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शर्मनाक: दहेज से लेकर दरिंदगी तक दंश झेल रही आधी आबादी
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पीलीभीत। सात साल पहले दिल्ली के निर्भया कांड की गूंज पूरे देश में उठी थी। अब वही हालात हैदराबाद की डॉक्टर बिटिया की हैवानियत के साथ हुई हत्या के बाद उपजे हैं। इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों को फांसी की सजा और महिला सुरक्षा की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। कानून में बदलाव का मुद्दा भी उठा है। गम और गुस्से के शोर के बीच अभी भी एक सवाल बरकरार है कि आधी आबादी पर ये अत्याचार आखिकार कब तक होते रहेंगे। आधी आबादी अब भी कन्या भ्रूण हत्या से लेकर पढ़ाई-लिखाई में भेदभाव, छेड़छाड़, दहेज की मांग पूरी न होने पर प्रताड़ना, दरिंदगी का दंश झेल रही है। अब भी महिला उत्पीड़न की घटनाएं रोज हो रही हैं। जब तक सभ्य समाज महिला सुरक्षा के मुद्दे पर स्वयं जागरूक नहीं होगा, शायद तब तक ये सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।
यूपी-उत्तराखंड के बीच में स्थित तराई बेल्ट के महत्वपूर्ण जनपद पीलीभीत की पांच तहसीलों, 14 थानों और 20 लाख की आबादी में भी महिलाएं सड़क पर शोहदों की छेड़छाड़, शादी के बाद दहेज उत्पीड़न, हत्या और दरिंदगी का दंश सहने को मजबूर हैं। पुलिस रिकार्ड में दर्ज घटनाओं का जिक्र करें तो महिलाओं पर अत्याचार की लंबी फेहरिस्त है। वर्ष 2019 के 11 माह में छेड़छाड़ के 152 मामले पंजीकृत हैं। 51 युवतियां और महिलाएं दरिंदगी का शिकार हुईं। यह आंकड़ा तब है, जब बदनामी या अन्य पारिवारिक कारणों से तमाम मामले पुलिस तक पहुंचते ही नहीं। बहुत से मामले पुलिस ही दर्ज नहीं करती। वैवाहिक जीवन में भी महिलाएं प्रताड़ना बर्दाश्त करने को मजबूर हैं। इस साल नवंबर तक 34 मामले दहेज हत्या के दर्ज किए जा चुके हैं। सख्त कानून के बाद भी दहेज हत्या का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। साल 2018 में दहेज हत्या के 39 मामले थे, जबकि 2017 में ये संख्या 23 थी। दहेज उत्पीड़न कर बेघर करने में 236 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। दर्जनों मामले परिवार परामर्श केंद्र में चल रहे हैं। साल 2018 में उत्पीड़न के 933 मामले सामने आए थे। इसमें काउंसलरों की मदद से 767 मामलों में सुलह कराई गई।
शोहदों पर शिकंजा कसने के लिए योगी सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वाड की शुरुआत की थी। शुरुआत में तो इसमें शोहदों पर सख्ती बरती गई, लेकिन समय के साथ यह बेदम होता चला गया। पिछले दिनों एंटी स्क्वाड में दोबारा दम डालने के प्रयास हुए। थाना स्तर पर एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया गया, लेकिन धरातल पर प्रभावी कार्रवाई कराने में अफसर सफल नहीं हो सके। कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता होने से शोहदों पर शिकंजा नहीं कस पाया।
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शहर में सात साल पहले हैदराबाद की तरह ही पीलीभीत में 14 वर्षीय किशोरी की जघन्य हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया था। कोतवाली क्षेत्र की एक 14 वर्षीय किशोरी को रिश्तेदार के घर से वापस आते वक्त तीन शोहदों ने रोक सरेशाम छेड़छाड़ की। विरोध करने पर मिट्टी का तेल छिड़ककर उसे जिंदा जला दिया। किशोरी की मौत के बाद हंगामे और प्रदर्शन हुए। जघन्य हत्याकांड के तीन आरोपी जेल भेजे गए। इनमें एक नाबालिग निकला। दरिंदगी के बाद बच्चियों की हत्या की कई घटनाएं बीते सालों में हो चुकी हैं।
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यूपी-उत्तराखंड के बीच में स्थित तराई बेल्ट के महत्वपूर्ण जनपद पीलीभीत की पांच तहसीलों, 14 थानों और 20 लाख की आबादी में भी महिलाएं सड़क पर शोहदों की छेड़छाड़, शादी के बाद दहेज उत्पीड़न, हत्या और दरिंदगी का दंश सहने को मजबूर हैं। पुलिस रिकार्ड में दर्ज घटनाओं का जिक्र करें तो महिलाओं पर अत्याचार की लंबी फेहरिस्त है। वर्ष 2019 के 11 माह में छेड़छाड़ के 152 मामले पंजीकृत हैं। 51 युवतियां और महिलाएं दरिंदगी का शिकार हुईं। यह आंकड़ा तब है, जब बदनामी या अन्य पारिवारिक कारणों से तमाम मामले पुलिस तक पहुंचते ही नहीं। बहुत से मामले पुलिस ही दर्ज नहीं करती। वैवाहिक जीवन में भी महिलाएं प्रताड़ना बर्दाश्त करने को मजबूर हैं। इस साल नवंबर तक 34 मामले दहेज हत्या के दर्ज किए जा चुके हैं। सख्त कानून के बाद भी दहेज हत्या का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। साल 2018 में दहेज हत्या के 39 मामले थे, जबकि 2017 में ये संख्या 23 थी। दहेज उत्पीड़न कर बेघर करने में 236 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। दर्जनों मामले परिवार परामर्श केंद्र में चल रहे हैं। साल 2018 में उत्पीड़न के 933 मामले सामने आए थे। इसमें काउंसलरों की मदद से 767 मामलों में सुलह कराई गई।
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शोहदों पर शिकंजा कसने के लिए योगी सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वाड की शुरुआत की थी। शुरुआत में तो इसमें शोहदों पर सख्ती बरती गई, लेकिन समय के साथ यह बेदम होता चला गया। पिछले दिनों एंटी स्क्वाड में दोबारा दम डालने के प्रयास हुए। थाना स्तर पर एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया गया, लेकिन धरातल पर प्रभावी कार्रवाई कराने में अफसर सफल नहीं हो सके। कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता होने से शोहदों पर शिकंजा नहीं कस पाया।
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शहर में सात साल पहले हैदराबाद की तरह ही पीलीभीत में 14 वर्षीय किशोरी की जघन्य हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया था। कोतवाली क्षेत्र की एक 14 वर्षीय किशोरी को रिश्तेदार के घर से वापस आते वक्त तीन शोहदों ने रोक सरेशाम छेड़छाड़ की। विरोध करने पर मिट्टी का तेल छिड़ककर उसे जिंदा जला दिया। किशोरी की मौत के बाद हंगामे और प्रदर्शन हुए। जघन्य हत्याकांड के तीन आरोपी जेल भेजे गए। इनमें एक नाबालिग निकला। दरिंदगी के बाद बच्चियों की हत्या की कई घटनाएं बीते सालों में हो चुकी हैं।