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कुर्बानी के जज्बे के साथ आज मनेगी बकरीद
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Sep 2016 11:36 PM IST
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ईद उल अजहा (बकरीद) ऐसा त्योहार है, जो हजरत इब्राहीम और उनके बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी की याद ताजा करता है। इस दिन कुर्बानी देने के लिए लोगों ने बकरों की खरीदारी की।
ईल उल अजहा पर कुर्बानी देने का चलन है। ऐसे में बकरों की कीमतें आसमान छूती नजर आईं। पीडब्ल्यूडी गेस्टहाउस के सामने लगने वाले बाजार में खरीदारों की हुजूम उमड़ा। बाहर से खरीदारों के न आने से पिछले सालों के मुकाबले बकरों के दाम कम रहे। बाजार में अलग-अलग नस्लों के बकरे मौजूद रहे। जानकारों के मुताबिक इस बार सबसे महंगा बकरा 1.20 लाख रुपये में बिका। यह बकरा सितारगंज के यासीन का था। नखासा ठेकेदार असलम रजा ने बताया कि रविवार को लगी बाजार में करीब 200 बकरे बिके। बाजार में अधिकतर बकरे पांच से 20 हजार रुपये में बिके।
मुसलमानों को अल्लाह के करीब लाती है कुर्बानी
12 पीबीटीपी 15
मुस्लिम समुदाय में साल में दो ही त्योहार मजहबी तौर पर मनाए जाते हैं। एक ईद उल फित्र और दूसरा ईद उल अजहा। कुर्बानी का लफ्ज कुर्ब से बना है। इसका मतलब होता है करीब। ईदुल अजहा पर अपने जानवर को कुर्बान करने का मकसद अल्लाह का कुर्ब हासिल करना होता है यानी अल्लाह तआला से अपनी नजदीकियां बढ़ाना होता है। कम कीमत के बकरे खरीदकर भी कुर्बानी दी जा सकती है। पांच लाख के बकरे खरीदने की जगह गरीब और फकीरों की मदद की जाए। इस्लाम कुर्बानी के साथ गरीबों, जरूरतमंदों और फकीरों की मदद करने का भी हुुकुम देता है।
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- मुफ्ती साजिद हसनी, इस्लामिक रिसर्च स्कॉलर
वक्त-ए-नमाज
मस्जिद गौसिया लोहामंडी 06:30 बजे
मस्जिद पुरानागंज 6.45 बजे
हिदायत रसूल 07:00 बजे
मस्जिद शामीर खां 07:00 बजे
औलिया बुजकसाबान 07:15 बजे
मस्जिद कुरैशियान 07:30 बजे
मस्जिद मनिहारान 07:30 बजे
मस्जिद सराय 07.30 बजे
मस्जिद सलमानियान 07.30 बजे
मस्जिद फीलखाना 07.30 बजेे
मस्जिद कल्लन खां 07.30 बजे
मस्जिद मौलाबख्श खुदागंज 07.30 बजे
मस्जिद सरफराज खां 07.30 बजे
ऊंची मस्जिद बरेली गेट 07.45 बजे
मस्जिद हुसैनी लाल रोड 07.45 बजे
दरबार अल्लाहू मियां 08.00 बजे
हैदरी मस्जिद 08.00 बजे
मस्जिद छीपियान 08.00 बजे
मस्जिद शरीफ खां 08.00 बजे
मस्जिद नंबरदार 08.00 बजे
मस्जिद मोटा पाकर 08.00 बजे
नूरी मस्जिद पंजाबियान 08.00 बजे
मस्जिद पुलिया वाली 08.30 बजे
मस्जिद मदीनाशाह 08.30 बजे
सुनहरी मस्जिद 08.30 बजे
शाहजी मो0 शेर मियां 09:00 बजे
मस्जिद मलाहद खां 09:30 बजे
मस्जिद मीरासियान 09.30 बजे
ईदगाह 09:30 बजे
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ईल उल अजहा पर कुर्बानी देने का चलन है। ऐसे में बकरों की कीमतें आसमान छूती नजर आईं। पीडब्ल्यूडी गेस्टहाउस के सामने लगने वाले बाजार में खरीदारों की हुजूम उमड़ा। बाहर से खरीदारों के न आने से पिछले सालों के मुकाबले बकरों के दाम कम रहे। बाजार में अलग-अलग नस्लों के बकरे मौजूद रहे। जानकारों के मुताबिक इस बार सबसे महंगा बकरा 1.20 लाख रुपये में बिका। यह बकरा सितारगंज के यासीन का था। नखासा ठेकेदार असलम रजा ने बताया कि रविवार को लगी बाजार में करीब 200 बकरे बिके। बाजार में अधिकतर बकरे पांच से 20 हजार रुपये में बिके।
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मुसलमानों को अल्लाह के करीब लाती है कुर्बानी
12 पीबीटीपी 15
मुस्लिम समुदाय में साल में दो ही त्योहार मजहबी तौर पर मनाए जाते हैं। एक ईद उल फित्र और दूसरा ईद उल अजहा। कुर्बानी का लफ्ज कुर्ब से बना है। इसका मतलब होता है करीब। ईदुल अजहा पर अपने जानवर को कुर्बान करने का मकसद अल्लाह का कुर्ब हासिल करना होता है यानी अल्लाह तआला से अपनी नजदीकियां बढ़ाना होता है। कम कीमत के बकरे खरीदकर भी कुर्बानी दी जा सकती है। पांच लाख के बकरे खरीदने की जगह गरीब और फकीरों की मदद की जाए। इस्लाम कुर्बानी के साथ गरीबों, जरूरतमंदों और फकीरों की मदद करने का भी हुुकुम देता है।
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मस्जिद गौसिया लोहामंडी 06:30 बजे
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