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भारत सिंह को 24 घंटे नहीं लगते थे बाघ खोजने, मारने में
इस्लामुद्दीन खां माधोटांडा।
Updated Tue, 19 Sep 2017 11:21 PM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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अगले माह से कटने लगेगी गन्ना और धान की फसल, किसानों में दहशत
कई किसानों, मजदूरों को निवाला बनाने वाले नरभक्षी घोषित किए गए बाघ को मारने या पकड़ने को कई विशेषज्ञ लगाए गए। तलाशी के लिए हाथियों की मदद भी ली जा रही है। मचान भी बना कर अमरिया क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने खूनी बाघ को खोजने की कवायद में महकमे के लोग कई पड्डों का शिकार भी करा चुके हैं। इसके बावजूद एक माह बाद भी वन महकमा इंसानों के लिए खतरा बन चुके खूनी बाघ को पकड़ने में कामयाब नहीं हो सका है। बाघ के आतंक से भयभीत किसानों को इस दौर में जनपद के मशहूर शिकारी स्व. भारत सिंह की याद आ रही है। कभी दौर था जब नरभक्षी बाघ को मारने के लिए उन्हें पूरे देश में बुलाया जाता था। वह नरभक्षी घोषित हुए ऐसे प्रत्येक बाघ को वह 24 घंटे के भीतर मार गिराते थे।
बाघ जंगल से बाहर निकल कर किसानों-मजदूरों को अपना निवाला बना रहे हैं। एक ऐसे बाघ को नरभक्षी भी घोषित किया गया है। जिसको मारने अथवा बेहोश कर पकड़ने के लिए लखनऊ, दिल्ली के मशहूर विशेषज्ञ जिले में एक माह से अधिक समय से डेरा जमाए हुए हैं। खूनी बाघ को खोजने के लिए ड्रोन कैमरा, हाथी, मचान आदि का भी सहारा लिया जा रहा है। लाखों रुपये अब तक इस कार्य पर खर्च हो चुके हैं। बाघ को लालच देने के लिए बांधे गए कई पड्डे भी बाघ खा चुका है, इसके बाद भी वन महकमे की टीम खूनी बाघ को अब तक पकड़ने में सफल नहीं हो सकी। टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी लोगों को इसका जवाब देने से कतराने लगे हैं। ग्रामीण यह भी करने लगे हैं कि वन महकमा खुद खूनी बाघ को पकड़ना नहीं चाहता। अब तक जो प्रयास किए गए वह मजह दिखावे के थे जिससे आक्रोशित लोगों को शांत किया जा सके।
गन्ने की फसल तैयार हो चुकी है। अगले माह के अंत तक चीनी मिलें चलने लगेंगी। धान की फसल भी कटने को तैयार है। ऐसे में किसान बाघ के आतंक के बीच अपनी तैयार फसल काटने कैसे खेतों में जाएंगे, यह चिंता उन्हें सताने लगी है। ऐसे हालात में लोगों को अब बरबस ही जनपद के मशहूर शिकारी स्व. कुंवर भारत सिंह याद आ रहे हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि देश में अगर कहीं भी बाघ खूनी
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हो जाता था तो उसे मारने के लिए भारत सिंह को बुलाया जाता था। ऐसे खूनी बाघ को वह 24 घंटे के भीतर खोजकर मार देते थे। अपने जीवन में उन्होंने करीब 50 बाघ देश के विभिन्न स्थानों पर मारे। सरकार उन्हें इसके लिए बुलाती थी। अंग्रेजों के सरकार में भी उनके अचूक निशाने की अंग्रेज प्रशंसा कर उपहार देते थे। उनकी टीम में छोटे भाई त्रिभुवन सिंह भी रहते थे। उनका भी निशाना अचूक था। खूनी बाघ को झांसा देने के बुलाने के लिए पड्डा बांधने का काम उनके मशहूर साथी शेरपुर के मिडयी खां करते थे। बताते हैं कि बाघ की लोकेशन भारत सिंह अपने तजुर्बे से ही पता कर लेते थे। दिलेर इतने कि मचान पर अकेले बैठ कर अथवा ट्रैक्टर पर बैठ कर खूनी बाघ का शिकार करते थे। कभी-कभी तो बाघ दिखने पर वह अपनी जान की परवाह किए बगैर मचान से नीचे भी उतर कर बाघ को मार देते थे। हालांकि भारत सिंह, उनके भाई और उनके साथी इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मौजूदा हालात में लोगों को उनकी याद सता रही है।
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कई किसानों, मजदूरों को निवाला बनाने वाले नरभक्षी घोषित किए गए बाघ को मारने या पकड़ने को कई विशेषज्ञ लगाए गए। तलाशी के लिए हाथियों की मदद भी ली जा रही है। मचान भी बना कर अमरिया क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने खूनी बाघ को खोजने की कवायद में महकमे के लोग कई पड्डों का शिकार भी करा चुके हैं। इसके बावजूद एक माह बाद भी वन महकमा इंसानों के लिए खतरा बन चुके खूनी बाघ को पकड़ने में कामयाब नहीं हो सका है। बाघ के आतंक से भयभीत किसानों को इस दौर में जनपद के मशहूर शिकारी स्व. भारत सिंह की याद आ रही है। कभी दौर था जब नरभक्षी बाघ को मारने के लिए उन्हें पूरे देश में बुलाया जाता था। वह नरभक्षी घोषित हुए ऐसे प्रत्येक बाघ को वह 24 घंटे के भीतर मार गिराते थे।
बाघ जंगल से बाहर निकल कर किसानों-मजदूरों को अपना निवाला बना रहे हैं। एक ऐसे बाघ को नरभक्षी भी घोषित किया गया है। जिसको मारने अथवा बेहोश कर पकड़ने के लिए लखनऊ, दिल्ली के मशहूर विशेषज्ञ जिले में एक माह से अधिक समय से डेरा जमाए हुए हैं। खूनी बाघ को खोजने के लिए ड्रोन कैमरा, हाथी, मचान आदि का भी सहारा लिया जा रहा है। लाखों रुपये अब तक इस कार्य पर खर्च हो चुके हैं। बाघ को लालच देने के लिए बांधे गए कई पड्डे भी बाघ खा चुका है, इसके बाद भी वन महकमे की टीम खूनी बाघ को अब तक पकड़ने में सफल नहीं हो सकी। टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी लोगों को इसका जवाब देने से कतराने लगे हैं। ग्रामीण यह भी करने लगे हैं कि वन महकमा खुद खूनी बाघ को पकड़ना नहीं चाहता। अब तक जो प्रयास किए गए वह मजह दिखावे के थे जिससे आक्रोशित लोगों को शांत किया जा सके।
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गन्ने की फसल तैयार हो चुकी है। अगले माह के अंत तक चीनी मिलें चलने लगेंगी। धान की फसल भी कटने को तैयार है। ऐसे में किसान बाघ के आतंक के बीच अपनी तैयार फसल काटने कैसे खेतों में जाएंगे, यह चिंता उन्हें सताने लगी है। ऐसे हालात में लोगों को अब बरबस ही जनपद के मशहूर शिकारी स्व. कुंवर भारत सिंह याद आ रहे हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि देश में अगर कहीं भी बाघ खूनी
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हो जाता था तो उसे मारने के लिए भारत सिंह को बुलाया जाता था। ऐसे खूनी बाघ को वह 24 घंटे के भीतर खोजकर मार देते थे। अपने जीवन में उन्होंने करीब 50 बाघ देश के विभिन्न स्थानों पर मारे। सरकार उन्हें इसके लिए बुलाती थी। अंग्रेजों के सरकार में भी उनके अचूक निशाने की अंग्रेज प्रशंसा कर उपहार देते थे। उनकी टीम में छोटे भाई त्रिभुवन सिंह भी रहते थे। उनका भी निशाना अचूक था। खूनी बाघ को झांसा देने के बुलाने के लिए पड्डा बांधने का काम उनके मशहूर साथी शेरपुर के मिडयी खां करते थे। बताते हैं कि बाघ की लोकेशन भारत सिंह अपने तजुर्बे से ही पता कर लेते थे। दिलेर इतने कि मचान पर अकेले बैठ कर अथवा ट्रैक्टर पर बैठ कर खूनी बाघ का शिकार करते थे। कभी-कभी तो बाघ दिखने पर वह अपनी जान की परवाह किए बगैर मचान से नीचे भी उतर कर बाघ को मार देते थे। हालांकि भारत सिंह, उनके भाई और उनके साथी इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मौजूदा हालात में लोगों को उनकी याद सता रही है।
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