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अक्षय तृतीया पर पिछले साल हुई थी सात करोड़ की खरीदारी, इस बार बाजार में रहा सन्नाटा
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पीलीभीत। अक्षय तृतीया के दिन हर साल गुलजार रहने वाला सराफा बाजार इस बार लॉकडाउन की वजह से सन्नाटे में रहा। खरीदार भी घरों के अंदर रहे और दुकानदार भी। ऑनलाइन सोने की बिक्री के लिए जरूर फोन घनघनाते रहे, मगर यह भी संभव नहीं हो पाया तो नाममात्र की ही बिक्री हुई। वहीं लोगों ने घरों में ही पूजा-अर्चना कर ईश्वर से स्वास्थ्य रक्षा की प्रार्थना की।
अक्षय तृतीया को सोना खरीदने की दृष्टि से शुभ दिन माना जाता है। मान्यता हो गई है कि साल भर धन धान्य में वृद्धि होगी। इस पावन दिन पर शादियां भी खूब होती हैं, जिससे सोने के साथ-साथ चांदी की भी खूब बिक्री होती है। मगर इस बार हर तरफ सन्नाटा दिखा। लॉकडाउन की वजह से सराफा की दुकानों पर ताले लटके रहे। अक्षय तृतीया पर आभूषण खरीदने के शौकीन दिन भर सराफा कारोबारियों के मोबाइल फोन पर कॉल कर बाजार खुलने की जानकारी लेते रहे। सराफा एसोसिएशन के महामंत्री शैली अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में डीएम वैभव श्रीवास्तव से वार्ता हुई थी, लेकिन उन्होंने स्थिति को देखते हुए सराफा बाजार खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जिन लोग के आभूषण खरीदने के लिए फोन आए, उन्हें मशविरा देते हुए बुक कराने को कहा, ताकि ऐसा करके इस शुभ दिन पर खरीद भी हो जाए। मगर इनमें से ज्यादातर लोगों ने आभूषण इसी दिन उनके घर भेजने को कहा, जो संभव नहीं था। इस तरह नाममात्र की ही बिक्री हुई।
सराफा व्यवसायी कमल अग्रवाल ने बताया कि सराफा की छोटी बड़ी 600 से ज्यादा दुकानें हैं और अक्षय तृतीय के दिन सात करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। मगर, इस बार बाजार का ऐसा रंग रहेगा, किसी ने दो माह पहले इसकी कल्पना भी नहीं की थी। एक अन्य सराफा व्यवसायी रचित अग्रवाल ने बताया कि आम लोग भी इस दिन कुछ न कुछ खरीदना शुभ मानते हैं, इसलिए दुकानों पर खरीदारों की खूब भीड़ रहती थी, मगर इस बार सन्नाटा रहा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के जो हालात देख रहे हैं, उसमें कोई कुछ कर भी नहीं सकता था।
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बर्तन बाजार को भी नुकसान
जेपी रोड स्थित बर्तन व्यापारी अर्पित अग्रवाल कहते हैं कि हर साल अक्षय तृतीया पर लोग कम से कम एक बर्तन जरूर खरीदते थे। थाली, गिलास, प्लेट, चम्मच समेत अन्य जरूरी बर्तन लोग खरीदकर बाजार से घर ले जाते थे। इस बार कोरोना के कारण रविवार को सभी दुकानें बंद रहीं। बर्तन बाजार को भी खासा नुकसान हो गया।
स्वास्थ्य रक्षा की ईश्वर से लगाते रहे गुहार
इस बार अक्षय तृतीया पर लोग लॉकडाउन के चलते मंदिरों में पूजा अर्चना नहीं करने पहुंच पाए। बाजार बंद होने से भगवान के लिए फूल-मालाएं एवं भोग के लिए प्रसाद भी नहीं ला पाए। श्रद्धालुओं ने रविवार को सूर्योदय के बाद घरों में ही खीर और हलवा बनाकर मां लक्ष्मी और विष्णु के अलावा भगवान परशुराम को भोग लगाकर पूजा अर्चना की। यह दान पुण्य का दिन था, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण ब्रहमभोज या कोई सामूहिक कार्यक्रम नहीं हो सका। श्रद्धालु स्वास्थ्य रक्षा के लिए ईश्वर से गुहार लगाते देखे गए।
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अक्षय तृतीया को सोना खरीदने की दृष्टि से शुभ दिन माना जाता है। मान्यता हो गई है कि साल भर धन धान्य में वृद्धि होगी। इस पावन दिन पर शादियां भी खूब होती हैं, जिससे सोने के साथ-साथ चांदी की भी खूब बिक्री होती है। मगर इस बार हर तरफ सन्नाटा दिखा। लॉकडाउन की वजह से सराफा की दुकानों पर ताले लटके रहे। अक्षय तृतीया पर आभूषण खरीदने के शौकीन दिन भर सराफा कारोबारियों के मोबाइल फोन पर कॉल कर बाजार खुलने की जानकारी लेते रहे। सराफा एसोसिएशन के महामंत्री शैली अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में डीएम वैभव श्रीवास्तव से वार्ता हुई थी, लेकिन उन्होंने स्थिति को देखते हुए सराफा बाजार खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जिन लोग के आभूषण खरीदने के लिए फोन आए, उन्हें मशविरा देते हुए बुक कराने को कहा, ताकि ऐसा करके इस शुभ दिन पर खरीद भी हो जाए। मगर इनमें से ज्यादातर लोगों ने आभूषण इसी दिन उनके घर भेजने को कहा, जो संभव नहीं था। इस तरह नाममात्र की ही बिक्री हुई।
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सराफा व्यवसायी कमल अग्रवाल ने बताया कि सराफा की छोटी बड़ी 600 से ज्यादा दुकानें हैं और अक्षय तृतीय के दिन सात करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। मगर, इस बार बाजार का ऐसा रंग रहेगा, किसी ने दो माह पहले इसकी कल्पना भी नहीं की थी। एक अन्य सराफा व्यवसायी रचित अग्रवाल ने बताया कि आम लोग भी इस दिन कुछ न कुछ खरीदना शुभ मानते हैं, इसलिए दुकानों पर खरीदारों की खूब भीड़ रहती थी, मगर इस बार सन्नाटा रहा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के जो हालात देख रहे हैं, उसमें कोई कुछ कर भी नहीं सकता था।
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बर्तन बाजार को भी नुकसान
जेपी रोड स्थित बर्तन व्यापारी अर्पित अग्रवाल कहते हैं कि हर साल अक्षय तृतीया पर लोग कम से कम एक बर्तन जरूर खरीदते थे। थाली, गिलास, प्लेट, चम्मच समेत अन्य जरूरी बर्तन लोग खरीदकर बाजार से घर ले जाते थे। इस बार कोरोना के कारण रविवार को सभी दुकानें बंद रहीं। बर्तन बाजार को भी खासा नुकसान हो गया।
स्वास्थ्य रक्षा की ईश्वर से लगाते रहे गुहार
इस बार अक्षय तृतीया पर लोग लॉकडाउन के चलते मंदिरों में पूजा अर्चना नहीं करने पहुंच पाए। बाजार बंद होने से भगवान के लिए फूल-मालाएं एवं भोग के लिए प्रसाद भी नहीं ला पाए। श्रद्धालुओं ने रविवार को सूर्योदय के बाद घरों में ही खीर और हलवा बनाकर मां लक्ष्मी और विष्णु के अलावा भगवान परशुराम को भोग लगाकर पूजा अर्चना की। यह दान पुण्य का दिन था, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण ब्रहमभोज या कोई सामूहिक कार्यक्रम नहीं हो सका। श्रद्धालु स्वास्थ्य रक्षा के लिए ईश्वर से गुहार लगाते देखे गए।