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Pilibhit News: बाज सिंह ने एक हेक्टेयर में पैदा किया 771 क्विंटल गन्ना
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फसल के साथ खड़े बाज सिह । स्रोत - स्वयं
पीलीभीत। गन्ना सहित अन्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसान दूर-दूर से बीज लाते हैं। इसके बाद भी उत्पादन अच्छा नहीं हो पाता। वहीं किसान बाज सिंह ने खुद गन्ने का बीज तैयार किया। टैंच विधि से बोवाई के बाद एक हेक्टेयर में 771 क्विंटल गन्ने की पैदावार कर दिखाई। इस उपलब्धि पर प्रदेश सरकार ने उनको इसी वर्ष सम्मानित भी किया था। बाज सिंह अब दूसरे किसानों को टैंच विधि से बोवाई करना सिखा रहे हैं।
गजरौला क्षेत्र के महुआ गांव के बाज सिंह भुल्लर का नाम जिले के उन्नतशील किसानों में आता है। बाज सिंह ने खेती के नाम पर खुद का ही नहीं जिले का नाम भी रोशन किया है। वह अपने खेतों में आए दिन कोई न कोई नया प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने टैंच विधि से गन्ने की बोवाई कर एक हेक्टेयर में 771 क्विंटल गन्ना पैदा कर जिले में रिकॉर्ड बनाया है। इस विधि से फसल का उत्पादन भी बढ़ा और खर्च भी कम आया। वह गन्ने की फसल के साथ ही अन्य सहफसली मसूर, चना भी करते हैं। जब तक गन्ना बड़ा होता है तब तक फसल कट जाती है। उनकी इस मेहनत और लगन से गन्ने का उत्पादन भी जिले में नजीर बना हुआ है। उनकी इस कामयाबी पर 10 जून को मुख्यमंत्री ने उत्पादन के मामले में पहला स्थान पाने पर सम्मानित भी किया था। इससे पहले वह जिला और मंडल स्तर भी सम्मानित हो चुके हैं।
खुद तैयार करते हैं गन्ने का बीज
किसान बाज सिंह गन्ने का बीज खरीदते नहीं, बल्कि खुद तैयार करते हैं। इससे जहां सामान्य किसानों के यहां एक हेक्टेयर में 200 से 300 क्विंटल गन्ने की पैदावार होती हैं। वहीं उनके यहां 700 से 750 क्विंटल। इसके साथ ही वह अन्य फसलें भी करते हैं। उन्होंने बताया कि टैंच विधि से गन्ने की बोवाई और ड्रिप सिंचाई के कारण ही इतनी पैदावार होती है।
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जिले के अन्य किसानों को भी कर रहे जागरूक
किसान बाज सिंह ने अपने खेत में बीज की नर्सरी लगाई हुई है। जहां वह अन्य किसानों को भी बीज देकर जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि गन्ना विभाग के अधिकारी यहां आकर क्राॅप कटिंग भी देखते हैं।
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गजरौला क्षेत्र के महुआ गांव के बाज सिंह भुल्लर का नाम जिले के उन्नतशील किसानों में आता है। बाज सिंह ने खेती के नाम पर खुद का ही नहीं जिले का नाम भी रोशन किया है। वह अपने खेतों में आए दिन कोई न कोई नया प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने टैंच विधि से गन्ने की बोवाई कर एक हेक्टेयर में 771 क्विंटल गन्ना पैदा कर जिले में रिकॉर्ड बनाया है। इस विधि से फसल का उत्पादन भी बढ़ा और खर्च भी कम आया। वह गन्ने की फसल के साथ ही अन्य सहफसली मसूर, चना भी करते हैं। जब तक गन्ना बड़ा होता है तब तक फसल कट जाती है। उनकी इस मेहनत और लगन से गन्ने का उत्पादन भी जिले में नजीर बना हुआ है। उनकी इस कामयाबी पर 10 जून को मुख्यमंत्री ने उत्पादन के मामले में पहला स्थान पाने पर सम्मानित भी किया था। इससे पहले वह जिला और मंडल स्तर भी सम्मानित हो चुके हैं।
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खुद तैयार करते हैं गन्ने का बीज
किसान बाज सिंह गन्ने का बीज खरीदते नहीं, बल्कि खुद तैयार करते हैं। इससे जहां सामान्य किसानों के यहां एक हेक्टेयर में 200 से 300 क्विंटल गन्ने की पैदावार होती हैं। वहीं उनके यहां 700 से 750 क्विंटल। इसके साथ ही वह अन्य फसलें भी करते हैं। उन्होंने बताया कि टैंच विधि से गन्ने की बोवाई और ड्रिप सिंचाई के कारण ही इतनी पैदावार होती है।
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जिले के अन्य किसानों को भी कर रहे जागरूक
किसान बाज सिंह ने अपने खेत में बीज की नर्सरी लगाई हुई है। जहां वह अन्य किसानों को भी बीज देकर जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि गन्ना विभाग के अधिकारी यहां आकर क्राॅप कटिंग भी देखते हैं।