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तीस हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी होने में बना है संशय
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बीसलपुर। घोषणा पत्र न भरने के कारण इस तहसील क्षेत्र के लगभग 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी होने में संशय बना हुआ है। इसको लेकर चीनी मिलों और गन्ना विभाग के अधिकारी काफी पसोपेश में हैं।
सहकारी गन्ना विकास समिति के अभिलेखों के अनुसार पूरे तहसील क्षेत्र में इस गन्ना सत्र के लिए 75 हजार किसान हैं। गन्ना विभाग के कर्मचारियों ने पांच जुलाई से गांव-गांव जाकर गन्ना सर्वे करने के साथ ही किसानों को अपने घोषणा पत्र ऑनलाइन भरने का सुझाव देना शुरू कर दिया था। घोषणा पत्र ऑनलाइन भरने की अंतिम तिथि 30 नवंबर थी जो मंगलवार को निकल गई है। पांच जुलाई से अब तक 75 हजार किसानों के विपरीत लगभग 45 हजार किसानों के ही घोषणा पत्र भर पाए हैं। करीब 30 हजार किसानों के घोषणा पत्र अभी तक नहीं भर पाए हैं। गन्ना आयुक्त संजय एस भुस रेड्डी का स्पष्ट आदेश है कि जो किसान घोषणा पत्र नहीं भरेंगे, उनका सट्टा नहीं चलेगा और न ही गन्ने की पर्चियां उन्हें जारी की जाएंगी। गन्ना आयुक्त ने यह फरमान पहले ही जारी कर दिया था लेकिन इस क्षेत्र के लगभग 30 हजार किसानों ने उनके इस फरमान पर गौर नहीं किया। इस तहसील क्षेत्र में नया गन्ना सत्र पहली नवंबर से शुरू हो गया था। सत्र चलते हुए पूरा एक माह बीत भी गया है। इस बीते माह में घोषणा पत्र न भरने वाले एक भी किसान की गन्ने की पर्ची जारी नहीं हुई। इससे लग रहा है कि घोषणा पत्र न भरने वाले किसानों की गन्ने की पर्चियां संभवत: नहीं जारी होंगी। गन्ना आयुक्त के फरमान के हिसाब से घोषणा पत्र भरने से वंचित लगभग 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी होने में संशय पैदा हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी नहीं की गई तो मिलों का गन्ना पेरने का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा।
इन चीनी मिलों से संबद्ध हैं वंचित किसान
किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर, बजाज हिदुस्तान चीनी मिल बरखेड़ा, डालमिया शुगर मिल निगोही, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर, द्वारिकेश चीनी मिल फरीदपुर और ललित हरि चीनी मिल पीलीभीत से ये 30 हजार वंचित किसान जुड़े हैं।
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अभिलेखों के अनुसार अभी तक समिति क्षेत्र के 75 हजार के विपरीत केवल 45 हजार किसानों के ही घोषणा पत्र भरे गए हैं। 30 हजार किसानों के घोषणा पत्र नहीं भरे गए हैं। 30 नवंबर को घोषणा पत्र भरने की तिथि खत्म हो गई है। अब तक के हालातों के हिसाब से वंचित 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी होने में संशय बना हुआ है। गन्ना आयुक्त के स्तर से इस संबंध में कोई और आदेश जारी हो जाए तो यह बात अलग है। - आरपी कुशवाहा सचिव सहकारी गन्ना विकास समिति बीसलपुर
इन कारणों से नहीं भरे गए वंचित किसानों के घोषणा पत्र
- किसानों के पास आधार कार्ड नहीं है
- आईडी के नाम पर कोई भी प्रपत्र नहीं है
- कुछ किसानों के बैंक खाते नहीं खुले हैं
- किसानों के पास उनके गन्ने के खेतों की फर्दे नहीं है
- किसानों के पास एंड्रायड फोन नहीं हैं
- समिति परिसर में घोषणा पत्र भरने के लिए नियमित रूप से काउंटर नहीं लगाए जाते
- ऑनलाइन घोषण पत्र भरने में परेशानी
- किसानों का मानना है कि घोषणा पत्र न भरने पर भी पर्चियां मिल जाएंगी
- कुछ किसानों ने घोषण पत्र भरने की जिम्मेदारी अपने बटाई दारों को दे रखी है
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सहकारी गन्ना विकास समिति के अभिलेखों के अनुसार पूरे तहसील क्षेत्र में इस गन्ना सत्र के लिए 75 हजार किसान हैं। गन्ना विभाग के कर्मचारियों ने पांच जुलाई से गांव-गांव जाकर गन्ना सर्वे करने के साथ ही किसानों को अपने घोषणा पत्र ऑनलाइन भरने का सुझाव देना शुरू कर दिया था। घोषणा पत्र ऑनलाइन भरने की अंतिम तिथि 30 नवंबर थी जो मंगलवार को निकल गई है। पांच जुलाई से अब तक 75 हजार किसानों के विपरीत लगभग 45 हजार किसानों के ही घोषणा पत्र भर पाए हैं। करीब 30 हजार किसानों के घोषणा पत्र अभी तक नहीं भर पाए हैं। गन्ना आयुक्त संजय एस भुस रेड्डी का स्पष्ट आदेश है कि जो किसान घोषणा पत्र नहीं भरेंगे, उनका सट्टा नहीं चलेगा और न ही गन्ने की पर्चियां उन्हें जारी की जाएंगी। गन्ना आयुक्त ने यह फरमान पहले ही जारी कर दिया था लेकिन इस क्षेत्र के लगभग 30 हजार किसानों ने उनके इस फरमान पर गौर नहीं किया। इस तहसील क्षेत्र में नया गन्ना सत्र पहली नवंबर से शुरू हो गया था। सत्र चलते हुए पूरा एक माह बीत भी गया है। इस बीते माह में घोषणा पत्र न भरने वाले एक भी किसान की गन्ने की पर्ची जारी नहीं हुई। इससे लग रहा है कि घोषणा पत्र न भरने वाले किसानों की गन्ने की पर्चियां संभवत: नहीं जारी होंगी। गन्ना आयुक्त के फरमान के हिसाब से घोषणा पत्र भरने से वंचित लगभग 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी होने में संशय पैदा हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी नहीं की गई तो मिलों का गन्ना पेरने का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा।
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इन चीनी मिलों से संबद्ध हैं वंचित किसान
किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर, बजाज हिदुस्तान चीनी मिल बरखेड़ा, डालमिया शुगर मिल निगोही, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर, द्वारिकेश चीनी मिल फरीदपुर और ललित हरि चीनी मिल पीलीभीत से ये 30 हजार वंचित किसान जुड़े हैं।
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अभिलेखों के अनुसार अभी तक समिति क्षेत्र के 75 हजार के विपरीत केवल 45 हजार किसानों के ही घोषणा पत्र भरे गए हैं। 30 हजार किसानों के घोषणा पत्र नहीं भरे गए हैं। 30 नवंबर को घोषणा पत्र भरने की तिथि खत्म हो गई है। अब तक के हालातों के हिसाब से वंचित 30 हजार किसानों की गन्ने की पर्चियां जारी होने में संशय बना हुआ है। गन्ना आयुक्त के स्तर से इस संबंध में कोई और आदेश जारी हो जाए तो यह बात अलग है। - आरपी कुशवाहा सचिव सहकारी गन्ना विकास समिति बीसलपुर
इन कारणों से नहीं भरे गए वंचित किसानों के घोषणा पत्र
- किसानों के पास आधार कार्ड नहीं है
- आईडी के नाम पर कोई भी प्रपत्र नहीं है
- कुछ किसानों के बैंक खाते नहीं खुले हैं
- किसानों के पास उनके गन्ने के खेतों की फर्दे नहीं है
- किसानों के पास एंड्रायड फोन नहीं हैं
- समिति परिसर में घोषणा पत्र भरने के लिए नियमित रूप से काउंटर नहीं लगाए जाते
- ऑनलाइन घोषण पत्र भरने में परेशानी
- किसानों का मानना है कि घोषणा पत्र न भरने पर भी पर्चियां मिल जाएंगी
- कुछ किसानों ने घोषण पत्र भरने की जिम्मेदारी अपने बटाई दारों को दे रखी है