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बाघ की बढ़ रही सक्रियता से रहें सतर्क, विभाग अभी सिर्फ निगरानी करेगा
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अमरिया क्षेत्र में बाघ के पगचिह्न ट्रेस करते टाइगर ट्रकर चेतन कुमार।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। अमरिया और मझोला क्षेत्र में कई दिनों से बाघ की मौजूदगी देखी जा रही है। खेतों के अलावा मार्गों पर भी बाघ को घूमता देखा जा रहा है। इससे ग्रामीण चिंतित है। वहीं, विभाग ठोस निर्णय पर अमल के बजाय ग्रामीणों को सर्तक कर निगरानी कार्य तक सीमित है। नतीजतन रविवार को खेत में घास काटते समय जोशी कॉलोनी निवासी मजूदर गोपाल मंडल को बाघ ने हमलाकर घायल कर दिया था।
जंगल से बाहर बाघों की मौजूदगी को लेकर अमरिया क्षेत्र पिछले कई सालों से सुर्खियों में है। चार साल पूर्व जंगल से निकले तीन बाघ क्षेत्र में पहुंच गए थे। कई सालों तक डेरा जमाए रहे थे। इससे कुनबे में इजाफा होकर बाघों की संख्या आठ पहुंच गई थी। लगातार खेतों की ओर चहलकदमी करने से किसान मुसीबत में पड़ गए थे। विभाग भी गंभीर हुआ था, बाघों को शिफ्ट करने की योजना बनाकर बाहर की टीम को स्थालीय भ्रमण भी कराया गया, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा था।
हालांकि पिछले कुछ समय से बाघों की मौजूदगी कम हो गई थी, लेकिन 28 जुलाई को तहसील क्षेत्र के मझोला इलाके में स्थित भगतनिया फार्म के निकट एक बाघ की मौजूदगी ने फिर परेशानी शुरू कर दी। इसके बाद से लगातार बाघ खेतों की ओर चहलकदमी करते देखा जाने लगा। किसान खेतों की ओर से जाने से कतराने लगे। जंगल से बाहर बाघ की लगातार मौजूदगी के बाद भी अफसर गंभीर नहीं हो सके। वनकर्मियों को क्षेत्रीय लोगों को सतर्क कर बाघ की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इधर रविवार को मजूदर पर हमले की घटना के बाद से चुनौती और बढ़ गई है।
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दो प्रदेशों के दस गांव की सीमा में घूम रहा बाघ
अमरिया तहसील क्षेत्र में 28 जुलाई से देखा जा रहा बाघ जनपद और उत्तराखंड की सीमा में लगातार चहलकदमी कर रहा है। उत्तराखंड के अलावा जनपद के भरा पचपेड़ा, दाह फार्म, रानी कॉलोनी, जोशी कॉलोनी, गिंधौर क्षेत्र में करीब 15 किमी दायरे में बाघ की चहलकदमी जारी है। परवीन नदी का क्षेत्र में खड़ी झाड़ियां और आवारा पशुओं की मौजूदगी बाघ के डेरा जमाने की वजह मानी जा रही है।
टाइगर ट्रकर के कार्य की सराहना
अमरिया क्षेत्र में तैनात बाघ की मौजूदगी से जहां लोग परेशान हैं। वहीं, टाइगर ट्रकर चेतन कुमार के कार्यों की क्षेत्रीय लोग सराहना करते दिखे। लोगों का कहना है कि चार साल पूर्व से बाघों का इस इलाके में डेरा रहा। स्थिति को सामान्य रखने के लिए ग्रामीणों को समझाने और निगरानी के मामले में टाइगर ट्रकर लगातार आगे दिखे।
बाघ की कई दिनों से मौजूदगी बनी हुई है। इससे पहले स्थिति बिगड़े अफसरों को कोई ठोस निर्णय लेना चाहिए। - हरदीप सिंह, खिरका फार्म
बाघ खेेतों में घूम रहा है। लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। निगरानी के बजाय खदेड़ने के प्रयास होने चाहिए। खतरा बढ़ रहा है। - गुरप्रीत सिंह, कटैया पंढरी
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जंगल से बाहर बाघों की मौजूदगी को लेकर अमरिया क्षेत्र पिछले कई सालों से सुर्खियों में है। चार साल पूर्व जंगल से निकले तीन बाघ क्षेत्र में पहुंच गए थे। कई सालों तक डेरा जमाए रहे थे। इससे कुनबे में इजाफा होकर बाघों की संख्या आठ पहुंच गई थी। लगातार खेतों की ओर चहलकदमी करने से किसान मुसीबत में पड़ गए थे। विभाग भी गंभीर हुआ था, बाघों को शिफ्ट करने की योजना बनाकर बाहर की टीम को स्थालीय भ्रमण भी कराया गया, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा था।
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हालांकि पिछले कुछ समय से बाघों की मौजूदगी कम हो गई थी, लेकिन 28 जुलाई को तहसील क्षेत्र के मझोला इलाके में स्थित भगतनिया फार्म के निकट एक बाघ की मौजूदगी ने फिर परेशानी शुरू कर दी। इसके बाद से लगातार बाघ खेतों की ओर चहलकदमी करते देखा जाने लगा। किसान खेतों की ओर से जाने से कतराने लगे। जंगल से बाहर बाघ की लगातार मौजूदगी के बाद भी अफसर गंभीर नहीं हो सके। वनकर्मियों को क्षेत्रीय लोगों को सतर्क कर बाघ की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इधर रविवार को मजूदर पर हमले की घटना के बाद से चुनौती और बढ़ गई है।
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दो प्रदेशों के दस गांव की सीमा में घूम रहा बाघ
अमरिया तहसील क्षेत्र में 28 जुलाई से देखा जा रहा बाघ जनपद और उत्तराखंड की सीमा में लगातार चहलकदमी कर रहा है। उत्तराखंड के अलावा जनपद के भरा पचपेड़ा, दाह फार्म, रानी कॉलोनी, जोशी कॉलोनी, गिंधौर क्षेत्र में करीब 15 किमी दायरे में बाघ की चहलकदमी जारी है। परवीन नदी का क्षेत्र में खड़ी झाड़ियां और आवारा पशुओं की मौजूदगी बाघ के डेरा जमाने की वजह मानी जा रही है।
टाइगर ट्रकर के कार्य की सराहना
अमरिया क्षेत्र में तैनात बाघ की मौजूदगी से जहां लोग परेशान हैं। वहीं, टाइगर ट्रकर चेतन कुमार के कार्यों की क्षेत्रीय लोग सराहना करते दिखे। लोगों का कहना है कि चार साल पूर्व से बाघों का इस इलाके में डेरा रहा। स्थिति को सामान्य रखने के लिए ग्रामीणों को समझाने और निगरानी के मामले में टाइगर ट्रकर लगातार आगे दिखे।
बाघ की कई दिनों से मौजूदगी बनी हुई है। इससे पहले स्थिति बिगड़े अफसरों को कोई ठोस निर्णय लेना चाहिए। - हरदीप सिंह, खिरका फार्म
बाघ खेेतों में घूम रहा है। लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। निगरानी के बजाय खदेड़ने के प्रयास होने चाहिए। खतरा बढ़ रहा है। - गुरप्रीत सिंह, कटैया पंढरी