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नहीं थमा बुखार का कहर, किशोरी सहित दो की जान गई

Sat, 22 Sep 2018 11:19 PM IST
Updated Sat, 22 Sep 2018 11:19 PM IST
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नहीं थमा बुखार का कहर, किशोरी सहित दो की जान गई
नहीं थमा बुखार का कहर, किशोरी सहित दो की जान गई
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मरने वालों की संख्या जिले में तीस तक पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले में तेजी से पैर पसार रहे तेज बुखार से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। बीते 24 घंटे में बीसलपुर और पूरनपुर में किशोरी समेत दो के दम तोड़ने के बाद जिले में बुखार से मरने वालों की संख्या तीस तक पहुंच गई है। बीसलपुर में दर्जनों लोग अभी भी बुखार की चपेट में हैं।
बीसलपुर के गांव मुसेली निवासी इंद्रपाल ने बताया कि उनकी छह वर्षीय बेटी मिथलेश कुमारी को तीन दिन पूर्व तेज बुखार आने पर बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार रात मिथलेश ने तेज बुखार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक ठाकुरदास ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि रविवार को टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।
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घुंघचाई। चकतपुर चकौड़ा निवासी सीमा देवी (13) सात दिन से बुखार से ग्रसित थी। गांव के ही एक झोलाछाप से सीमा का इलाज चल रहा था। पिता मोतीलाल ने बताया कि शनिवार शाम करीब छह बजे अचानक तेज बुखार आने पर वह गांव में झोलाछाप से दवा दिलाने के बाद बेटी सीमा को सीएचसी ले जाने लगे। इस दौरान रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
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बुखार का डाटा जुटाने को लगाई ड्यूटी
पीलीभीत। निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले बुखार पीड़ितों का डाटा जुटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अलग से एक कर्मचारी को जिम्मेदारी दी है। यह जिम्मेदारी सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने जिले में बुखार से होने वाली मौतों व तेजी से बढ़ रहे प्रकोप को देखते हुए दी है। प्रतिदिन शहर में संचालित निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले बुखार पीड़ितों का डाटा जुटाने के बाद स्वास्थ्य विभाग इसे अपने रिकार्ड में दर्ज रखेगा और बुखार पीड़ितों की अपडेट लेते रहेगा। जिले में बुखार से अब तक तीस लोग जान गवां चुके हैं। सेहत महकमे के आंकड़ों की बात करें तो उनके रिकार्ड में सिर्फ एक ही मौत बुखार से होना दर्ज है। इसकी वजह यह है कि निजी अस्पताल में होने वाली मौतों को चिकित्सक छिपा जाते हैं। सेहत महकमा को इसकी भनक तक नहीं लग पाती। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि एक कर्मचारी को सिर्फ निजी अस्पताल में भर्ती होने वाले बुखारी पीड़ितों को डाटा जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। डाटा नहीं देने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी।
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