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मुआवजा देने की कार्रवाई सुस्त, किसानों को करना होगा इंतजार
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हरीपुर जंगल में धनाराघाट रोड को पार करते हाथी।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पिछले डेढ़ माह से नेपाल से आए हाथी किसानों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। खेतों में तैयार खड़ी फसल को बर्बाद होता देख किसान परेशान हैं। मगर पीटीआर प्रशासन की ओर से हाथियों को खदेड़ने की कोई प्रभावी प्रक्रिया नहीं की जा रही है। सिर्फ राजस्व टीम से सर्वे कराया गया है। सर्वे रिपोर्ट में 39 किसानों की क्षति शामिल है। सत्यापन के लिए कृषि विभाग को सर्वे रिपोर्ट भेजी गई है। इसलिए किसानों को मुआवजा के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
नेपाल की शुक्ला फंटा सेंक्चुरी से निकलकर बराही रेंज के लग्गा-भग्गा जंगल में चार अगस्त को हाथियों की चहल कदमी शुरू हो गई थी। रोजाना रात में हाथी जंगल से निकलकर थारू पट्टी की बसी आबादी के निकट पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे है। झोंपड़ियों को भी तहस नहस कर दिया था। इसके बाद महोफ, माला रेंज में जंगल के किनारे खड़ी धान और गन्ना की फसल को लगातार तहस नहस कर रहे थे। कई दिनों तक उत्तराखंड की सुराई रेंज में भी हाथियों ने डेरा जमाया था। इसके बाद फिर पीटीआर के जंगल में हाथी लौट आए। पीटीआर प्रशासन सुस्त रवैया के चलते हाथी लगातार जंगल से बाहर निकलकर खेतों में तैयार खड़ी फसल को बर्बाद कर रहे है। महोफ रेंज के किसानों ने पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा के नेतृत्व में पीटीआर मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने के बाद ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद पीटीआर के निर्देश पर सामाजिक वानिकी की ओर से राजस्व टीमों को लगाकर फसल नुकसान का आंकलन कराने के लिए सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट में 43 किसानों को चिह्नित किया गया। बाद में चार किसानों के नाम डबल होने के कारण हटा दिए गए थे। इसके बाद 39 किसानों के नाम सत्यापन प्रक्रिया के लिए कृषि विभाग को भेजे गए है। डेढ़ माह गुजरने के बाद भी अभी तक मुआवजा तो दूर की बात, किस किसान को कितना मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
डीएम के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई सर्वे प्रक्रिया
पूरनपुर क्षेत्र के बर्बाद फसल को एसडीएम के साथ देखने पहुंचने पूरनपुर के विधायक का किसानों ने घेराव किया था। विधायक ने अधिकारियों को तत्काल मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए थे। इस पर किसान शांत हो गए। मगर पीटीआर की ओर से बर्बाद फसल का सर्वे शुरू नहीं कराया गया। इसी दौरान डीएम पुलकित खरे ने डीएफओ का कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिसके बाद आनन फानन में सर्वे शुरू कर दिया गया।
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राजस्व टीम ने 39 किसानों की फसल का आंकलन करने के बाद सर्वे रिपोर्ट दी थी। सत्यापन के लिए कृषि विभाग को भेजी गई। बाकी किसानों की फसल का सर्वे जारी है। करीब पांच लाख का नुकसान हुआ है। 15 से 20 दिन में किसानों को मुआवजा दिला दिया जाएगा।
- संजीव कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी
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नेपाल की शुक्ला फंटा सेंक्चुरी से निकलकर बराही रेंज के लग्गा-भग्गा जंगल में चार अगस्त को हाथियों की चहल कदमी शुरू हो गई थी। रोजाना रात में हाथी जंगल से निकलकर थारू पट्टी की बसी आबादी के निकट पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे है। झोंपड़ियों को भी तहस नहस कर दिया था। इसके बाद महोफ, माला रेंज में जंगल के किनारे खड़ी धान और गन्ना की फसल को लगातार तहस नहस कर रहे थे। कई दिनों तक उत्तराखंड की सुराई रेंज में भी हाथियों ने डेरा जमाया था। इसके बाद फिर पीटीआर के जंगल में हाथी लौट आए। पीटीआर प्रशासन सुस्त रवैया के चलते हाथी लगातार जंगल से बाहर निकलकर खेतों में तैयार खड़ी फसल को बर्बाद कर रहे है। महोफ रेंज के किसानों ने पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा के नेतृत्व में पीटीआर मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने के बाद ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद पीटीआर के निर्देश पर सामाजिक वानिकी की ओर से राजस्व टीमों को लगाकर फसल नुकसान का आंकलन कराने के लिए सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट में 43 किसानों को चिह्नित किया गया। बाद में चार किसानों के नाम डबल होने के कारण हटा दिए गए थे। इसके बाद 39 किसानों के नाम सत्यापन प्रक्रिया के लिए कृषि विभाग को भेजे गए है। डेढ़ माह गुजरने के बाद भी अभी तक मुआवजा तो दूर की बात, किस किसान को कितना मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
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डीएम के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई सर्वे प्रक्रिया
पूरनपुर क्षेत्र के बर्बाद फसल को एसडीएम के साथ देखने पहुंचने पूरनपुर के विधायक का किसानों ने घेराव किया था। विधायक ने अधिकारियों को तत्काल मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए थे। इस पर किसान शांत हो गए। मगर पीटीआर की ओर से बर्बाद फसल का सर्वे शुरू नहीं कराया गया। इसी दौरान डीएम पुलकित खरे ने डीएफओ का कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिसके बाद आनन फानन में सर्वे शुरू कर दिया गया।
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राजस्व टीम ने 39 किसानों की फसल का आंकलन करने के बाद सर्वे रिपोर्ट दी थी। सत्यापन के लिए कृषि विभाग को भेजी गई। बाकी किसानों की फसल का सर्वे जारी है। करीब पांच लाख का नुकसान हुआ है। 15 से 20 दिन में किसानों को मुआवजा दिला दिया जाएगा।
- संजीव कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी