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सावधान! जहर न बन जाएं सिथेंटिक दूध
Updated Mon, 30 Apr 2018 09:04 PM IST
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सावधान! जहर न बन जाएं सिंथेटिक दूध
खुलेआम हो रही बिक्री, रोकथाम के बंदोबस्त नहीं
अफसर बोले मिलावट खोरों के खिलाफ चलाएंगे अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
स्वास्थ्य के लिए सबसे अहम संतुलित आहार माने जाने वाले दूध की किल्लत गर्मी बढ़ने के साथ ही शुरू हो गई है। बच्चों के पीने व चाय के लिए शुद्ध दूध नसीब नहीं हो पा रहा है। सिंथेटिक दूध बनाकर वारे न्यारे करने में लगे दूध कारोबारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे है। हालत यह हैं कि 50 रुपये प्रति किलो के दाम पर भी शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा है।
जिले में सिंथेटिक पाउडर मंगाकर उससे निर्मित खाद्य पदार्थों को महंगे दामों पर बेचे जाने की बात विभागीय अधिकारियों से नहीं छिपी है। जिले में सिंथेटिक दूध की भरमार है। इसकी पुष्टी खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले साल लिए गए दूध के नमूनों की जांच रिपोर्ट से हुई है। ज्यादातर नमूने जांच में फेल हो गए हैं। जरूरत के हिसाब से जिले में दूध की डिमांड बढ़ रही है और उत्पादन कम हो रहा है। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए सिंथेटिक दूध कारोबारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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सिर्फ त्योहारों पर चलाया जाता अभियान
सिंथेटिक पाउडर मंगाकर उससे मिठाइयां तैयार कर महंगे दामों में बेची जा रहीं हैं। पनीर, दही व लस्सी भी बनाई जा रही है पर खाद्य सुरक्षा विभाग सिंथेटिक दूध और उससे निर्मित खाद्य पदार्थों के खिलाफ होली दिवाली तथा अन्य त्योहारों पर ही अभियान चलाकर नमूने लेने की औपचारिकताएं निभाता है।
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ऐसे करें मिलावटी दूध की पहचान
- दूध की बूंद चिकनी सतह पर गिराएं, अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है।
- मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी।
- आयोडीन की कुछ बूंदे दूध में मिलाएं। मिलाने पर मिश्रण का रंग नीला हो जाएगा।
- सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है जबकि सही दूध का स्वाद मीठा होता है।
- उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है।
- गर्म करने पर पीला पड़ जाता है
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क्या कहते हैं आंकड़े
जिले की आबादी - लगभग बीस लाख
दुधारू पशुओं की संख्या - चार लाख
जिले को दूध की जरूरत - लगभग तीन लाख लीटर प्रतिदिन
110 नमूने लिए गए वर्ष 2017 में
17 सैंपल हुए जांच में फेल
24 सैंपल 2018 में लिए गए
8 नमूने जांच में हुए हैं फेल
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बोले पशु चिकित्सक
पशु चिकित्सक जीपी सिंह ने बताया कि गर्मी बढ़ने से दुधारू पशुओं में बीस से तीस फीसदी दूध में कमी आती है। पौष्टिक आहार और पानी के साथ खली मिश्रित भूसा देकर दूध का उत्पादन समान बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी में दुधारू पशुओं को तेज धूप में नहीं छोड़ना चाहिए साथ ही पशु जितना दूध देता है उससे आधी मात्रा में खली, दाना देना चाहिए।
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खाद्य पदार्थों की जांच को लेकर विभाग सक्रिय है। मिलावटखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दूध विक्रेताओं पर विभाग पैनी नजर रखे हुए है। नियमित रुप से लगातार छापेमारी करते हुए दूध के सैंपल लिए जाते हैं। अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
वीके वर्मा, अभिहीत अधिकारी
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खुलेआम हो रही बिक्री, रोकथाम के बंदोबस्त नहीं
अफसर बोले मिलावट खोरों के खिलाफ चलाएंगे अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
स्वास्थ्य के लिए सबसे अहम संतुलित आहार माने जाने वाले दूध की किल्लत गर्मी बढ़ने के साथ ही शुरू हो गई है। बच्चों के पीने व चाय के लिए शुद्ध दूध नसीब नहीं हो पा रहा है। सिंथेटिक दूध बनाकर वारे न्यारे करने में लगे दूध कारोबारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे है। हालत यह हैं कि 50 रुपये प्रति किलो के दाम पर भी शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा है।
जिले में सिंथेटिक पाउडर मंगाकर उससे निर्मित खाद्य पदार्थों को महंगे दामों पर बेचे जाने की बात विभागीय अधिकारियों से नहीं छिपी है। जिले में सिंथेटिक दूध की भरमार है। इसकी पुष्टी खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले साल लिए गए दूध के नमूनों की जांच रिपोर्ट से हुई है। ज्यादातर नमूने जांच में फेल हो गए हैं। जरूरत के हिसाब से जिले में दूध की डिमांड बढ़ रही है और उत्पादन कम हो रहा है। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए सिंथेटिक दूध कारोबारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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सिर्फ त्योहारों पर चलाया जाता अभियान
सिंथेटिक पाउडर मंगाकर उससे मिठाइयां तैयार कर महंगे दामों में बेची जा रहीं हैं। पनीर, दही व लस्सी भी बनाई जा रही है पर खाद्य सुरक्षा विभाग सिंथेटिक दूध और उससे निर्मित खाद्य पदार्थों के खिलाफ होली दिवाली तथा अन्य त्योहारों पर ही अभियान चलाकर नमूने लेने की औपचारिकताएं निभाता है।
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ऐसे करें मिलावटी दूध की पहचान
- दूध की बूंद चिकनी सतह पर गिराएं, अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है।
- मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी।
- आयोडीन की कुछ बूंदे दूध में मिलाएं। मिलाने पर मिश्रण का रंग नीला हो जाएगा।
- सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है जबकि सही दूध का स्वाद मीठा होता है।
- उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है।
- गर्म करने पर पीला पड़ जाता है
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क्या कहते हैं आंकड़े
जिले की आबादी - लगभग बीस लाख
दुधारू पशुओं की संख्या - चार लाख
जिले को दूध की जरूरत - लगभग तीन लाख लीटर प्रतिदिन
110 नमूने लिए गए वर्ष 2017 में
17 सैंपल हुए जांच में फेल
24 सैंपल 2018 में लिए गए
8 नमूने जांच में हुए हैं फेल
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बोले पशु चिकित्सक
पशु चिकित्सक जीपी सिंह ने बताया कि गर्मी बढ़ने से दुधारू पशुओं में बीस से तीस फीसदी दूध में कमी आती है। पौष्टिक आहार और पानी के साथ खली मिश्रित भूसा देकर दूध का उत्पादन समान बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी में दुधारू पशुओं को तेज धूप में नहीं छोड़ना चाहिए साथ ही पशु जितना दूध देता है उससे आधी मात्रा में खली, दाना देना चाहिए।
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खाद्य पदार्थों की जांच को लेकर विभाग सक्रिय है। मिलावटखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दूध विक्रेताओं पर विभाग पैनी नजर रखे हुए है। नियमित रुप से लगातार छापेमारी करते हुए दूध के सैंपल लिए जाते हैं। अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
वीके वर्मा, अभिहीत अधिकारी