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प्रशासन के इंतजाम और लोगों की सूझबूझ ने कायम रखा सौहार्द्र
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पीलीभीत। तराई का जिला पीलीभीत कौमी एकता की मिसाल है। यहां के लोग सभी धर्मों का आदर करते हैं। सोमवार को श्रावण मास के अंतिम सोमवार और ईद उल अजहा के चलते प्रशासन ने तमाम तैयारियां कीं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके। ऐसे में प्रशासन के इंतजामों और आपसी समझ और सूझबूझ, सद्भाव और सौहार्द्र कायम रखने में कामयाब हुई।
बिन पुलिस चलता दिखा बूथ
जिला प्रशासन की ओर से ईद उल अजहा के चलते ईदगाह रोड पर सुबह सात से 11 बजे तक कांवड़ियों का रूट डायवर्ट करते हुए उनके आवागमन पर रोक लगा दी थी। इसके लेकर पीलीभीत-बरेली मार्ग पर पुलिस बूथ बनाया गया, लेकिन यह बूथ चालू होने के कुछ देर बाद ही पुलिस विहीन हो गया, लेकिन फिर भी सब कुछ व्यवस्थित रहा।
नंगे पांव कंकड़-पत्थर से होकर गुजरे कांवड़िये
पीडब्ल्यूडी और पालिका प्रशासन द्वारा कांवड़ियों के आने जाने वाले मार्गों को हर साल गड्ढामुक्त किया जाता है। इस बार भी किया गया, लेकिन महज खानापूर्ति ही की गई। कांवड़ियों को कंकड पत्थर के बीच से ही नंगे पांव गुजरना पड़ा। भोले के भक्त रवि कुमार से इस बाबत पूछा तो बोले- बिना कष्ट पाए तो भगवान की कृपा नहीं मिलती।
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यहां तो सुरक्षा जरूरी थी
ईदगाह गेट के सामने भी पुलिस की कोई सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। हालांकि यहां सुबह भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था, लेकिन नमाज खत्म होते ही यहां सब कुछ ऊपर वाले के सहारे छोड़ दिया गया। गनीमत यह रही कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। कांवड़िये शांति से इधर से गुजरते रहे।
बाइक और टोपी करती दिखी सुरक्षा
शहर के अंदर भी कमोवेश यही हाल दिखा। शहर के ड्रमंडगंज चौराहे पर पुलिस वाले की टोपी बाइक पर रखी दिखी, लेकिन पुलिसकर्मियों का कोई अता पता नहीं था। यहां भी लोग अपनी सूझबूझ से आते जाते दिखे, जबकि यातायात के लिहाज से यह चौराहा बेहद संवेदनशील माना जाता है।
खाली कुर्सियों ने किया कांवड़ियों का स्वागत
प्रशासन ने कांवड़ियों के लिए सूक्ष्म जलपान और पुष्प वर्षा के आदेश दिए थे। आयुर्वेदिक कॉलेज गेट पर बकायदा कैंप लगाया गया। यहां कुछ देर तक तो अफसर दिखे, लेकिन समय बीतते-बीतते यह कैंप खाली हो गया। यहां महज खाली कुर्सियां ही दिखीं।
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बिन पुलिस चलता दिखा बूथ
जिला प्रशासन की ओर से ईद उल अजहा के चलते ईदगाह रोड पर सुबह सात से 11 बजे तक कांवड़ियों का रूट डायवर्ट करते हुए उनके आवागमन पर रोक लगा दी थी। इसके लेकर पीलीभीत-बरेली मार्ग पर पुलिस बूथ बनाया गया, लेकिन यह बूथ चालू होने के कुछ देर बाद ही पुलिस विहीन हो गया, लेकिन फिर भी सब कुछ व्यवस्थित रहा।
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नंगे पांव कंकड़-पत्थर से होकर गुजरे कांवड़िये
पीडब्ल्यूडी और पालिका प्रशासन द्वारा कांवड़ियों के आने जाने वाले मार्गों को हर साल गड्ढामुक्त किया जाता है। इस बार भी किया गया, लेकिन महज खानापूर्ति ही की गई। कांवड़ियों को कंकड पत्थर के बीच से ही नंगे पांव गुजरना पड़ा। भोले के भक्त रवि कुमार से इस बाबत पूछा तो बोले- बिना कष्ट पाए तो भगवान की कृपा नहीं मिलती।
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यहां तो सुरक्षा जरूरी थी
ईदगाह गेट के सामने भी पुलिस की कोई सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। हालांकि यहां सुबह भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था, लेकिन नमाज खत्म होते ही यहां सब कुछ ऊपर वाले के सहारे छोड़ दिया गया। गनीमत यह रही कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। कांवड़िये शांति से इधर से गुजरते रहे।
बाइक और टोपी करती दिखी सुरक्षा
शहर के अंदर भी कमोवेश यही हाल दिखा। शहर के ड्रमंडगंज चौराहे पर पुलिस वाले की टोपी बाइक पर रखी दिखी, लेकिन पुलिसकर्मियों का कोई अता पता नहीं था। यहां भी लोग अपनी सूझबूझ से आते जाते दिखे, जबकि यातायात के लिहाज से यह चौराहा बेहद संवेदनशील माना जाता है।
खाली कुर्सियों ने किया कांवड़ियों का स्वागत
प्रशासन ने कांवड़ियों के लिए सूक्ष्म जलपान और पुष्प वर्षा के आदेश दिए थे। आयुर्वेदिक कॉलेज गेट पर बकायदा कैंप लगाया गया। यहां कुछ देर तक तो अफसर दिखे, लेकिन समय बीतते-बीतते यह कैंप खाली हो गया। यहां महज खाली कुर्सियां ही दिखीं।