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पककर तैयार धान की फसल हवा के साथ हुई बारिश में गिरी
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पूरनपुर। हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में कटने को तैयार खड़ी धान की फसल गिर गई। धान की फसल गिरने से उसके खराब होने, दाना काला होने, पूरी फसल खेत से न निकलने को लेकर किसान चिंतित है।
शुक्रवार शाम को करीब पौन घंटे तक झमाझम हुई बारिश से खेत जलमग्न हो गए थे। हालांकि बारिश थमने के बाद किसानों ने यह सोच कर राहत की सांस ली कि बारिश रुकने से खेतों में भरा पानी सूख जाएगा और अभी खास नुकसान नहीं होगा। शनिवार शाम को फिर हवा के साथ हुई। जिससे कटने को तैयार धान खेतों में गिर गया। गिरे धान के खराब होने, दाना काला पड़ने, फसल कटवाते समय धान की बालियों के खेतों में रहने की आशंका से किसान परेशान है।
हवा के साथ हुई बारिश में करीब चार एकड़ धान चटाई की तरह जमीन में बिछ गया है। धान की कटाई अब कंबाइन से नहीं हो पाएगी। हाथ से धान कटवाने पर लागत तो बढ़ेगी ही साथ ही दाना काला पड़ने की आशंका है।
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- गुरदेव सिंह, बहादुरपुर
धान पकने पर बाली का वजन अधिक हो गया था। जबकि नीचे का हिस्सा पकने से कमजोर हो गया था। बेमौसम बारिश से धान की फसल गिर गया है। पहले फसल के दाम मिलने की उम्मीद कम ही थी। अब तो बड़ा नुकसान हो गया है। - सुरेंद्र पाल, बंगला मित्रसेनपुर
इस बार धान की फसल बहुत अच्छी थी। पककर तैयार हुई फसल को आज, कल में कटवाने की योजना बना रहे थे। मगर बेमौसम हुई बारिश से फसल को चौपट कर दिया है। धान खराब होने से उसकी लागत निकलनी मुश्किल हो गई है।
- कमलजीत सिंह, पिपरिया दुलई
धान की रोपाई के समय पर्याप्त बारिश नहीं हुई। फसल करने को कई बार सिंचाई करनी पड़ी। अब जब धान की फसल तैयार हो चुकी थी और बारिश की जरूरत नहीं थी। जमीन में धान गिरने से 25 प्रतिशत फसल के नुकसान होने का अनुमान है। - मनदीप सिंह, पडरिया
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शुक्रवार शाम को करीब पौन घंटे तक झमाझम हुई बारिश से खेत जलमग्न हो गए थे। हालांकि बारिश थमने के बाद किसानों ने यह सोच कर राहत की सांस ली कि बारिश रुकने से खेतों में भरा पानी सूख जाएगा और अभी खास नुकसान नहीं होगा। शनिवार शाम को फिर हवा के साथ हुई। जिससे कटने को तैयार धान खेतों में गिर गया। गिरे धान के खराब होने, दाना काला पड़ने, फसल कटवाते समय धान की बालियों के खेतों में रहने की आशंका से किसान परेशान है।
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हवा के साथ हुई बारिश में करीब चार एकड़ धान चटाई की तरह जमीन में बिछ गया है। धान की कटाई अब कंबाइन से नहीं हो पाएगी। हाथ से धान कटवाने पर लागत तो बढ़ेगी ही साथ ही दाना काला पड़ने की आशंका है।
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- गुरदेव सिंह, बहादुरपुर
धान पकने पर बाली का वजन अधिक हो गया था। जबकि नीचे का हिस्सा पकने से कमजोर हो गया था। बेमौसम बारिश से धान की फसल गिर गया है। पहले फसल के दाम मिलने की उम्मीद कम ही थी। अब तो बड़ा नुकसान हो गया है। - सुरेंद्र पाल, बंगला मित्रसेनपुर
इस बार धान की फसल बहुत अच्छी थी। पककर तैयार हुई फसल को आज, कल में कटवाने की योजना बना रहे थे। मगर बेमौसम हुई बारिश से फसल को चौपट कर दिया है। धान खराब होने से उसकी लागत निकलनी मुश्किल हो गई है।
- कमलजीत सिंह, पिपरिया दुलई
धान की रोपाई के समय पर्याप्त बारिश नहीं हुई। फसल करने को कई बार सिंचाई करनी पड़ी। अब जब धान की फसल तैयार हो चुकी थी और बारिश की जरूरत नहीं थी। जमीन में धान गिरने से 25 प्रतिशत फसल के नुकसान होने का अनुमान है। - मनदीप सिंह, पडरिया