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पीलीभीत से पकड़ा बाघ दुधवा में छोड़ा गया

Sun, 24 Jan 2021 11:27 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2021 11:27 PM IST
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पीलीभीत। कलीनगर क्षेत्र में पकड़े गए बाघ को रविवार दूसरे दिन आजादी मिल गई। टाईगर रिजर्व के फील्ड डायरेेक्टर जावेद अख्तर की देखरेख में रविवार सुबह बाघ को दुधवा की सोनापुरी रेंज में छोड़ दिया गया। जानकारों के मुताबिक साढ़े तीन साल का नर बाघ मां से बिछुड़ने के बाद शिकार का तजुर्बा कम होने के कारण रिहायशी इलाकों में भटक रहा था।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व से निकला बाघ पिछले करीब दो माह से कलीनगर और पूरनपुर तहसील क्षेत्र में घूम रहा था। बाघ के लगातार आबादी क्षेत्र में चहलकदमी करने और घरों में घुसने के बाद उसे पिंजड़े में कैद करने की योजना बनाई गई। चार पिंजड़े भी लगाए गए थे, लेकिन बाघ हत्थे नहीं चढ़ा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडे के निर्देश पर बाघ को शनिवार शाम कलीनगर के ककरौआ गांव के समीप बेहोश करने के बाद पकड़ लिया था। परीक्षण के दौरान पकड़े गए नर बाघ की उम्र साढ़े तीन साल और वजन 1.65 क्विंटल पाया गया।
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इससे पहले पकड़े गए अधिकांश बाघों को चिड़ियाघरों में भेज गया था। इसलिए वन्यजीव प्रेमियों ने पकड़े गए इस बाघ को चिड़ियाघर न भेजने की अपील की थी। अभियान के दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर कमलेश कुमार ने साफ कर दिया था कि बाघ को चिड़ियाघर नहीं, बल्कि जंगल में ही छोड़ा जाएगा। इस पर बाघ को दुधवा टाइगर रिजर्व में छोड़ने का फैसला लिया गया। शनिवार रात पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर जावेद अख्तर के नेतृत्व में डीएफओ संजीव कुमार, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार बाघ को पिंजड़े में बंद करके दुधवा ले गए थे। रविवार सुबह आठ बजे बाघ को दुधवा टाइगर रिजर्व की सोनारीपुर रेंज में छोड़ दिया गया।
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इस नर बाघ के जंगल से बाहर रिहायशी इलाके में घूमने को लेकर विशेषज्ञों के अपने-अपने तर्क है। पीटीआर का जंगल अंग्रेजी के अक्षर यू आकार का है। बाघों की संख्या बढ़ने से अक्सर जंगल से बाहर निकल आते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पकड़ा गया नर बाघ अभी पूरी तरह वयस्क नहीं हुआ है। लगता है कि मां से बिछुडने के बाद भटककर आबादी क्षेत्र में निकल गया होगा। कम उम्र के बाघ में शिकार करने का पूरा तजुर्बा नहीं होता है। इसीलिए शिकार की तलाश में एक से दूसरे स्थान पर भटक रहा था। यही वजह है कि आबादी के बीच दो माह तक रहने के बावजूद बाघ कभी इंसान पर हमलावर नहीं हुआ।

उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शनिवार रात फील्ड डायरेक्टर के नेतृत्व में टीम बाघ को लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व रवाना हो गई थी। रविवार सुबह आठ बजे बाघ को डीडीआर की सोनारीपुर रेंज में छोड़ दिया गया।
संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी
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