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Pilibhit News: भूलने की बीमारी अल्जाइमर लाइलाज, समय रहते परामर्श से होती नियंत्रण
Mon, 21 Sep 2026 12:44 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:44 AM IST
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डॉ. अमित कोहली, न्यूरोसर्जन
पीलीभीत। घर में रखी जरूरी चीज कहां रखी, किसी का नाम याद न आना, आने-जाने की भूल यह सामान्य भूल हो सकती है। लेकिन बार-बार एक ही बात भूलना, रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होना व परिचित रास्ते या लोगों को पहचानने में दिक्कत होने लगे तो इसे उम्र का असर समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह लक्षण अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
हर साल विश्व अल्जाइमर दिवस 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस 65 की उम्र से पहले लोगों को भूलने की असामान्य बीमारी व धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने व रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होने वाली अल्जाइमर व डिमेंशिया बीमारी से बचाव व जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जन डॉ. अमित कोहली बताते हैं कि यह केवल मानसिक तनाव की वजह से होने वाली बीमारी नहीं है। बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान और हृदय संबंधी बीमारियां इसके मरीज को जोखिम में डाल सकती हैं। उन्होंने बताया बुढ़ापे में तो आम तौर पर मानसिक नशों की कमजोरी से बुजुर्गों में सोचने-समझने की क्षमता, चीजों को कम याद रखने जैसी समस्या देखी जाती है, लेकिन अगर यही सब 30 से 65 की उम्र में हो तो यह अल्जाइमर के लक्षण होते हैं। अगर ऐसा कुछ मरीज को महसूस हो रहा है तो वह तुंरत ही न्यूरोसर्जन चिकित्सक से परामर्श ले, हल्के-हल्के दवाओं व थेरेपी से यह बीमारी दूर की जा सकती है।
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चिकित्सीय परामर्श के बाद ही कराएं जांच
न्यूरोसर्जन डॉ. अमित कोहली ने बताया लगातार भूलने की समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय पहले चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। याददाश्त, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों का आकलन करने के साथ जरूरत पड़ने पर रक्त जांच, ब्रेन इमेजिंग व अन्य परीक्षण करा सकते हैं। कई बार विटामिन की कमी, थायराइड संबंधी समस्या, अवसाद या कुछ दवाओं के प्रभाव से भी याददाश्त कमजोर हो सकती है।
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इलाज से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद
डॉ. अमित ने बताया कि इसका स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, जो बीमारी को पूरी तरह खत्म कर दे, लेकिन शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर कुछ दवाओं और उपचार से लक्षणों को नियंत्रित करने तथा बीमारी की प्रगति को कुछ हद तक धीमा करने में मदद मिल सकती है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी और मानसिक रूप से सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण है।
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हर साल विश्व अल्जाइमर दिवस 21 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस 65 की उम्र से पहले लोगों को भूलने की असामान्य बीमारी व धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने व रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होने वाली अल्जाइमर व डिमेंशिया बीमारी से बचाव व जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जन डॉ. अमित कोहली बताते हैं कि यह केवल मानसिक तनाव की वजह से होने वाली बीमारी नहीं है। बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान और हृदय संबंधी बीमारियां इसके मरीज को जोखिम में डाल सकती हैं। उन्होंने बताया बुढ़ापे में तो आम तौर पर मानसिक नशों की कमजोरी से बुजुर्गों में सोचने-समझने की क्षमता, चीजों को कम याद रखने जैसी समस्या देखी जाती है, लेकिन अगर यही सब 30 से 65 की उम्र में हो तो यह अल्जाइमर के लक्षण होते हैं। अगर ऐसा कुछ मरीज को महसूस हो रहा है तो वह तुंरत ही न्यूरोसर्जन चिकित्सक से परामर्श ले, हल्के-हल्के दवाओं व थेरेपी से यह बीमारी दूर की जा सकती है।
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चिकित्सीय परामर्श के बाद ही कराएं जांच
न्यूरोसर्जन डॉ. अमित कोहली ने बताया लगातार भूलने की समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय पहले चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। याददाश्त, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों का आकलन करने के साथ जरूरत पड़ने पर रक्त जांच, ब्रेन इमेजिंग व अन्य परीक्षण करा सकते हैं। कई बार विटामिन की कमी, थायराइड संबंधी समस्या, अवसाद या कुछ दवाओं के प्रभाव से भी याददाश्त कमजोर हो सकती है।
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इलाज से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद
डॉ. अमित ने बताया कि इसका स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, जो बीमारी को पूरी तरह खत्म कर दे, लेकिन शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर कुछ दवाओं और उपचार से लक्षणों को नियंत्रित करने तथा बीमारी की प्रगति को कुछ हद तक धीमा करने में मदद मिल सकती है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी और मानसिक रूप से सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण है।