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बैंकों के असहयोग से डेयरी योजना हुई फेल
पीलीभीत
Updated Sat, 13 Feb 2016 10:49 PM IST
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बैंक अधिकारियों के कथित असहयोग के चलते इस ब्लाक क्षेत्र में पशुपालन विभाग की मिनी डेयरी योजना दम तोड़ रही है।
पशुपालन विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में मिनी डेयरी योजना के तहत इस ब्लाक क्षेत्र के सात लाभार्थियों का चयन किया था। इनमें से दो लाभार्थियों मोहल्ला रामनगर निवासी मनोरमा वर्मा और गांव अहिरपुरा नगला निवासी दीनदयाल गंगवार की डेयरियां तो स्थापित हो गई हैं, लेकिन पांच लाभार्थियों को अभी तक बैंक शाखाओं से ऋण ही नहीं मिल पाया है, जिससे उनकी डेयरियां स्थापित नहीं हो पाई हैं। ऐसे लाभार्थियों में गांव चौसरा निवासी लोकेश कुमार, गांव बिहारीपुर कुमरिखा निवासी मैकूलाल, मीरपुरवाहनपुर निवासी इरशाद खां, राजूपुर निवासी चैतन्य देव, खरगपुर निवासी कुलवंत सिंह और अहिरपुरा निवासी दिवाकर नाथ शामिल हैं। डिप्टी सीवीओ डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि इन सभी लाभार्थियों की पत्रावलियां बैंक ऑफ बड़ौदा में लंबित पड़ी हैं।
डिप्टी सीवीओ का आरोप है कि लाभार्थियों की सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद बैंक वाले जान बूझकर ऋण आवंटित नहीं कर रहे हैं, जिससे योजना दम तोड़ रही है। यह हाल तब है जब डिप्टी सीवीओ इस मामले की लिखित सूचना विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दे चुके हैं। संबंधित लाभार्थी ऋण प्राप्त करने के लिए बैंक शाखा के रोजाना चक्कर लगा रहे हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक डीके रावत ने बताया कि वह शेष पत्रावलियों का परीक्षण करा रहे हैं, इसके बाद ही उन्हें ऋण देने पर विचार किया जा सकेगा।
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पशुपालन विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में मिनी डेयरी योजना के तहत इस ब्लाक क्षेत्र के सात लाभार्थियों का चयन किया था। इनमें से दो लाभार्थियों मोहल्ला रामनगर निवासी मनोरमा वर्मा और गांव अहिरपुरा नगला निवासी दीनदयाल गंगवार की डेयरियां तो स्थापित हो गई हैं, लेकिन पांच लाभार्थियों को अभी तक बैंक शाखाओं से ऋण ही नहीं मिल पाया है, जिससे उनकी डेयरियां स्थापित नहीं हो पाई हैं। ऐसे लाभार्थियों में गांव चौसरा निवासी लोकेश कुमार, गांव बिहारीपुर कुमरिखा निवासी मैकूलाल, मीरपुरवाहनपुर निवासी इरशाद खां, राजूपुर निवासी चैतन्य देव, खरगपुर निवासी कुलवंत सिंह और अहिरपुरा निवासी दिवाकर नाथ शामिल हैं। डिप्टी सीवीओ डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि इन सभी लाभार्थियों की पत्रावलियां बैंक ऑफ बड़ौदा में लंबित पड़ी हैं।
डिप्टी सीवीओ का आरोप है कि लाभार्थियों की सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद बैंक वाले जान बूझकर ऋण आवंटित नहीं कर रहे हैं, जिससे योजना दम तोड़ रही है। यह हाल तब है जब डिप्टी सीवीओ इस मामले की लिखित सूचना विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दे चुके हैं। संबंधित लाभार्थी ऋण प्राप्त करने के लिए बैंक शाखा के रोजाना चक्कर लगा रहे हैं।
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बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक डीके रावत ने बताया कि वह शेष पत्रावलियों का परीक्षण करा रहे हैं, इसके बाद ही उन्हें ऋण देने पर विचार किया जा सकेगा।