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वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को होगी कार्यशाला
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पीलीभीत। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व के साथ ही डब्ल्यूटीआई विभाग भी संजीदा हो रहा है। आबादी क्षेत्र में बढ़ती हलचल को देखते हुए वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की ओर से 22 सितंबर से विशाल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें जंगल सीमा से सटे 72 संवेदनशील गांवों से दो-दो को शामिल किया जा रहा है। इनमें प्रधान और बीडीसी सदस्य को प्रमुखता दी जा रही है। विभाग की ओर से इनसे संपर्क भी शुरू कर दिया गया है।
टाइगर रिजर्व से दूर आबादी क्षेत्र के निकट वैसे तो पूर्व से ही बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की चहलकदमी होती रहती है, लेकिन पिछले कुछ माह से चहलकदमी में काफी इजाफा देखा जा रहा है। जिससे ग्रामीणों को परेशान है ही साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार भी चिंतित हैं। पूर्व में मानव वन्यजीव संघर्ष में बाघिन की हुई मौत के बाद विभाग व उससे जुड़ी संस्थाएं सक्रिय हुई है। कार्यशाला का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए ग्रामीणों के साथ तालमेल बढ़ाना है। इसके लिए ग्रामीणों को वन्यजीव संबंधित जानकारी दी जाएगी। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने के प्रयास जारी है। इसके लिए डब्ल्यूटीआई की ओर से एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
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टाइगर रिजर्व से दूर आबादी क्षेत्र के निकट वैसे तो पूर्व से ही बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की चहलकदमी होती रहती है, लेकिन पिछले कुछ माह से चहलकदमी में काफी इजाफा देखा जा रहा है। जिससे ग्रामीणों को परेशान है ही साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार भी चिंतित हैं। पूर्व में मानव वन्यजीव संघर्ष में बाघिन की हुई मौत के बाद विभाग व उससे जुड़ी संस्थाएं सक्रिय हुई है। कार्यशाला का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए ग्रामीणों के साथ तालमेल बढ़ाना है। इसके लिए ग्रामीणों को वन्यजीव संबंधित जानकारी दी जाएगी। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने के प्रयास जारी है। इसके लिए डब्ल्यूटीआई की ओर से एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
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