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छुट्टा गोवंश : दावे हवाई, सच जमीन पर

Wed, 05 Apr 2023 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2023 12:17 AM IST
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Chutna Govansh: Claims in air, truth on the ground
- छुट्टा पशुओं की गिनती में भी झोल, 2019 में हुई गणना, तब छुट्टा पशु कितने पता नहीं
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- सरकार का दबाव बना तो गोशालाओं में क्षमता से अधिक ठूंस दिए पशु
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। मुख्यमंत्री ने 31 मार्च तक छुट्टा पशुओं को हर हाल में गोशालाओं में संरक्षित करने के आदेश दिए थे, इस आदेश पर जिले में कागजों में ही पशुओं को गोशाला भेज दिया गया। फिलहाल सरकारी आंकड़ों में 250 छुट्टा पशु ही सड़कों पर हैं, जबकि हकीकत में दोगुने से ज्यादा छुट्टा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। सोमवार को न्यूरिया में एक सांड़ ने हमला कर किसान को मार डाला था। तमाम जगहों पर यह छुट्टा पशु फसलों को भी बर्बाद कर रहे हैं।
दो माह पहले तक अफसरों का दावा था कि जिले में 1700 और 49 गोशालाओं में 3459 छुट्टा पशु संरक्षित हैं। 31 मार्च तक इन छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में भेजा जाना था। जिले की सभी 49 गोशालाओं में क्षमता से ज्यादा पशु थे, बावजूद इसके और भर दिए गए। आंकड़ों को देखें तो अब महज 250 छुट्टा पशु ही सड़कों पर हैं। जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है।
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छुट्टा पशुओं की गिनती में ही झोल है। 2019 में पशुओं की गणना हुई थी। तब 1.60 लाख गोवंश की गिनती हुई थी। इसमें छुट्टा पशु व पालतू दोनों ही शामिल होने का दावा किया जा रहा है। इनमें छुट्टा पशु कितने थे इसका कोई आंकड़ा अधिकारियों के पास नहीं है। सीवीओ का कहना है कि दो माह पहले ग्राम पंचायत स्तर पर छुट्टा पशुओं की गिनती कराई गई थी। इसमें करीब 1700 छुट्टा पशु सड़कों पर होना पाया गया था।
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कागजों में ही चला छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान
अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए कहा गया था। सीवीओ के यहां पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है। जिले में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी 39 होना चाहिए जबकि 17 हैं। इनसे जैसे-तैसे काम लिया जा रहा है। ब्लॉकों व नगर पालिका परिषद स्तर से भी छुट्टा पशुओं को पकड़ा जाना था। कैटल कैचर वाहन भी दिए गए थे। इसके बाद भी लापरवाही के चलते छुट्टा पशुओं को नहीं पकड़वाया गया। अभियान महज कागजों में चलकर रह गया। ऐसे में मंडी समिति, रेलवे स्टेशन के बाहर, रोडवेज स्टैंड सहित अन्य स्थानों पर छुट्टा पशु देखे जा सकते हैं।
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हद है, 350 क्षमता वाली गोशाला में एक हजार पशु
छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए जिले में 49 गोशालाएं संचालित हो रहीं हैं। इन सभी में क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। सबसे बुरा हाल देवीपुर गोशाला का है। इस गोशाला की क्षमता 350 पशुओं की है, जबकि यहां एक हजार छुट्टा पशुओं को रखा गया है। ऐसे में खुद ही समझा जा सकता है कि पशुओं की क्या हालत होगी। इसके अलावा गांव नरपुर में स्थित गोशाला की क्षमता 200 की है और यहां पर भी 232 पशु हैं। गांव करेली में 200 के स्थान पर 205 पशुओं को रखा गया है। इसके अलावा अन्य गोशालाओं में भी क्षमता से अधिक पशुओं को रखा गया है।
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छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर गोशालाओं में भेजा जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
- डाॅ. अरविंद गर्ग, सीवीओ ।
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नाराज आढ़तियों ने प्रदर्शन कर जताया आक्रोश
पीलीभीत। विभागीय आंकड़ों की सच्चाई की पोल मंडी समिति में घूम रहे छुट्टा पशु खोल रहे हैं। यहां सौ से अधिक पशु परिसर में विचरण करते देखे जा सकते हैं। यह पशु आढ़तियों के व्यापार को चौपट कर रहे हैं। कई बार शिकायत के बाद भी ध्यान न देने पर मंगलवार को दुकानदारों ने प्रशासन के खिलाफ मंडी में प्रदर्शन कर रोष जताया।
शहर से लेकर गांव तक खुले में घूम रहे छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने का जिले में दावा हवाहवाई साबित हो रहा है। पशुओं की संख्या को देखकर ऐसा लग रहा है कि प्रशासन ने मंडी समिति में ही छुट्टा पशुओं की अस्थायी गोशाला बना दी है। इधर, मंडी समिति में घूमने वाले छुट्टा पशु आढ़तियों का धंधा चौपट करने पर तुले हुए हैं।
मंडी में आने वाले लोगों पर यह छुट्टा पशु कब हमला कर दें कुछ नहीं पता। आपस में ही पशुओं के भिड़ने से कई बार व्यापारियों के चोट लग चुकी है। सांड़ों के लड़ने से कई बार भगदड़ मच चुकी है। आढ़तियों के फल व सब्जी नष्ट हो चुकी है। समस्याओं को लेकर कई बार पशु पकड़ने की मांग की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।

मंगलवार को आढ़तियों ने एकत्र होकर नारेबाजी करते हुए मंडी के अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। आढ़तियों का कहना है कि उनकी समस्या को लेकर कोई ध्यान दे रहा है। इस दौरान पंचमदास, कल्लू मियां, आजम, मोहम्मद परवेज, तहसीम, सब्लू, धनराज गौतम आदि मौजूद थे।
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