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जिला पंचायत में गठबंधन से रूक गए सारे काम

Thu, 30 Jan 2020 10:07 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2020 10:07 PM IST
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All work stopped due to coalition in district panchayat
पीलीभीत। राज्य में भले ही भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है, लेकिन जिला पंचायत में भाजपा और सपा मिलकर सरकार चला रहे हैं। अध्यक्ष सपा की आरती महेंद्र हैं, मगर प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण दूसरे राजनीतिक दबाव के कारण जिला पंचायत में ‘गठबंधन’ हावी हो गया है। बैठकें न होने पर भी भाजपा के सदस्यों को आपत्ति नहीं है। मगर बैठकें न होने से तमाम काम रुके पड़े हैं।
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पूर्व विधायक पीतमराम की पुत्रवधु आरती महेंद्र ने 13 जनवरी 2016 को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभाली थी। उस समय 34 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए। इनमें सपा समर्थित सदस्यों की संख्या महज छह है। भाजपा समर्थित सदस्यों की संख्या 20 से अधिक हैं। फिर भी बड़े नेताओं में गुटबाजी की वजह से जिला पंचायत में सपा की सत्ता बरकरार है। राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद तमाम जनपदों में जिला पंचायत अध्यक्ष बदल गए। पीलीभीत में भी जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन भाजपा नेताओं के अंदरूनी समर्थन से उनकी कुर्सी ऐन वक्त पर बच गई। भाजपा सदस्यों का अंदरखाने समर्थन मिलते देख जिला पंचायत में मनमानी का दौर शुरू हो गया।
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जिला पंचायत में बोर्ड गठन के चार साल पूरे होने के बाद भी विकास कार्य न के बराबर कराए गए। सिर्फ एक खास तहसील पूरनपुर में ही ज्यादातर काम कराए गए। इसे लेकर कुछ राजनीतिक उद्देश्यों की बातें चर्चा में रही हैं। कुछ सदस्यों का कहना है कि इसी के चलते जिला पंचायत को जिले के बाकी हिस्सों से कोई मतलब नहीं है। बैठक न बुलाने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष मौन ही है।
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साल में छह की जगह केवल दो बैठकें
शासनादेश के मुताबिक जिला पंचायत में हर साल में छह बैठकें होना अनिवार्य हैं, लेकिन स्थानीय जिला पंचायत में चार साल में नौ बैठकें ही हुईं। एक बैठक कोरम के अभाव में स्थगित कर दी गई थी। सूत्रों के अनुसार स्थगित बैठक को भी सदस्यों के घर जाकर रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराकर उसे बैठक का रूप दे दिया गया। पिछले साल (2019) में केवल एक बैठक छह जुलाई को हुई। उसके बाद अब तक कोई बैठक नहीं हुई।
इसलिए नहीं होता है विरोध
जिला पंचायत बोर्ड में सपा के अलावा भाजपा, कांग्रेस से जुड़े सदस्य भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक इसमें सबसे ज्यादा विरोध करने वाले सदस्यों को ठेकेदारी देने का लालच देकर उनके मुंह बंद कर दिए। विरोध करने वाले कुछ सदस्यों को काम का ठेका मिल गया तो सदस्यों को बैठक हो या न हो, इससे मतलब नहीं रह गया।
बैठक न होने ये काम हो रहे प्रभावित
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रस्तावित सड़कों का नहीं हो सका अनुमोदन
- जिला योजना द्वारा आवंटित बजट से मनरेगा के कार्यों की नहीं बनी योजना
- जिला पंचायत की जमीनों के निर्धारण का कार्य भी पड़ा ठप
- टैक्स बढ़ोत्तरी पर नहीं लिया जा सका निर्णय, कर वसूली कार्य हो रहा प्रभावित
शासनादेश के मुताबिक हर दो माह में बैठक होनी चाहिए, लेकिन शासनादेश को ताख पर रखकर जिला पंचायत में काम हो रहे हैं। ईमानदार सदस्यों को दिक्कतें हो रही हैं। सभी सदस्य मिलकर जल्द ही अगला कदम उठाएंगे। -मंजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य, पूरनपुर
बैठक न करने के पीछे की वजह तो अध्यक्ष को ही मालूम होगी। बैठक होने से विकास कार्यों की स्पष्ट नीति बनती है। पिछली बैठक में हंगामा होने से आगे के काम तय नहीं हो सके। -शोभना कुमारी, जिला पंचायत सदस्य, बीसलपुर
बैठक जानबूझ कर नहीं की जा रही है। सर्वाधिक काम एक तहसील में करवाए गए। इससे अन्य क्षेत्रों में विकास की गति काफी कम हो गई है। -रीना गंगवार, जिला पंचायत, बीसलपुर
पत्रावली भेजी थी, लेकिन वापस नहीं लौटी
जिला पंचायत की सभी बैठकें अध्यक्ष के निर्देश पर होती हैं। पूर्व वर्षों में किन्हीं कारणों से बैठकें नहीं हुई। गत वर्ष जुलाई में बैठक होने के दो माह बाद मैंने पत्रावली अध्यक्ष के पास भिजवा दी, तबसे पत्रावली वापस नहीं आई। -जागन लाल, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत

कार्ययोजना समय से न बनने नहीं हुई बैठक
विकास कार्यों को लेकर कार्ययोजनाएं बनवाई जाती हैं। उन्हें बैठक में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इस बार कार्ययोजना समय से न बन पाने से समय से बैठकें नहीं हो सकीं। जल्द ही बैठक करवाई जाएगी। -आरती महेंद्र, अध्यक्ष, जिला पंचायत
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