{"_id":"614cd2ca8ebc3efda9462ccf","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly4606380163","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशासन ने नहीं दी रामलीला के आयोजन की अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशासन ने नहीं दी रामलीला के आयोजन की अनुमति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीसलपुर। नगर में दो अक्तूबर से श्रीराम लीला शुरू होने को है। मगर प्रशासन ने रामलीला के आयोजन की अनुमति अभी नहीं दी है। इसलिए मेला कमेटी की ओर से भी कोई तैयारी शुरू नहीं की गई है। इसलिए अभी तक श्रीराम लीला के आयोजन को लेकर संशय बना हुआ है।
नगर में श्रीराम लीला मेले शुरू कराने के लिए कमेटी ने दो अक्तूबर की तिथि तय की थी। बुधवार को मेला कमेटी के लोग एसडीएम राकेश गुप्ता से मिले और रामलीला मेले के आयोजन की अनुमति मांगी। एसडीएम ने कोरोना संक्रमण के चलते शासन स्तर से मेले की अनुमति न दिए जाने के आदेश का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे मेला कमेटी के लेाग मायूस होकर लौट आए। पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रमण के चलते श्रीराम लीला मेला नहीं लगा था।
कवि सम्मेलन पर भी लगा ग्रहण: श्रीराम लीला मेले में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन होता है, जिसमें देश के विभिन्न शहरों के मशहूर कवि और शायर आते हैं। कवि सम्मेलन और मुशायरे के शोैकीन लोग पूरे वर्ष कवि सम्मेलन का इंतजार करते हैं।
विज्ञापन
रावण का अभिनय करने वाले की वाण लगने से हुई थी मौत
यहां की रामलीला सौ साल से अधिक पुरानी है। बुजुर्गों के अनुसार श्रीराम लीला में मोहल्ला दुर्गाप्रसाद के गंगा विष्णु उर्फ कल्लूमल रस्तोगी रावण का अभिनय करते थे। वर्ष 1986 में रावण वध की लीला के एक दिन पहले कल्लू मल ने परिजनों और मोहल्ले वालों के समक्ष इच्छा जताई कि अगले दिन होने वाली रावण वध की लीला के दौरान यदि उनकी मौत भगवान राम के हाथों हो जाए तो उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। उनकी बात सुनने वालों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अगले दिन लीला के दौरान राम-रावण युद्ध हुआ, जिसमें श्रीराम का वाण लगते ही कल्लूमल की मौत हो गई। कल्लू मल की याद में उनका स्टेचू अब भी मेला मैदान में लगा है।
प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण दो अक्तूबर से शुरू होने वाले मेले में संशय पैदा हो गया है। अनुमति न मिलने के कारण अभी तक मेला कमेटी की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है। दो अक्तूबर को मेला कमेटी के लोग गणेश पूजन लीला सांकेतिक रूप से कराएंगे।
- विष्णु गोयल, उपसभापति रामलीला कमेटी, बीसलपुर
विज्ञापन
नगर में श्रीराम लीला मेले शुरू कराने के लिए कमेटी ने दो अक्तूबर की तिथि तय की थी। बुधवार को मेला कमेटी के लोग एसडीएम राकेश गुप्ता से मिले और रामलीला मेले के आयोजन की अनुमति मांगी। एसडीएम ने कोरोना संक्रमण के चलते शासन स्तर से मेले की अनुमति न दिए जाने के आदेश का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे मेला कमेटी के लेाग मायूस होकर लौट आए। पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रमण के चलते श्रीराम लीला मेला नहीं लगा था।
विज्ञापन
कवि सम्मेलन पर भी लगा ग्रहण: श्रीराम लीला मेले में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन होता है, जिसमें देश के विभिन्न शहरों के मशहूर कवि और शायर आते हैं। कवि सम्मेलन और मुशायरे के शोैकीन लोग पूरे वर्ष कवि सम्मेलन का इंतजार करते हैं।
विज्ञापन
रावण का अभिनय करने वाले की वाण लगने से हुई थी मौत
यहां की रामलीला सौ साल से अधिक पुरानी है। बुजुर्गों के अनुसार श्रीराम लीला में मोहल्ला दुर्गाप्रसाद के गंगा विष्णु उर्फ कल्लूमल रस्तोगी रावण का अभिनय करते थे। वर्ष 1986 में रावण वध की लीला के एक दिन पहले कल्लू मल ने परिजनों और मोहल्ले वालों के समक्ष इच्छा जताई कि अगले दिन होने वाली रावण वध की लीला के दौरान यदि उनकी मौत भगवान राम के हाथों हो जाए तो उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। उनकी बात सुनने वालों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अगले दिन लीला के दौरान राम-रावण युद्ध हुआ, जिसमें श्रीराम का वाण लगते ही कल्लूमल की मौत हो गई। कल्लू मल की याद में उनका स्टेचू अब भी मेला मैदान में लगा है।
प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण दो अक्तूबर से शुरू होने वाले मेले में संशय पैदा हो गया है। अनुमति न मिलने के कारण अभी तक मेला कमेटी की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है। दो अक्तूबर को मेला कमेटी के लोग गणेश पूजन लीला सांकेतिक रूप से कराएंगे।
- विष्णु गोयल, उपसभापति रामलीला कमेटी, बीसलपुर