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प्रधानमंत्री आवास आधे से ज्यादा अधूरे, फिर भी अफसर साधे चुप्पी
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पीलीभीत। सपनों का आशियाना बनाने का सपना चार साल बीतने के बाद भी लाभार्थियों का पूरा नहीं हो रहा है। योजना शुरू होने के बाद 20029 लाभार्थियों ने जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) में आवेदन किया था। इनमें सिर्फ 6225 लाभार्थियों का ही आवास पूरा हो सका है। इनमें 13504 लाभार्थियों के आवास आज भी अधूरे है। जबकि अधिकारी जल्द पूरा कराने के दावे कर रहे है। चार साल में भी आवास पूरे नहीं होने का बात से सब बचते नजर आए।
प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना 2017 में शुरू हुई थी। इसमें पात्र लाभार्थियों को तीन किस्तों में आवास बनाने के लिए ढाई लाख रुपये का बजट जिला नगरीय विकास अभिकरण की ओर से लाभार्थियों के खाते में भेजा जाता है। पहली किस्त 50 हजार रुपये की आवास के फाउंडेशन के लिए लाभार्थी को दी जाती है। इसके बाद डेढ़ लाख रुपये की किस्त दीवारों का निर्माण और आवास का लिंटर आदि डालने को भेजी जाती है। जबकि तीसरी किस्त में मकान का प्लास्टर कराने और खिड़की दरवाजों के लिए लाभार्थी को दी जाती है। आवास का काम पूरा होने के बाद परियोजना अधिकारी संबंधित इंजीनियर के साथ निरीक्षण कर पूरी डिटेल शासन को भेज दी जाती है। इसी योजना का लाभ लेने के लिए 20029 लाभार्थियों ने आवेदन किया था। जांच में सभी पात्र मिलने पर आवास का स्वीकृति तो मिल गई, मगर 2017 में आवेदन करने वाले लाभार्थियों को चार साल बीतने के बाद भी 30 लाभार्थी ऐसे है जिनको दूसरी किस्त नहीं मिली और 1754 को तीसरी किस्त मिलने की आस है। 2018 में 580 लाभार्भी दूसरी और 5229 तीसरी किस्त से वंचित है। वहीं 2019 में 1122 लाभार्थियों को दूसरी और 5348 को तीसरी किस्त का इंतजार है। किश्त कब मिलेगी इसका किसी को पता नहीं है। इससे उनके आवास आज भी अधूरे पड़े हुए है।
किश्त जारी होने के बाद जिम्मेदार भी नहीं लेते सुध
आवास की स्वीकृति के बाद पहली किस्त जारी होते ही डूडा की ओर से निगरानी शुरू कर दी जाती है। इसके बाद पहली किस्त का काम पूरा होने के बाद दूसरी किस्त जारी की जाती है। बाद में आवास की मरम्मत के लिए तीसरी किस्त जारी होती है। मगर जनपद में इन जिम्मेदारों को ही नहीं पता है। कि किस लाभार्थी के आवास का कितना काम शेष बचा है। जबकि बिचौलिया हावी होकर लाभार्थी से पैसे ऐंठ लेते है और उसका आवास अधूरा रह जाता है। आवास अधूरा होने के भय से वह संबंधी अधिकारी के यहां जाने से भी कतरे लगाता है।
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लाभार्थियों को लगातार किस्त जारी कराई जा रही है। पहले किस्त का काम पूरा होने के बाद दूसरी और तीसरी किस्त जारी करा दी जा रही है। अगर किसी लाभार्थी ने अपना आवास अभी तक पूरा नहीं कराया है, तो उसको दिखवाया जाएगा। आवासों की स्थित से शासन को भी अवगत करा दिया जाता है। - अनामिका सक्सेना, पीओ डूडा
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प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना 2017 में शुरू हुई थी। इसमें पात्र लाभार्थियों को तीन किस्तों में आवास बनाने के लिए ढाई लाख रुपये का बजट जिला नगरीय विकास अभिकरण की ओर से लाभार्थियों के खाते में भेजा जाता है। पहली किस्त 50 हजार रुपये की आवास के फाउंडेशन के लिए लाभार्थी को दी जाती है। इसके बाद डेढ़ लाख रुपये की किस्त दीवारों का निर्माण और आवास का लिंटर आदि डालने को भेजी जाती है। जबकि तीसरी किस्त में मकान का प्लास्टर कराने और खिड़की दरवाजों के लिए लाभार्थी को दी जाती है। आवास का काम पूरा होने के बाद परियोजना अधिकारी संबंधित इंजीनियर के साथ निरीक्षण कर पूरी डिटेल शासन को भेज दी जाती है। इसी योजना का लाभ लेने के लिए 20029 लाभार्थियों ने आवेदन किया था। जांच में सभी पात्र मिलने पर आवास का स्वीकृति तो मिल गई, मगर 2017 में आवेदन करने वाले लाभार्थियों को चार साल बीतने के बाद भी 30 लाभार्थी ऐसे है जिनको दूसरी किस्त नहीं मिली और 1754 को तीसरी किस्त मिलने की आस है। 2018 में 580 लाभार्भी दूसरी और 5229 तीसरी किस्त से वंचित है। वहीं 2019 में 1122 लाभार्थियों को दूसरी और 5348 को तीसरी किस्त का इंतजार है। किश्त कब मिलेगी इसका किसी को पता नहीं है। इससे उनके आवास आज भी अधूरे पड़े हुए है।
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किश्त जारी होने के बाद जिम्मेदार भी नहीं लेते सुध
आवास की स्वीकृति के बाद पहली किस्त जारी होते ही डूडा की ओर से निगरानी शुरू कर दी जाती है। इसके बाद पहली किस्त का काम पूरा होने के बाद दूसरी किस्त जारी की जाती है। बाद में आवास की मरम्मत के लिए तीसरी किस्त जारी होती है। मगर जनपद में इन जिम्मेदारों को ही नहीं पता है। कि किस लाभार्थी के आवास का कितना काम शेष बचा है। जबकि बिचौलिया हावी होकर लाभार्थी से पैसे ऐंठ लेते है और उसका आवास अधूरा रह जाता है। आवास अधूरा होने के भय से वह संबंधी अधिकारी के यहां जाने से भी कतरे लगाता है।
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लाभार्थियों को लगातार किस्त जारी कराई जा रही है। पहले किस्त का काम पूरा होने के बाद दूसरी और तीसरी किस्त जारी करा दी जा रही है। अगर किसी लाभार्थी ने अपना आवास अभी तक पूरा नहीं कराया है, तो उसको दिखवाया जाएगा। आवासों की स्थित से शासन को भी अवगत करा दिया जाता है। - अनामिका सक्सेना, पीओ डूडा