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डूडा के नौ हजार आवासों में निकले 38 फर्जी, अब फिर होगा सत्यापन
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पीलीभीत। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) से प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना 2017 में शुरू हुई थी। इसका लाभ लेने के लिए जनपद में 20 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। मगर जिम्मेदारों की मेहरबानी से कई लोग ऐसे भी शामिल कर लिए गए, जो अपात्र थे। शिकायत पर डीएम ने सभी नगरों में जांच के लिए अधिकारी नियुक्त किए थे। नौ हजार आवास सत्यापन में 37 अपात्र मिले। हालांकि डूडा की पीओ ने इनका गलत तरीके से सत्यापन बताया है। इस पर दोबारा सत्यापन को लेकर डीएम को पत्र लिखा है।
जिला नगरीय विकास अभिकरण के तहत जनपद के सभी नौ नगरों में पात्रों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनमें कुछ लोग जिम्मेदार अफसरों की मेहरबानी से अपात्र होते हुए भी पात्रता सूची में शामिल कर लिए गए थे। जबकि पात्र आवास से वंचित रह गए थे। इसकी शिकायत कई माह पहले लोगों ने डीएम से की थी। डीएम पुलकित खरे ने सभी नगरों में आवासों के सत्यापन को लेकर अधिकारी नियुक्त कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। मगर अधिकारियों ने सात दिन में सत्यापन करने के बजाय डेढ़ माह लगा दिया। इसके बाद नौ हजार आवासों के सत्यापन में 37 अपात्र निकले। जबकि डूडा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी आवास पत्रों को दिए गए है। अगर किसी पात्र व्यक्ति ने योजना के अलावा और पैसा लगाकर आवास अच्छे ढंग से बना लिया है, तो वह अपात्र की श्रेणी में नहीं आता है। जांच अधिकारियों ने सही ढंग से सत्यापन नहीं किया गया है। बस कुछ ज्यादा जगह में आवास बना होने पर अपात्र कर दिया है। इसको लेकर दोबारा सत्यापन कराया जाएगा।
जांच अधिकारियों की सत्यापन रिपोर्ट में 37 आवास गलत पाए गए है। अगर किसी ने खुद का पैसा लगाकर ज्यादा जगह में बनवा लिया है, तो वह सत्यापन रिपोर्ट में गलत नहीं हो सकता। डीएम साहब को दोबारा सत्यापन कराने के लिए पत्र दिया गया है। - अनामिका सक्सेना, पीओ डूडा
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जिला नगरीय विकास अभिकरण के तहत जनपद के सभी नौ नगरों में पात्रों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनमें कुछ लोग जिम्मेदार अफसरों की मेहरबानी से अपात्र होते हुए भी पात्रता सूची में शामिल कर लिए गए थे। जबकि पात्र आवास से वंचित रह गए थे। इसकी शिकायत कई माह पहले लोगों ने डीएम से की थी। डीएम पुलकित खरे ने सभी नगरों में आवासों के सत्यापन को लेकर अधिकारी नियुक्त कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। मगर अधिकारियों ने सात दिन में सत्यापन करने के बजाय डेढ़ माह लगा दिया। इसके बाद नौ हजार आवासों के सत्यापन में 37 अपात्र निकले। जबकि डूडा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी आवास पत्रों को दिए गए है। अगर किसी पात्र व्यक्ति ने योजना के अलावा और पैसा लगाकर आवास अच्छे ढंग से बना लिया है, तो वह अपात्र की श्रेणी में नहीं आता है। जांच अधिकारियों ने सही ढंग से सत्यापन नहीं किया गया है। बस कुछ ज्यादा जगह में आवास बना होने पर अपात्र कर दिया है। इसको लेकर दोबारा सत्यापन कराया जाएगा।
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जांच अधिकारियों की सत्यापन रिपोर्ट में 37 आवास गलत पाए गए है। अगर किसी ने खुद का पैसा लगाकर ज्यादा जगह में बनवा लिया है, तो वह सत्यापन रिपोर्ट में गलत नहीं हो सकता। डीएम साहब को दोबारा सत्यापन कराने के लिए पत्र दिया गया है। - अनामिका सक्सेना, पीओ डूडा
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