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Pilibhit News: डीआईओएस कार्यालय घोटाले मामले में तीन महिला आरोपियों की जमानत मंजूर

Fri, 05 Jun 2026 02:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 02:02 AM IST
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Bail granted to three women accused in DIOS office scam case
पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में आरोपी तीन महिलाओं को जमानत को मंजूरी मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने की नियमित जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए एक-एक लाख रुपये के निजी बंध पत्रों एवं इतनी राशि के दो जमानती दाखिल करने पर सशर्त रिहाई का आदेश दिया है।
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गौरतलब है कि डीआईओएस कार्यालय में बिल लिपिक का कार्य देख रहे इल्हाम उर्रहमान पर अपनी पत्नियों व अन्य रिश्तेदारों के नाम कूटरचित तरीके से वेतन मद में करोड़ों रुपये हस्तांतरिकत करने का आरोप लगा था। विवेचना के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी की पत्नियों सहित सात महिलाओं को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में पेश किया था। वहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था।
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मुख्य आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इस चर्चित मामले में बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में तीन महिला आरोपियों में गाजियाबाद के थाना मोहन नगर क्षेत्र की अशकारा परवीन, बुलंदशहर के थाना खुर्जा क्षेत्र निवासी नाहिद पत्नी व इसी क्षेत्र की आफिया की नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई की गई।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि आरोपी महिलाएं लंबे समय से जेल में निरुद्ध हैं। मामले की जांच में सहयोग कर रही हैं। इसलिए उन्हें नियमित जमानत का लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद आवश्यक शर्तों और मुचलके के आधार पर तीनों को रिहा करने का आदेश दिया। संवाद

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मिस्बाह को मिली अग्रिम जमानत
पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय में हुए करोड़ों के घोटाला मामले में आरोपी अशकारा परवीन की पुत्री मिस्बाह की अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मंजूर कर ली। मिस्बाह के अधिवक्ता ने अदालत में अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र देकर कहा कि एफआईआर में उसका नाम नहीं है। विवेचना में भी उसकी संलिप्तता नहीं मिली है। प्रकरण की विवेचना अभी जारी है। ऐसे में पुलिस की जांच से उसके भी प्रकरण में फंसने की आशंका है, जबकि उसने न तो डीआईओएस कार्यालय में नौकरी की और न ही कोई कूटरचित दस्तावेज बनाया। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद उसकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। संवाद
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