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प्रधान के चचेरे भाई का ‘किडनेप’ ड्रामा
Pilibhit
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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सर्विलांस की लोकेशन पर एसओजी ने मैलानी से दबोचा
एएसपी बोले: टिकट लेकर ट्रेन से गया था
सिटी रिपोर्टर
पीलीभीत/गजरौला। शुक्रवार को ग्राम पिपरियाभजा के प्रधान के भाई ने खुद के अपहरण का हाईप्रोफाइल ड्रामा रच लिया। एसओजी ने उसे 10 घंटे में ही सर्विलांस की मदद से लखीमपुर खीरी जिले के मैलानी जंक्शन रेलवे स्टेशन से दबोच लिया। उसकी जेब से रेल टिकट, बाइक की चावी और सेलफोन भी बरामद हुआ है।
थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरियाभजा निवासी ग्राम प्रधान सुखलाल का चचेरा भाई 40 वर्षीय रामपाल पुत्र मिश्रीलाल शुक्रवार की तड़के साढ़े पांच बजे बाइक से डीजल लेने गजरौला गया था। सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर उसके सेलफोन से उनके (प्रधान) के नंबर पर कॉल आई। कॉल रिसीव करते ही रामपाल रो पड़ा और बोला: भैया बचाय लो मार डालेगा। इतना कहने के बाद सेलफोन स्विच आफ हो गया। प्रधान सुखलाल के होश उड़ गए। परिजनों में चीखपुकार मच गई। भारी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। प्रधान ने घटना की सूचना पुलिस को दी। तलाश के दौरान उसकी बाइक पिपरियाभजा-सुहास मार्ग पर स्थित कठिना नदी पुल के पास खड़ी मिली। सूचना पर पहुंचे एएसपी डॉ अरविंद भूषण पांडे ने पुलिस बल के साथ घटना स्थल का मुआयना किया और गन्ने के खेतों और नदहा के जंगलात में कांबिंग की। पुलिस ने प्रधान सुखलाल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। एएसपी डॉ अरविंद भूषण पांडे ने बताया कि सर्विलांश से रामपाल की लोकेशन लखीमपुर खीरी के जिले के मैलानी जंक्शन रेलने स्टेशन पर मिली थी। इस पर वहां पहुंची एसओजी ने उसे दबोच लिया। उसके पास सेलफोन, रेलवे का टिकट और बाइक की चावी भी मिली है। उन्होंने बताया कि उसका अपहरण नहीं किया गया था। उसने महज अपहरण का ड्रामा किया था। रामपाल से इस हाईमास्ट ड्रामा करने के बावत पूछताछ की जा रही है।
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रामपाल के घर दस घंटे तक मचा रहा कोहराम
मैलानी में मिलने पर ग्रामीणों ने महसूस की राहत
गजरौला। प्रधान के चचेरे भाई ने अपहरण का नाटक कर परिजनों को ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लोगों को परेशान कर दिया। पूरे दस घंटे तक परिवार में कोहराम मचा रहा। उसके लखीमपुर के मैलानी रेलवे स्टेशन पर मिलने की सूचना के बाद परिजनों और गांव वालों ने राहत की सांस ली है। ग्राम पिपरियाभजा निवासी रामपाल की पत्नी की सात साल पूर्व मौत हो चुकी है। तीन बेटियों और दो बेटों की देखरेख और परवरिश की जिम्मेंदारी उसी के कंधे पर थी।
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एएसपी बोले: टिकट लेकर ट्रेन से गया था
सिटी रिपोर्टर
पीलीभीत/गजरौला। शुक्रवार को ग्राम पिपरियाभजा के प्रधान के भाई ने खुद के अपहरण का हाईप्रोफाइल ड्रामा रच लिया। एसओजी ने उसे 10 घंटे में ही सर्विलांस की मदद से लखीमपुर खीरी जिले के मैलानी जंक्शन रेलवे स्टेशन से दबोच लिया। उसकी जेब से रेल टिकट, बाइक की चावी और सेलफोन भी बरामद हुआ है।
थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरियाभजा निवासी ग्राम प्रधान सुखलाल का चचेरा भाई 40 वर्षीय रामपाल पुत्र मिश्रीलाल शुक्रवार की तड़के साढ़े पांच बजे बाइक से डीजल लेने गजरौला गया था। सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर उसके सेलफोन से उनके (प्रधान) के नंबर पर कॉल आई। कॉल रिसीव करते ही रामपाल रो पड़ा और बोला: भैया बचाय लो मार डालेगा। इतना कहने के बाद सेलफोन स्विच आफ हो गया। प्रधान सुखलाल के होश उड़ गए। परिजनों में चीखपुकार मच गई। भारी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। प्रधान ने घटना की सूचना पुलिस को दी। तलाश के दौरान उसकी बाइक पिपरियाभजा-सुहास मार्ग पर स्थित कठिना नदी पुल के पास खड़ी मिली। सूचना पर पहुंचे एएसपी डॉ अरविंद भूषण पांडे ने पुलिस बल के साथ घटना स्थल का मुआयना किया और गन्ने के खेतों और नदहा के जंगलात में कांबिंग की। पुलिस ने प्रधान सुखलाल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। एएसपी डॉ अरविंद भूषण पांडे ने बताया कि सर्विलांश से रामपाल की लोकेशन लखीमपुर खीरी के जिले के मैलानी जंक्शन रेलने स्टेशन पर मिली थी। इस पर वहां पहुंची एसओजी ने उसे दबोच लिया। उसके पास सेलफोन, रेलवे का टिकट और बाइक की चावी भी मिली है। उन्होंने बताया कि उसका अपहरण नहीं किया गया था। उसने महज अपहरण का ड्रामा किया था। रामपाल से इस हाईमास्ट ड्रामा करने के बावत पूछताछ की जा रही है।
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रामपाल के घर दस घंटे तक मचा रहा कोहराम
मैलानी में मिलने पर ग्रामीणों ने महसूस की राहत
गजरौला। प्रधान के चचेरे भाई ने अपहरण का नाटक कर परिजनों को ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लोगों को परेशान कर दिया। पूरे दस घंटे तक परिवार में कोहराम मचा रहा। उसके लखीमपुर के मैलानी रेलवे स्टेशन पर मिलने की सूचना के बाद परिजनों और गांव वालों ने राहत की सांस ली है। ग्राम पिपरियाभजा निवासी रामपाल की पत्नी की सात साल पूर्व मौत हो चुकी है। तीन बेटियों और दो बेटों की देखरेख और परवरिश की जिम्मेंदारी उसी के कंधे पर थी।
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