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खरुआ की 72 एकड़ जमीन को शासन से मिला 15 करोड़

Sun, 29 Nov 2015 11:01 PM IST
plibhit
plibhit Updated Sun, 29 Nov 2015 11:01 PM IST
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72 acres of Krua The government got 15 million

26वीं वाहिनी एसएसबी का मुख्यालय बनाने को वर्ष 2004 मेें खरूआ की अधिगृहीत की गई 72 एकड़ जमीन के बदले किसानों को अब प्रशासन तत्कालीन सर्किल रेट के चार गुना धनराशि देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए शासन से 15 करोड़ रुपये की धनराशि भी प्राप्त हो गई। वहीं किसान वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना धनराशि मांग रहे हैं। उधर, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की सुनवाई सात दिसंबर को होनी है।

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जिले में एसएसबी की स्थापना के बाद उसका मुख्यालय बनाने को वर्ष 2004 में ललौरीखेड़ा के निकट खरूआ की जमीन को चिन्हित कर प्रशासन ने अधिग्रहीत कर लिया था। इसमें करीब 61 खाता नंबरों से 150 किसानों की करीब 72 एकड़ जमीन प्रशासन ने ली थी। इतना ही नहीं 22 जनवरी 2007 को इस जमीन का अमल दरामद भी एसएसबी के नाम करा दिया गया। उस समय जमीन के बदले दी जा रही कीमत को लेकर कुछ किसानों ने विरोध किया था। बाद में मामला बढ़ने पर किसान नेता वीएम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, जिससे मामला लटक गया। इधर अब 11 साल बाद शासन ने जमीन के तत्कालीन सर्किट रेट से चार गुना कीमत देने का निर्णय लिया है। इसके लिए पिछले दिनों जिला प्रशासन को 15 करोड़ रुपये भी उपलब्ध कराया है। खरूआ की जमीन के बदले किसानों को देने के लिए धनराशि प्राप्त होने पर डीएम मासूम अली सरवर ने इसका आदेश भी जारी कर दिया है। जिसके अनुसार इच्छुक किसान जमीन का तत्कालीन रेट से चार गुना धनराशि प्राप्त कर सकते हैं। आदेश जारी होने के बाद तहसील प्रशासन ने इसके प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। प्रशासन के मुताबिक कुछ किसान इसके लिए राजी भी हो गए हैं। वहीं इसकी जानकारी होने पर अधिकांश किसान विरोध में उतर आए हैं। ऐसे किसान वर्तमान कीमत से चार गुना धनराशि लेने की मांग पर अड़ गए हैं। इससे बात बनने के आसार अभी भी क्षीण नजर आ रहे हैं।
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फैक्ट फाइल
कुल जमीन        72 एकड़ (28.883 हेक्टेअर)
खाता नंबर        61
किसान           150
अधिग्रहण         2004
अमलदरामद       2007
तत्कालीन रेट      4.00 लाख/एकड़ (लगभग)

सरकारी नियम से मिले पैसा
प्रशासन ने 11 साल पहले मेरी दो एकड़ जमीन ले ली थी। जिसका आज तक कोई पैसा नहीं मिला है। अब कोर्ट की फजीहत से बचने को प्रशासन दिखावा कर रहा है। सरकारी नियम के अनुसार आज के सर्किल रेट से चार गुना दाम मिलना चाहिए।
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चरन सिंह, किसान

11 साल से झेल रहे परेशानी
घर परिवार चलाने को डेढ़ एकड़ जमीन थी वह भी छीन ली गई। 11 साल किस तरह कांटे हैैं मैं ही जानता हूं। इतना इंतजार किया है तो थोड़ा और सही। कोर्ट के निर्णय का इंतजार करेंगे।
डोरीलाल

नहीं चलेगी प्रशासन की मनमानी
मेरे पास करीब 2.5 एकड़ जमीन थी जो एसएसबी के लिए प्रशासन ने अधिग्रहीत कर ली। यदि सरकार को किसानों की चिंता है तो नियमानुसार आज के रेट का चार गुना दाम हमें दे।
कृष्ण कुमार

पांच एकड़ जमीन से दो बेटों की परिवरिश कर रहा था। जमीन अधिग्रहण के बाद एक इंच जमीन भी नहीं बची। किसी तरह बच्चों को पाला पोषा। एक बेटे की पिछले दिनों मौत हो गई अब बेटे की विधवा की जिम्मेदारी भी बूढ़े कंधों पर हैं। अब कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई निर्णय लेंगे।
तेजराम

खरूआ जमीन का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसमें सरकार ने किसानों को धनराशि देने का शपथपत्र दिया है। इसके के तहत प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन किसान आज के सर्किल रेट से धनराशि मांग रहे हैं। मामले में सात तारीख लगी है। जल्द ही निर्णय आने की उम्मीद है।

वीएम सिंह, किसान नेता

खरूआ में एसएसबी के लिए भूमि अधिग्रहीत है। इसके लिए किसानों को उस समय के रेट के चार गुना धनराशि दी जाएगी। किसानों से इसके लिए बात भी हुई है। कुछ लोग रोड़ा डालने का प्रयास कर रहे हैं। जिनकी मंशा पूरी नहीं होने दी जाएगी। जहां तक सुप्रीम कोर्ट का मामला है, उसमें जमीन पर कोई स्टे नहीं है।
मासूम अली सरवर, डीएम

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