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झोलाछाप के सहारे गांववालों का इलाज
Pilibhit
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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बिलसंडा। गर्मी के कारण अब डायरिया ने भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। ऐसा कोई गांव नहीं जिसमें डायरिया के रोगी न हों। नगर में भले ही मरीज अच्छे अस्पताल में इलाज करा लेते हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल में गरीबों के लिए झोलाछाप ही भगवान हैं। झोलाछाप के पास न तो अच्छी दवाएं हैं और न ही मरीजों को ट्रीटमेंट देने की साफ सफाई युक्तकोई व्यवस्था, फिर भी उनसे इलाज कराना मरीजों की मजबूरी है। ऐसे लोगों के पास सही इलाज कराने के लिए पैसा भी नहीं होता है। गांवों में तो झोलाछाप पेड़ों की छांव तले टहनी में बोतल टांगकर इलाज कर रहे हैं।
आठ दिन से शरीर को झुलसाने वाली तेज धूप और ऊपर से चल रही लू के थपेड़ों को झेलना मुश्किल पड़ रहा है। ऐसे में डायरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। नगर के निजी क्लीनिकों पर डायरिया के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी डायरिया रोगी बढ़ रहे हैं। अलबत्ता सरकारी अस्पताल में डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या नगण्य है। मरीज तेज धूप की वजह से अस्पताल न आकर गांव में ही झोलाछाप से इलाज करा लेते हैं। मर्ज चाहें जो हो, यह उन्हें लाल-पीली गोलियां और ग्लूकोज की बोतल चढ़ाकर इलाज करने से नहीं चूकते। स्वास्थ्य महकमा इन पर अंकुश लगाने को कोई कदम नहीं उठा रहा है, जिससे बड़ी अनहोनी की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
इंसेट
गांवों में झोलाछाप से तत्काल राहत को भले ही इलाज करा लें, लेकिन हालत गंभीर होने पर लोग अपने मरीजों को तुरंत अस्पताल लेकर आएं। वर्तमान समय में सरकारी अस्पताल में बेहतर दवाएं और मरीजों को भर्ती करने की सारी सुविधाएं और सभी स्वास्थ्य उपकेंद्र पर एएनएम के पास भी पर्याप्त दवाएं और जीवन रक्षक घोल भी उपलब्ध हैं। झोलाछापों पर कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ सीएम चतुर्वेदी, अधीक्षक
सीएचसी बिलसंडा
इंसेट
डायरिया से बचाव-
* पानी उबालकर ठंडा करने के बाद पिएं
* बासी भोजन न करें
* नमक का घोल बनाकर पिएं
* मकान के आसपास गंदगी न होने दें
बाक्स
बिना डिग्री अस्पताल चलाना गैरकानूनी : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी राकेश तिवारी का कहना है कि बिना डिग्री अस्पताल चलाना गैरकानूनी है। इन पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर छापा मारकर संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। इधर, हाल में कोई अभियान नहीं चलाया गया, लेकिन अब जल्द ही झोलाछापों पर कार्रवाई की जाएगी।
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आठ दिन से शरीर को झुलसाने वाली तेज धूप और ऊपर से चल रही लू के थपेड़ों को झेलना मुश्किल पड़ रहा है। ऐसे में डायरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। नगर के निजी क्लीनिकों पर डायरिया के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी डायरिया रोगी बढ़ रहे हैं। अलबत्ता सरकारी अस्पताल में डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या नगण्य है। मरीज तेज धूप की वजह से अस्पताल न आकर गांव में ही झोलाछाप से इलाज करा लेते हैं। मर्ज चाहें जो हो, यह उन्हें लाल-पीली गोलियां और ग्लूकोज की बोतल चढ़ाकर इलाज करने से नहीं चूकते। स्वास्थ्य महकमा इन पर अंकुश लगाने को कोई कदम नहीं उठा रहा है, जिससे बड़ी अनहोनी की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
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गांवों में झोलाछाप से तत्काल राहत को भले ही इलाज करा लें, लेकिन हालत गंभीर होने पर लोग अपने मरीजों को तुरंत अस्पताल लेकर आएं। वर्तमान समय में सरकारी अस्पताल में बेहतर दवाएं और मरीजों को भर्ती करने की सारी सुविधाएं और सभी स्वास्थ्य उपकेंद्र पर एएनएम के पास भी पर्याप्त दवाएं और जीवन रक्षक घोल भी उपलब्ध हैं। झोलाछापों पर कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ सीएम चतुर्वेदी, अधीक्षक
सीएचसी बिलसंडा
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डायरिया से बचाव-
* पानी उबालकर ठंडा करने के बाद पिएं
* बासी भोजन न करें
* नमक का घोल बनाकर पिएं
* मकान के आसपास गंदगी न होने दें
बाक्स
बिना डिग्री अस्पताल चलाना गैरकानूनी : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी राकेश तिवारी का कहना है कि बिना डिग्री अस्पताल चलाना गैरकानूनी है। इन पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर छापा मारकर संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। इधर, हाल में कोई अभियान नहीं चलाया गया, लेकिन अब जल्द ही झोलाछापों पर कार्रवाई की जाएगी।