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माला जंगल में घूमने वाला बाघ भी बन सकता है मुसीबत
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Fri, 17 Feb 2017 09:43 PM IST
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माला जंगल क्षेत्र में पीलीभीत-रिच्छोला मार्ग पर पांच दिन पूर्व बाघ ने कार पर हमला करने के इरादे से छलांग लगाई थी या फिर बाघ किसी शिकार के पीछे दौड़ रहा था, मामला जो भी हो, लेकिन अब लोग इस मार्ग पर वन विभाग की चौकसी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ी संख्या के चलते बाघ अब मैदानी इलाकों में निकलने के साथ हमलावर भी होते जा रहे हैं। फिलहाल कई लोगों को अपना शिकार बनाने वाला बाघ लखनऊ के चिड़ियाघर भेजा जा चुका है। जानकारों की मानें तो एक दिन पूर्व माला जंगल क्षेत्र में महिला को शिकार बनाने पर बाघ कहीं वही तो नहीं जिसने पीलीभीत-रिच्छोला मार्ग पर करीब पांच दिन पूर्व कस्बा निवासी हमसर अली की कार पर हमला किया था।
इधर एक दिन पूर्व डगा क्षेत्र के हल्दीडेंगा इलाकेे के एक बाग में बाघ ने एक नीलगाय को अपना शिकार बनाया। सामाजिक वानिकी के वनकर्मियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अपने अफसरों के निर्देश पर नीलगाय को खींचकर जंगल क्षेत्र में पहुंचा दिया। ताकि बाघ दोबारा मैदानी क्षेत्र में न आ सके। डगा गांव के लोगों का कहना है कि यहां दो शावकों के साथ बाघिन घूम रही है। इससे मैदानी इलाके में कृषि फसलों को रखवाली करना मुश्किल हो रहा है। मालूम हो कि इससे पूर्व बाघ ने डगा के अहमद खां को इसी इलाके में अपना शिकार बना लिया था। फिलहाल मामला जो भी हो, इससे माला जंगल में घूम रहा बाघ भी लोगों व वन विभाग के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। वहीं टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने व बाघों के बाहर निकलकर हमला करने से लगातार हालात खराब होते जा रहे हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष बलवीर सिंह ने डीएम व डीएफओ को पत्र भेजकर मार्ग पर चौकसी बढ़ाने की मांग की है।
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टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ी संख्या के चलते बाघ अब मैदानी इलाकों में निकलने के साथ हमलावर भी होते जा रहे हैं। फिलहाल कई लोगों को अपना शिकार बनाने वाला बाघ लखनऊ के चिड़ियाघर भेजा जा चुका है। जानकारों की मानें तो एक दिन पूर्व माला जंगल क्षेत्र में महिला को शिकार बनाने पर बाघ कहीं वही तो नहीं जिसने पीलीभीत-रिच्छोला मार्ग पर करीब पांच दिन पूर्व कस्बा निवासी हमसर अली की कार पर हमला किया था।
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इधर एक दिन पूर्व डगा क्षेत्र के हल्दीडेंगा इलाकेे के एक बाग में बाघ ने एक नीलगाय को अपना शिकार बनाया। सामाजिक वानिकी के वनकर्मियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अपने अफसरों के निर्देश पर नीलगाय को खींचकर जंगल क्षेत्र में पहुंचा दिया। ताकि बाघ दोबारा मैदानी क्षेत्र में न आ सके। डगा गांव के लोगों का कहना है कि यहां दो शावकों के साथ बाघिन घूम रही है। इससे मैदानी इलाके में कृषि फसलों को रखवाली करना मुश्किल हो रहा है। मालूम हो कि इससे पूर्व बाघ ने डगा के अहमद खां को इसी इलाके में अपना शिकार बना लिया था। फिलहाल मामला जो भी हो, इससे माला जंगल में घूम रहा बाघ भी लोगों व वन विभाग के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। वहीं टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने व बाघों के बाहर निकलकर हमला करने से लगातार हालात खराब होते जा रहे हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष बलवीर सिंह ने डीएम व डीएफओ को पत्र भेजकर मार्ग पर चौकसी बढ़ाने की मांग की है।
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