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Pilibhit News: वोकल फॉर लोकल पर बैंकों का ग्रहण, 20.55 % लक्ष्य ही हुआ पूरा
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पीलीभीत। उत्पादन और आपूर्ति के लिए लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिले में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की हालत खराब है। यह योजना अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। वोकल फॉर लोकल के अंतर्गत लोगों को उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए 905 लोगों ने बैंकों से लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंकों ने कई कारण बताते हुए 147 आवेदन निरस्त कर दिए। वर्ष 2025-26 के लिए सिर्फ 20़. 55 प्रतिशत ही लक्ष्य पूरा हो सका। यानी की 186 लोगों को ही लोन मिल सका।
हाल ही में 11 मई को शासन स्तर से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को लेकर सभी जिलों की स्थिति की रिपोर्ट जारी की गई। इसमें पीलीभीत जिला भी शामिल था। जारी रिपोर्ट में जिले की स्थिति 47 नंबर पर है। इस रिपोर्ट में यह बताया गया कि जिले को 2025-26 में 905 लोगों को लाभ देने का लक्ष्य मिला। योजना का लाभ लेने के लिए जिलेभर से 597 लोगों ने पंजीकरण किया। जांच के बाद 396 आवेदन सही पाए गए, लेकिन अभी तक 186 लोन ही स्वीकृत हुए हैंं। वहीं, उद्यान विभाग पीलीभीत के उद्यान निरीक्षक फूल कुमार का कहना है कि योजना में व्यवसाय करने के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 40 लाख तक का लोन दिया जाता है। उसी पर 35 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। अनुदान मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य पर दी जाती है। जिले में बड़ी संख्या में लोगों ने आटा चक्की व्यवसाय कराने के लिए लोन लिया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से 65 व्यवसाय जुड़े हैं। इसमें आचार, ब्रेड, चिप्स आदि शामिल हैं।
203 लोगों ने कराई पंजीकरण, उदासीनता जारी
इस योजना का लाभ लेने के लिए 203 लोगों ने योजना की वेबसाइट पर पंजीकरण करा लिया, लेकिन उसके बाद आगे की कोई प्रक्रिया नहीं की। इस वजह से इन आवेदनों को ड्राफ्ट में दिया गया। आवेदकों ने पंजीकरण के दौरान अधूरे कागजात लगाए थे। संवाद
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कई आवेदन इन कारणों से हुए निरस्त
उद्यान विभाग के अधिकारी और ड्रिस्टिक्ट रिसोर्स पर्सन का कहना है कि बैंक लोन देने से पहले आवेदक की सिविल चेक करती है। कहां व्यवसाय लगाना है। वहां भूमि अपनी या नहीं। उसके बाद लोन प्रकिया शुरू करती है। निरस्त हुए आवेदनों में ज्यादातर में यही कारण सामने आया है। आवेदकों की सिविल खराब बताई गई। कई अन्य कारण भी निरस्त के पीछे आए हैं। काफी समय पहले एचडीएफसी ने इस योजना में खूब लोन दिए, लेकिन लोन जमा न होने पर एनपीआर बढ़ गया तो एचडीएफसी ने हाथ पीछे खींच लिए। इस वजह से अन्य बैंकें भी जांच-पड़ताल के बाद ही लोन पास कर रही हैं।
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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में लक्ष्य के सापेक्ष प्रोग्रेस न होने और आवेदनों के निरस्त होने पर ऑनलाइन मीटिंग कर संबंधित विभाग के अधिकारियों को तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। योजना अच्छी है, ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ दिलाने के प्रयास होंगे। जिन बैंकों ने आवेदन निरस्त किए हैं, उन बैंकों के प्रबंधकों और योजना से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी।
- ज्ञानेंद्र सिंह, जिलाधिकारी पीलीभीत
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हाल ही में 11 मई को शासन स्तर से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को लेकर सभी जिलों की स्थिति की रिपोर्ट जारी की गई। इसमें पीलीभीत जिला भी शामिल था। जारी रिपोर्ट में जिले की स्थिति 47 नंबर पर है। इस रिपोर्ट में यह बताया गया कि जिले को 2025-26 में 905 लोगों को लाभ देने का लक्ष्य मिला। योजना का लाभ लेने के लिए जिलेभर से 597 लोगों ने पंजीकरण किया। जांच के बाद 396 आवेदन सही पाए गए, लेकिन अभी तक 186 लोन ही स्वीकृत हुए हैंं। वहीं, उद्यान विभाग पीलीभीत के उद्यान निरीक्षक फूल कुमार का कहना है कि योजना में व्यवसाय करने के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 40 लाख तक का लोन दिया जाता है। उसी पर 35 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। अनुदान मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य पर दी जाती है। जिले में बड़ी संख्या में लोगों ने आटा चक्की व्यवसाय कराने के लिए लोन लिया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से 65 व्यवसाय जुड़े हैं। इसमें आचार, ब्रेड, चिप्स आदि शामिल हैं।
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203 लोगों ने कराई पंजीकरण, उदासीनता जारी
इस योजना का लाभ लेने के लिए 203 लोगों ने योजना की वेबसाइट पर पंजीकरण करा लिया, लेकिन उसके बाद आगे की कोई प्रक्रिया नहीं की। इस वजह से इन आवेदनों को ड्राफ्ट में दिया गया। आवेदकों ने पंजीकरण के दौरान अधूरे कागजात लगाए थे। संवाद
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कई आवेदन इन कारणों से हुए निरस्त
उद्यान विभाग के अधिकारी और ड्रिस्टिक्ट रिसोर्स पर्सन का कहना है कि बैंक लोन देने से पहले आवेदक की सिविल चेक करती है। कहां व्यवसाय लगाना है। वहां भूमि अपनी या नहीं। उसके बाद लोन प्रकिया शुरू करती है। निरस्त हुए आवेदनों में ज्यादातर में यही कारण सामने आया है। आवेदकों की सिविल खराब बताई गई। कई अन्य कारण भी निरस्त के पीछे आए हैं। काफी समय पहले एचडीएफसी ने इस योजना में खूब लोन दिए, लेकिन लोन जमा न होने पर एनपीआर बढ़ गया तो एचडीएफसी ने हाथ पीछे खींच लिए। इस वजह से अन्य बैंकें भी जांच-पड़ताल के बाद ही लोन पास कर रही हैं।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में लक्ष्य के सापेक्ष प्रोग्रेस न होने और आवेदनों के निरस्त होने पर ऑनलाइन मीटिंग कर संबंधित विभाग के अधिकारियों को तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। योजना अच्छी है, ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ दिलाने के प्रयास होंगे। जिन बैंकों ने आवेदन निरस्त किए हैं, उन बैंकों के प्रबंधकों और योजना से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी।
- ज्ञानेंद्र सिंह, जिलाधिकारी पीलीभीत