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जंगल किनारे के खेतों में करें लेमनग्रास, हल्दी और खस की खेती
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पीलीभीत। डीएम पुलकित खरे की अध्यक्षता में मानव वन्यजीव संघर्ष को लेकर ग्राम पंचायत कंजा हर्रेया के माला कॉलोनी व रिछोला में गोष्ठी हुई।
गोष्ठी में जंगल से लगे ग्रामों के प्रधान व किसानों ने प्रतिभाग किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य जंगल के किनारे से लगे गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष विराम के लिए गन्ने की खेती के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों के प्रति किसानों को जागरूक कराना रहा। गोष्ठी में डीएम ने किसानों से कहा कि जंगल किनारे गन्ने की फसल के स्थान पर कई गुना लाभ देने वाली लैमनग्रास, हल्दी, सेट्रोनेला, खस, पामारोज जैसी सुगंधित औषधि वाली फसलों का उत्पादन कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इन फसलों में वन्यजीवों द्वारा किसी प्रकार का नुकसान नहीं किया जाता है। जंगली जानवर सुगंध के कारण खेत में नहीं आते हैं। इससे उनके हमले का खतरा कम हो जाता है। इसके बाद डीएम ने ग्राम रिछोला के किसान दीनदयाल द्वारा की जा रही खीरा व सब्जी की खेती का जायजा लिया। किसान ने बताया कि एक बीघा में खीरा की खेती से 40 हजार रुपये का लाभ एक बार में प्राप्त हुआ है। दूसरी बार इससे अधिक लाभ होगा। गोष्ठी में जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र कुमार मिश्रा, कृषि वैज्ञानिक डॉ. ढाका, एसडीओ टाइगर रिजर्व, प्रगतिशील किसान संजय सिंह, ग्राम प्रधान रिछौला लीलावती, ग्राम प्रधान नीतू मित्रा सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
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गोष्ठी में जंगल से लगे ग्रामों के प्रधान व किसानों ने प्रतिभाग किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य जंगल के किनारे से लगे गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष विराम के लिए गन्ने की खेती के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों के प्रति किसानों को जागरूक कराना रहा। गोष्ठी में डीएम ने किसानों से कहा कि जंगल किनारे गन्ने की फसल के स्थान पर कई गुना लाभ देने वाली लैमनग्रास, हल्दी, सेट्रोनेला, खस, पामारोज जैसी सुगंधित औषधि वाली फसलों का उत्पादन कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इन फसलों में वन्यजीवों द्वारा किसी प्रकार का नुकसान नहीं किया जाता है। जंगली जानवर सुगंध के कारण खेत में नहीं आते हैं। इससे उनके हमले का खतरा कम हो जाता है। इसके बाद डीएम ने ग्राम रिछोला के किसान दीनदयाल द्वारा की जा रही खीरा व सब्जी की खेती का जायजा लिया। किसान ने बताया कि एक बीघा में खीरा की खेती से 40 हजार रुपये का लाभ एक बार में प्राप्त हुआ है। दूसरी बार इससे अधिक लाभ होगा। गोष्ठी में जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र कुमार मिश्रा, कृषि वैज्ञानिक डॉ. ढाका, एसडीओ टाइगर रिजर्व, प्रगतिशील किसान संजय सिंह, ग्राम प्रधान रिछौला लीलावती, ग्राम प्रधान नीतू मित्रा सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।