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Pilibhit News: सीएए लागू होने पर बंगाली समाज में जश्न

Wed, 13 Mar 2024 12:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2024 12:20 AM IST
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Celebration in Bengali society on implementation of CAA
पूरनपुर। शारदा डैम की तलहटी में बसे बांग्लादेश के विस्थापित परिवारों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने से जश्न का माहौल है। अब तक बंगाली समाज के काफी संख्या में लोग दो पीढि़यों से नागरिकता पाने के लिए भटक रहे थे। नागरिकता न मिलने से उनको किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में उन्होंने नागरिकता पाने के लिए कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन भी किए।
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बांग्लादेश के कई लोगों को पुनर्वास योजना के तहत सन 1965 से 1971 के बीच क्षेत्र में बसाया गया। करीब 1200 परिवार तहसील क्षेत्र के गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर, कॉलोनी नंबर छह, ढक्काचांट, फूल चंदुईया, कलीनगर तहसील के गांव गभिया सहराई, रामनगर, महाराजपुर, सेल्हा, मटैय्या लालपुर, नगरिया खुर्द कलां, बूंदीभूड़, नौजलिया नकटाह आदि गांव में बसाए गए।
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इसके बाद भी यहां बंगाली समाज के लोगों के आने का क्रम जारी रहा। वे अपने रिश्तेदारों और करीबियों के पास आकर रहने लगे। इनमें से अधिकतर के पास नागरिकता नहीं थी। अब नागरिकता संशोधन अधिनियम जारी होने से उनमें हर्ष है।
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नागरिकता न मिलने से काफी दिक्कत आ रही थी। किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। सीएए लागू होने से जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हुआ है।
- विजयराम
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करीब तीन दशक पहले क्षेत्र में आकर बसे थे। नागरिकता न होने से कोई भी लाभ न मिलने के कारण जीविकोपार्जन का सहारा मात्र मजदूरी था। अब कानून लागू होने से जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी मिली है।
- जीवन सरकार
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नागरिकता को लेकर सालों से परेशान था। बच्चों की शिक्षा के लिए भी नागरिकता प्रमाण पत्र की मांग की जाती थी। यहीं जन्मे, यही पले और बढ़े बच्चों को किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। अब काफी खुश हैं।
- किशोर टिकेदार
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नागरिकता न मिलने पर भूमिहीन होने के बाद भी पट्टा नहीं मिल रहा था। स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी न होने से बच्चों को नौकरी और अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं थी। बस मजदूरी ही सहारा था।

- अनुकूल
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जहां मिली जमीन वहीं बस गए
कलीनगर। तहसील क्षेत्र में तराई की तलहटी में नेपाल सीमा तक हजारों बंगाली परिवार बसे हैं। यह लोग जंगल के साथ सिंचाई विभाग की जमीन पर काबिज हैं। सिंचाई विभाग के वर्जित क्षेत्र में रह रहे हैं। मतदाता सूची में वर्षों पूर्व जो नाम दर्ज थे, वर्ष 1984 में उनमें एक साथ हजारों नाम काट दिए गए, लेकिन बाद में जनपद की सांसद रहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका संजय गांधी ने तत्कालीन गृहमंत्री मोहम्मद सईद से मिलकर काफी हद तक समस्या हल करवाई। कई लोगों को नागरिकता भी दिलवाई गई, लेकिन उसके बाद भी यहां हजारों परिवार आते चले गए और समस्या नासूर बनती चली गई। अब नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि काफी हद तक समस्या का निस्तारण हो जाएगा। संवाद
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