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जुर्माना चाहे जितना भी बढ़ जाए, ये सुधरने वाले नहीं
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पीलीभीत। एक तरफ केंद्र सरकार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती कर रही है। जुर्माना पहले से अधिक कर दिया गया है। हालांकि अभी इसको जिले में लागू नहीं किया जा सका है, लेकिन सड़कों पर वाहन चालक अब भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। मानों नियमों का उल्लंघन करना उनकी आदत में शुमार हो।
बीते कुछ सालों में सड़क हादसों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिले की बात करें तो हर साल गंतव्य तक पहुंचने की जल्दबाजी में सैकड़ों लोग जान गंवा रहे हैं। शासन-प्रशासन संजीदा हुआ, लेकिन रोकथाम को लेकर किए गए प्रयास नाकाफी साबित होते आए हैं। न तो सड़कों पर यातायात नियमों को लेकर तस्वीर बदली जा सकी, न ही हादसों की संख्या को कम किया जा सका है। जिले में बीते पांच साल में 1855 हादसे हुए। इनमें 744 लोगों की जान गई जबकि 1341 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
बढ़ते हादसों के पीछे तेज रफ्तार तो वजह है ही, लेकिन वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी इसको बढ़ावा दे रही है। सुरक्षित सफर की बात तो हर वाहन चालक करता है, लेकिन खुद इसको लेकर गंभीर नहीं दिखता। बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग करना बाइकर्स का शौक बन गया है। वाहनों की रफ्तार भी बेकाबू सी नजर आती है। बीते दिनों हेलमेट को लेकर जागरूकता लाने के लिए प्रशासन ने मुहिम भी चलाई। बिना हेलमेट पेट्रोल न देने का एलान किया गया, लेकिन न तो प्रशासन इसका सख्ती से पालन करा सका, न ही वाहन चालक जागरूक हुए। इसके अलावा बिना संकेत अचानक वाहन मोड़ देना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, स्पीड नियंत्रित न होना भी आम बात है। इसी वजह से अचानक सामने दूसरा वाहन आते ही हादसे हो रहे हैं।
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पांच साल में हुए हादसों के आंकड़े
वर्ष - हादसे - घायल - मृतक
2014 - 370 - 249 - 136
2015 - 345 - 256 - 126
2016 - 376 - 287 - 155
2017 - 409 - 314 - 166
2018 - 355 - 235 - 161
ये हैं जिले के चिह्नित ब्लैक स्पॉट
नकटादाना चौराहा, यशवंतरी चौराहा, नेहरू पार्क से जिला अस्पताल, असम चौराहा से जिला अस्पताल, जंगरौली पुल, पौटा खमरिया, जंगरौली गांव, असम हाईवे का बरहा मोड़, पौटा खमरिया, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल, कस्बा बरखेड़ा, पतरासा मोड़, जोगीठेर, परसिया, भड़रिया मोड़, टनकपुर हाईवे पर कस्बा न्यूरिया, बरेली हाईवे पर ललौरीखेड़ा, शाही, खमरिया पुल, कैंच, बिठौरा, मुड़ैलाकलां, मथना, पूरनपुर बाईपास कस्बा।
बढ़ते हादसों को देखते हुए गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं। वाहन चालकों को नियम पालन के प्रति जागरूक करने के साथ ही कार्रवाई भी की जा रही है। प्रशासन के साथ मिलकर पब्लिक भी जिम्मेदारी समझे, तो तस्वीर बदली जा सकेगी।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ ट्रैफिक
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बीते कुछ सालों में सड़क हादसों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिले की बात करें तो हर साल गंतव्य तक पहुंचने की जल्दबाजी में सैकड़ों लोग जान गंवा रहे हैं। शासन-प्रशासन संजीदा हुआ, लेकिन रोकथाम को लेकर किए गए प्रयास नाकाफी साबित होते आए हैं। न तो सड़कों पर यातायात नियमों को लेकर तस्वीर बदली जा सकी, न ही हादसों की संख्या को कम किया जा सका है। जिले में बीते पांच साल में 1855 हादसे हुए। इनमें 744 लोगों की जान गई जबकि 1341 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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बढ़ते हादसों के पीछे तेज रफ्तार तो वजह है ही, लेकिन वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी इसको बढ़ावा दे रही है। सुरक्षित सफर की बात तो हर वाहन चालक करता है, लेकिन खुद इसको लेकर गंभीर नहीं दिखता। बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग करना बाइकर्स का शौक बन गया है। वाहनों की रफ्तार भी बेकाबू सी नजर आती है। बीते दिनों हेलमेट को लेकर जागरूकता लाने के लिए प्रशासन ने मुहिम भी चलाई। बिना हेलमेट पेट्रोल न देने का एलान किया गया, लेकिन न तो प्रशासन इसका सख्ती से पालन करा सका, न ही वाहन चालक जागरूक हुए। इसके अलावा बिना संकेत अचानक वाहन मोड़ देना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, स्पीड नियंत्रित न होना भी आम बात है। इसी वजह से अचानक सामने दूसरा वाहन आते ही हादसे हो रहे हैं।
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पांच साल में हुए हादसों के आंकड़े
वर्ष - हादसे - घायल - मृतक
2014 - 370 - 249 - 136
2015 - 345 - 256 - 126
2016 - 376 - 287 - 155
2017 - 409 - 314 - 166
2018 - 355 - 235 - 161
ये हैं जिले के चिह्नित ब्लैक स्पॉट
नकटादाना चौराहा, यशवंतरी चौराहा, नेहरू पार्क से जिला अस्पताल, असम चौराहा से जिला अस्पताल, जंगरौली पुल, पौटा खमरिया, जंगरौली गांव, असम हाईवे का बरहा मोड़, पौटा खमरिया, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल, कस्बा बरखेड़ा, पतरासा मोड़, जोगीठेर, परसिया, भड़रिया मोड़, टनकपुर हाईवे पर कस्बा न्यूरिया, बरेली हाईवे पर ललौरीखेड़ा, शाही, खमरिया पुल, कैंच, बिठौरा, मुड़ैलाकलां, मथना, पूरनपुर बाईपास कस्बा।
बढ़ते हादसों को देखते हुए गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं। वाहन चालकों को नियम पालन के प्रति जागरूक करने के साथ ही कार्रवाई भी की जा रही है। प्रशासन के साथ मिलकर पब्लिक भी जिम्मेदारी समझे, तो तस्वीर बदली जा सकेगी।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ ट्रैफिक