{"_id":"5d7e7c358ebc3e015c0ca7d5","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly376234973","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अब तक नहीं मिला जिले को टाइगर सफारी का तोहफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अब तक नहीं मिला जिले को टाइगर सफारी का तोहफा
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पीलीभीत। जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद टाइगर सफारी का तोहफा देने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा पर लंबा अर्सा बीतने के बाद भी कोई काम नहीं हो सका है। ऐसा तब है जब शासन ने टाइगर सफारी के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर पांच सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया था। इसके लिए 13 अक्तूबर, 2017 को लखनऊ में बैठक भी हुई थी। ऐसे में जनपद के जंगल में टाइगर सफारी बन गई होती तो पर्यटन के रूप में पीलीभीत का नाम देश और दुनिया के नक्शे पर दर्ज हो गया होता, साथ ही बाघों की सुरक्षा भी बेहतर हो जाती।
जिले का जंगल 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। पांच साल पूर्व जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से ही बाघ, तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इधर, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में पिकनिक स्पॉट चूका बीच स्थापित किया गया, लेकिन टाइगर रिजर्व में बाघों की बेहतर मौजूदगी के बाद भी पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटकों को बाघ के दीदार मुश्किल से होते हैं। पर्यटक मायूस होकर लौट जाते हैं।
मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ा तो टाइगर सफारी की जरूरत हुई महसूस
वन्यजीवों की सुरक्षा और संवर्द्धन के मामले में आगे रहने वाले वन संरक्षक वीके सिंह ने जब बरेली का चार्ज लिया तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर हमलावर हो रहे बाघों को खुले क्षेत्र में सुरक्षित रखने के लिए टाइगर सफारी की मांग शासन स्तर तक पहुंचाई। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था।
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निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर के नेतृत्व में बनी थी टीम
शासन ने आदेश मिलने के बाद टाइगर सफारी की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए उस दौरान निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर अजय द्विवेदी के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई थी। जिसमें बरेली के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक अरविंद गुप्ता, वन संरक्षक वीके सिंह सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आर एस भदौरिया एवं दुधवा नेशनल पार्क से अनिल कुमार पटेल को इसमें शामिल किया गया था। यह जानकारी उस दौरान स्वयं तत्कालीन वन संरक्षक वीके सिंह ने दी थी।
बराही रेंज के बरुआ कुठारा में चिह्नित की गई थी भूमि
टाइगर सफारी के लिए टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के बरुआ कुठारा क्षेत्र में करीब 110 हेक्टेयर का रकबा जो अवैध अतिक्रमण की चपेट में था। उसको चिह्नित किया गया था। अफसरों ने खुद मौके की हकीकत को भी परखा था। जिसके चलते ऐसा माना जा रहा था कि जल्द ही पीलीभीत को टाइगर सफारी के रूप में नया तोहफा मिल जाएगा।
सीएम के दौरे के बाद जागी थी आस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12 नवंबर 2017 को जनपद दौरे पर आए थे। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अफसरों ने चूका बीच का भ्रमण भी कराया था। जहां जंगल की हरियाली और चूका बीच की खूबसूरती देख कर सीएम काफी खुश हुए थे। उन्होंने खासी दिलचस्पी दिखाते हुए पीलीभीत में टाइगर सफारी और रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव बनाकर भेजने के अफसरों को निर्देश दिए थे। ऐसे माना जा रहा था कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन सब ठंडे बस्ते में है।
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में प्रस्ताव बनाकर उच्च स्तर पर भेज दिया गया है। टाइगर सफारी के मामले में अभी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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जिले का जंगल 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। पांच साल पूर्व जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से ही बाघ, तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इधर, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में पिकनिक स्पॉट चूका बीच स्थापित किया गया, लेकिन टाइगर रिजर्व में बाघों की बेहतर मौजूदगी के बाद भी पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटकों को बाघ के दीदार मुश्किल से होते हैं। पर्यटक मायूस होकर लौट जाते हैं।
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मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ा तो टाइगर सफारी की जरूरत हुई महसूस
वन्यजीवों की सुरक्षा और संवर्द्धन के मामले में आगे रहने वाले वन संरक्षक वीके सिंह ने जब बरेली का चार्ज लिया तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर हमलावर हो रहे बाघों को खुले क्षेत्र में सुरक्षित रखने के लिए टाइगर सफारी की मांग शासन स्तर तक पहुंचाई। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था।
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निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर के नेतृत्व में बनी थी टीम
शासन ने आदेश मिलने के बाद टाइगर सफारी की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए उस दौरान निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर अजय द्विवेदी के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई थी। जिसमें बरेली के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक अरविंद गुप्ता, वन संरक्षक वीके सिंह सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आर एस भदौरिया एवं दुधवा नेशनल पार्क से अनिल कुमार पटेल को इसमें शामिल किया गया था। यह जानकारी उस दौरान स्वयं तत्कालीन वन संरक्षक वीके सिंह ने दी थी।
बराही रेंज के बरुआ कुठारा में चिह्नित की गई थी भूमि
टाइगर सफारी के लिए टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के बरुआ कुठारा क्षेत्र में करीब 110 हेक्टेयर का रकबा जो अवैध अतिक्रमण की चपेट में था। उसको चिह्नित किया गया था। अफसरों ने खुद मौके की हकीकत को भी परखा था। जिसके चलते ऐसा माना जा रहा था कि जल्द ही पीलीभीत को टाइगर सफारी के रूप में नया तोहफा मिल जाएगा।
सीएम के दौरे के बाद जागी थी आस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12 नवंबर 2017 को जनपद दौरे पर आए थे। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अफसरों ने चूका बीच का भ्रमण भी कराया था। जहां जंगल की हरियाली और चूका बीच की खूबसूरती देख कर सीएम काफी खुश हुए थे। उन्होंने खासी दिलचस्पी दिखाते हुए पीलीभीत में टाइगर सफारी और रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव बनाकर भेजने के अफसरों को निर्देश दिए थे। ऐसे माना जा रहा था कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन सब ठंडे बस्ते में है।
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में प्रस्ताव बनाकर उच्च स्तर पर भेज दिया गया है। टाइगर सफारी के मामले में अभी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व