौचालय व हैंडपंपों की सूची डीपीआरओ को सौंपी जा चुकी है। उनके स्तर से ही कार्य कराए जाने हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को जर्जर भवनों में शिक्षण कार्य न कराने के निर्देश पूर्व में ही दिए जा चुके हैं।
डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए
पूरनपुर के 70 स्कूलों में होता है जलभराव
पूरनपुर। ब्लाक क्षेत्र में भी कई जर्जर स्कूल भवनों में बच्चे पढने को मजबूर है। कुछ जर्जर स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा कक्षों का निर्माण करवाकर काम चलाया जा रहा है। इन स्कूलों में नजर डाले तो नगर का प्राथमिक स्कूल नंबर एक का भवन जर्जर है। इस स्कूल में कुछ साल पहले हुए अतिरिक्त कक्ष में स्कूल का संचालन किया जा रहा है। सिमरा ताल्लुके महाराजपुर का जूनियर हाईस्कूल भवन खस्ता हाल में है। इस भवन के कभी भी धराशायी होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा क्षेत्र के करीब 70 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में बरसात के दौरान जलभराव से बच्चों व स्टाफ को जूझना पड़ता है। प्राथमिक स्कूल केसरपुर में तो जलभराव को लेकर पूरी बरसात बच्चों को जूनियर हाईस्कूल भवन में बैठकर शिक्षा लेनी पड़ती है। स्कूलों में जलभराव को डीएम ने गंभीबरता से लेकर हाल में ही इसकी रिपोर्ट तलब की थी। साथ ही खंड विकास अधिकारी को स्कूलों में जलभराव न हो के निर्देश दिए थे।
बीसलपुर में भी कई जर्जर स्कूलों में चल रही हैं कक्षाएं
बीसलपुर। बीसलपुर तहसील क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के हालात बेहतर नहीं दिखे। क्षेत्र के गांव रसायांखानपुर, मीरपुर ग्रंट, भौरूआ, रिछोला घासी, सायर, इमलिया मरौरी, साबेपुर, कनगवां, केशौपुर, जल्लापुर, ललौर गुजरानपुर, डंडिया लच्छी, तनाया व लखनऊ कलां के प्राथमिक विद्यालय भवनों के काफी हिस्से बहुत समय से जर्जर हैं। विभागीय अनदेखी के चलते इन जर्जर भवनों के स्थानों पर नए भवन नही बनवाए जा रहे है। प्रधानाध्यापकों ने खतरा महसूस करते हुए बच्चों को जर्जर स्थानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर बिठाना शुरू कर दिया हेै। रसायाखानपुर के विद्यालय परिसर में काफी कीचड़ भरा हुआ है। इस कीचड़ में बतखें तैरती रहती है। रसायाखानपुर, मीरपुर ग्रंट व भौरूंआ के विद्यालयों के बरामदे भी काफी जर्जर हेै। गांव तनाया व भगवंतपुर के प्राथमिक विद्यालय के शौचालय भी काफी जर्जर है। जिसके कारण शौचालय बंद रखे जाते है और बच्चे इनका उपयोग नहीं कर पाते हैं। मीरपुर ग्रंट के अतिरिक्त कक्ष में फर्श नहीं है। जागरूक अभिभावक इन समस्याओं के संबंध में विभागीय अधिकारियों को ध्यान समय समय पर आकर्षित कराते रहते हैं, लेकिन आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस संबंध में बीईओ एमएल वर्मा व बीईओ शिवेंद्र वर्मा ने बताया कि बहुत जल्द जर्जर भवनों की समस्या का समाधान हो जाएगा।
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सुनील यादव
परिषदीय विद्यालयों के बारे में जो आम धारणा है, उसमें कहीं न कहीं सच्चाई भी है। हकीकत तो यह है कि कहीं कहीं तस्वीर इससे भी बदतर है। जर्जर भवन, स्कूलों में घूमते आवारा पशु, गंदगी से पटे शौचालय, शिक्षकों की कमी, गिने चुने बच्चे। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षा का स्तर क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। स्कूलों तक बच्चों को खींचने के लिए मिड डे मील, निशुल्क यूनिफार्म योजना आदि शुरू की गई, लेकिन शिक्षक स्कूलों में मिड डे मील को ही सर्वोपरि मानकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं। यानी आइए, खाइए और जाइए। इसी के मद्देनजर अमर उजाला ने शनिवार को जिले के परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की, तो तस्वीर कुछ यूं नजर आई।
विद्यालय भवन बने खतरे की पाठशाला
जिले में 1800 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय है। शासन द्वारा अनुरक्षण अनुदान के तहत प्रत्येक विद्यालय को मरम्मत आदि के लिए पांच-पांच हजार व रंगाई पुताई को सात-सात हजार रुपये दिए जातेे हैं। इन सबके बावजूद परिषदीय स्कूल दुर्दशा का शिकार ही रहते हैं। बेसिक शिक्षा के आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे जिले में लगभग 102 परिषदीय स्कूल जर्जर हालत में हैं। खास बात यह है कि इनमेें कुछ तो पहले ही कंडम घोषित कर दिए गए, लेकिन अभी तक कई स्कूलों में बच्चे खतरे में जान डालकर पढ़ाई कर रहे हैं।
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यह है कुछ जर्जर स्कूलों की दशा
अमरिया ब्लाक का प्राथमिक स्कूल परेवा वैश्य वर्ष 1993 में बनाया गया था। यहां चार अतिरिक्त कक्ष भी है। खास बात यह है कि यहां छह सात साल पहले बने अतिरिक्त कक्ष गिरताऊ हाल में हैं। मजबूरन यहां के बच्चों को पुराने जर्जर घोषित हो चुके भवन में जान जोखिम में डालकर पढना पढ़ रहा है। प्राथमिक विद्यालय मुड़सैना मदारी का भवन भी जर्जर है, यहां एक अतिरिक्त कक्ष से ही काम चलाया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय माधोटांडा नंबर दो के जर्जर होने के चलते यहां एक अतिरिक्त कक्ष बनाया गया है। शहर का हाल देखे तो परिषदीय आर्दश प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय विभाग के रडार पर जर्जर नहीं है, लेकिन यह स्कूल भी जर्जर हो चुके हैं।
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कभी भी बन सकते हैं हादसे का सबब
विभाग द्वारा 102 स्कूलों को जर्जर तो घोषित कर दिया गया, लेकिन यह सभी अभी विद्यालय की बाउंड्रीवॉल के भीतर ही खड़े हैं। विभाग द्वारा इनकी नीलामी भी अभी तक नहीं की गई है। तर्क दिया जा रहा है कि जहां जर्जर स्कूल हैं, वहां अतिरिक्त कक्ष बनाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर अतिरिक्त कक्षों की संख्या कम होने पर इन्हीं जर्जर भवनों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
जिले के 587 शौचालय भी बदहाल
स्वच्छ भारत अभियान के तहत साफ सफाई के साथ शौचालयों आदि पर विशेष जोर दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार के के इस अभियान का असर परिषदीय स्कूलों पर चलता दिखाई नहीं दे रहा है। इसका खुलासा डीएम शीतल वर्मा द्वारा ली गई बैठक के दौरान हुआ। जिसमें विभाग के मुताबिक प्राथमिक विद्यालयों में 431 व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 156 शौचालय बदहाल चल रहे हैं। यह अलग बात है कि डीएम ने इन बदहाल शौचालयों को 31 जुलाई तक दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे, जो अभी तक ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं।
बच्चों के आगे पीने के पानी का भी संकट
परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के आगे पीने के पानी का भी संकट चल रहा है। स्कूलों की पेयजल व्यवस्था पर गौर करें तो जिले भर में करीब 246 हैंडपंप खराब चल रहे हैं। विभाग के मुताबिक इसमें 176 हैंडपंप रिबोर होने हैं, जबकि 70 हैंडपंपों की मरम्मत की जानी है। इन सबके चलते बच्चों को पीने के पानी के लिए स्कूलों से बाहर जाना पड़ रहा है। जिला समन्वयक निर्माण पंकज शाक्य ने बताया कि शौचालयों व हैंडपंपों को सूची डीपीआरओ को भेज दी गई है।
स्कूल परिसर में मोहल्ले वाले फेंकते हैं कूड़ा
चिराग तले अंधेरा, यह कहावत बीएसए कार्यालय परिसर में संचालित हो रहे स्कूलों पर काफी हद तक ठीक बैठती है। इस परिसर में प्राथमिक विद्यालय बागगुलशेर खां व भीमसेन ब्रजरानी प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों के सामने परिसर में ही तालाब है। आसपास के मोहल्लेवासी इस तालाब में लंबे अरसे से कूड़ा फेंकते चले आ रहे हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों के अलावा इधर से गुजरने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ब्लाकों से जर्जर स्कूल भवनों की सूची मंगा ली गई हैं। यह सूची पीडब्ल्यूडी विभाग को दे दी गई। प्रमाणपत्र मिलने के बाद शीघ्र मूल्यांकन कराकर इन्हें नीलाम कराया जाएगा। वहीं शौचालय व हैंडपंपों की सूची डीपीआरओ को सौंपी जा चुकी है। उनके स्तर से ही कार्य कराए जाने हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को जर्जर भवनों में शिक्षण कार्य न कराने के निर्देश पूर्व में ही दिए जा चुके हैं।
डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए
पूरनपुर के 70 स्कूलों में होता है जलभराव
पूरनपुर। ब्लाक क्षेत्र में भी कई जर्जर स्कूल भवनों में बच्चे पढने को मजबूर है। कुछ जर्जर स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा कक्षों का निर्माण करवाकर काम चलाया जा रहा है। इन स्कूलों में नजर डाले तो नगर का प्राथमिक स्कूल नंबर एक का भवन जर्जर है। इस स्कूल में कुछ साल पहले हुए अतिरिक्त कक्ष में स्कूल का संचालन किया जा रहा है। सिमरा ताल्लुके महाराजपुर का जूनियर हाईस्कूल भवन खस्ता हाल में है। इस भवन के कभी भी धराशायी होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा क्षेत्र के करीब 70 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में बरसात के दौरान जलभराव से बच्चों व स्टाफ को जूझना पड़ता है। प्राथमिक स्कूल केसरपुर में तो जलभराव को लेकर पूरी बरसात बच्चों को जूनियर हाईस्कूल भवन में बैठकर शिक्षा लेनी पड़ती है। स्कूलों में जलभराव को डीएम ने गंभीबरता से लेकर हाल में ही इसकी रिपोर्ट तलब की थी। साथ ही खंड विकास अधिकारी को स्कूलों में जलभराव न हो के निर्देश दिए थे।
बीसलपुर में भी कई जर्जर स्कूलों में चल रही हैं कक्षाएं
बीसलपुर। बीसलपुर तहसील क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के हालात बेहतर नहीं दिखे। क्षेत्र के गांव रसायांखानपुर, मीरपुर ग्रंट, भौरूआ, रिछोला घासी, सायर, इमलिया मरौरी, साबेपुर, कनगवां, केशौपुर, जल्लापुर, ललौर गुजरानपुर, डंडिया लच्छी, तनाया व लखनऊ कलां के प्राथमिक विद्यालय भवनों के काफी हिस्से बहुत समय से जर्जर हैं। विभागीय अनदेखी के चलते इन जर्जर भवनों के स्थानों पर नए भवन नही बनवाए जा रहे है। प्रधानाध्यापकों ने खतरा महसूस करते हुए बच्चों को जर्जर स्थानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर बिठाना शुरू कर दिया हेै। रसायाखानपुर के विद्यालय परिसर में काफी कीचड़ भरा हुआ है। इस कीचड़ में बतखें तैरती रहती है। रसायाखानपुर, मीरपुर ग्रंट व भौरूंआ के विद्यालयों के बरामदे भी काफी जर्जर हेै। गांव तनाया व भगवंतपुर के प्राथमिक विद्यालय के शौचालय भी काफी जर्जर है। जिसके कारण शौचालय बंद रखे जाते है और बच्चे इनका उपयोग नहीं कर पाते हैं। मीरपुर ग्रंट के अतिरिक्त कक्ष में फर्श नहीं है। जागरूक अभिभावक इन समस्याओं के संबंध में विभागीय अधिकारियों को ध्यान समय समय पर आकर्षित कराते रहते हैं, लेकिन आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस संबंध में बीईओ एमएल वर्मा व बीईओ शिवेंद्र वर्मा ने बताया कि बहुत जल्द जर्जर भवनों की समस्या का समाधान हो जाएगा।