बर्न यूनिट दे सकती है कई लोगों को जिंदगी

Pilibhit Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। गंभीर रूप से जले हुए लोग जिंदगी की तलाश में जिला अस्पताल में आकर मौत की तरफ अपने कदम बढ़ा देते हैं। बर्न यूनिट के न होने से जले मरीजों को यहां से तत्काल बरेली और लखनऊ के लिये रेफर कर दिया जाता है। मरीज या तो धनाभाव के चलते अस्पताल में दम तोड़ते नजर आते है या फिर अन्य जनपदों में ठोकरें खाने को मजबूर होते हैं। इन सबके बावजूद बर्न यूनिट का प्रस्ताव छह माह से अधर में लटका हुआ है।
जिला अस्पताल में जले हुए लोगों का इलाज भी नहीं हो पाता। बीस प्रतिशत से अधिक जले केसों को रेफर कर दिया जाता है। मरीज की जिद पर अस्पताल प्रशासन ने छह बेडों के वैकल्पिक वार्ड की व्यवस्था कर तो दी है लेकिन कम संसाधन और सीमित स्टाफ से जूझते अस्पताल प्रशासन को इन केसों को हैंडिल करना काफी मुश्किल हो जाता है। यहां वेंटीलेटर, ऑक्सीजन पाइप लाइन, ब्लड सेपरेटर यूनिट, सुपर स्पेशलिस्ट प्लास्टिक सर्जन न होने से बर्न केस वाले मरीज यहां मौत से लड़ाई लड़ते नजर आते है। जिला अस्पताल में मात्र दो जनरल सर्जन के सहारे हर साल सैकड़ों जले मरीजों का इलाज करवाना भी अस्पताल प्रशासन को चुनौती बन गया है। ऐसे में सहायक के रूप में फार्मासिस्ट ही इनका सहारा बनते है। अभी भी यहां के मरीजों का सिल्वर सल्फा डाइजिन मरहम से इलाज होता है। हाई एंटीबायटिक दवाओं का अभाव है।
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बरेली के बर्न यूनिट की तर्ज पर जिला अस्पताल में वार्ड तो बना दिया गया है, लेकिन स्पेशलिस्ट प्लास्टिक सर्जन नहीं है। प्रस्ताव तो भेजा गया लेकिन काफी लंबे समय से अधर में ही लटका है।
- डॉ केके शर्मा, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल

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