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भाकपा माले ने निकाला जुलूस, कई मुद्दे उठाए
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पूरनपुर। भाकपा (माले) ने जुलूस निकालकर एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल और डीएम को संबोधित अलग-अलग दो ज्ञापन तहसीलदार को सौंपे।
सोमवार को नगर के रामलीला मेला मैदान से निकाला गया जुलूस नगर के शेरपुर रोड, स्टेशन रोड होते हुए एसडीएम कार्यालय के बाहर पहुंचकर धरना में बदल गया। धरना स्थल पर हुई सभा में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी की सदस्य कृष्णा अधिकारी ने कहा कि शारदा नदी के तेज कटान से चंदिया हजारा और राहुलनगर का अस्तित्व खतरे में है। सैकड़ों एकड़ फसलें नदी में समा चुकी है। बचाव कार्य ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। जब तक नदी किनारे स्थायी काम नहीं होते। तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पीलीभीत का जंगल टाइगर रिजर्व बनाने के अनुकूल न होने के बाद भी ग्रामीणों और प्रधानों को धोखा देकर उनके हस्ताक्षर करवाए गए। सभा में बीसलपुर में आंदोलन कर रहे भीमसेन को जेल भेजने की निंदा कर उनको तत्काल रिहा कराने की मांग की गई। सभा के बाद राज्यपाल और डीएम को संबोधित अलग-अलग दो ज्ञापन तहसीलदार आशुतोष कुमार को सौंपे गए। ज्ञापन में बाढ़ से इलाके को बचाने को स्थायी ठोकर का निर्माण कराने, कटान पीड़ितों को भूमि के बदले भूमि देने, राहुलनगर, चंदिया हजारा के गन्ना किसानों को सप्लाई सट्टा जारी कराने, टाईगर रिजर्व प्रोजेक्ट को तत्काल रद्द कराने, मटेहना कॉलोनी के निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमा को वापस कराने, मटेहना प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और गिरफ्तारी पर रोक लगवाने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में देवाशीष राय, देवीदयाल, नगीना, प्रहलाद, छुन्नू खं आदि थे।
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सोमवार को नगर के रामलीला मेला मैदान से निकाला गया जुलूस नगर के शेरपुर रोड, स्टेशन रोड होते हुए एसडीएम कार्यालय के बाहर पहुंचकर धरना में बदल गया। धरना स्थल पर हुई सभा में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी की सदस्य कृष्णा अधिकारी ने कहा कि शारदा नदी के तेज कटान से चंदिया हजारा और राहुलनगर का अस्तित्व खतरे में है। सैकड़ों एकड़ फसलें नदी में समा चुकी है। बचाव कार्य ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। जब तक नदी किनारे स्थायी काम नहीं होते। तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पीलीभीत का जंगल टाइगर रिजर्व बनाने के अनुकूल न होने के बाद भी ग्रामीणों और प्रधानों को धोखा देकर उनके हस्ताक्षर करवाए गए। सभा में बीसलपुर में आंदोलन कर रहे भीमसेन को जेल भेजने की निंदा कर उनको तत्काल रिहा कराने की मांग की गई। सभा के बाद राज्यपाल और डीएम को संबोधित अलग-अलग दो ज्ञापन तहसीलदार आशुतोष कुमार को सौंपे गए। ज्ञापन में बाढ़ से इलाके को बचाने को स्थायी ठोकर का निर्माण कराने, कटान पीड़ितों को भूमि के बदले भूमि देने, राहुलनगर, चंदिया हजारा के गन्ना किसानों को सप्लाई सट्टा जारी कराने, टाईगर रिजर्व प्रोजेक्ट को तत्काल रद्द कराने, मटेहना कॉलोनी के निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमा को वापस कराने, मटेहना प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और गिरफ्तारी पर रोक लगवाने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में देवाशीष राय, देवीदयाल, नगीना, प्रहलाद, छुन्नू खं आदि थे।
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