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Pilibhit News: 300 कांशीराम आवास हुए खंडहर, आवंटन 13 साल बाद भी नहीं हुआ
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राजीव गुप्ता ।
बीसलपुर। बसपा शासनकाल का ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम शहरी आवास योजना प्रशासनिक लापरवाही के कारण दम तोड़ने लगी है। यहां 13 साल बाद भी 300 कांशीराम आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। लाभार्थी आवास प्राप्त करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन नियमावली ही तैयार नहीं हो सकी है। ऐसे में रखरखाव के अभाव में आवास खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
जरूरतमंदों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से बसपा शासनकाल में शुरू की गई कांशीराम आवास योजना के तहत यहां आठ करोड़ 10 लाख रुपयों की लागत से 300 कांशीराम आवास बनाए गए थे। इस दौरान नगर के आवासविहीन लोगों में उम्मीद जगी कि अब इस योजना में आवेदन करने पर उन्हें भी रहने के लिए आवास मिल जाएगा, लेकिन सत्ता बदलते ही जरूरतमंदों के सपने टूट गए।
आवास आवंटन शुरू होता उससे पहले ही बसपा सरकार चली गई। उसके बाद भी पात्रों ने आस नहीं छोड़ी। वे लोग आवास प्राप्त करने के लिए संबंंधित अधिकारियों और राजनेताओं के चक्कर लगाते रहे। आवास उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद बरेली के माध्यम से बनाए गए थे। आवासीय कॉलोनी में कुछ कमियां थीं। सत्ता बदलते ही अधिकारियों ने इस कॉलोनी की ओर से ऐसा मुंह फेरा कि कॉलोनी की यह कमियां दूर नहीं हो पाईं। ऐसे में आवासों का आवंटन भी नहीं हो पाया।
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फिलहाल 13 वर्ष गुजर जाने के बाद आवास जर्जर होने लगे हैं तो अराजक तत्वों ने भी यहां अपना अड्डा बना लिया है। यह और बात है कि कॉलोनी में विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दो ट्रांसफार्मर लगे हैं तो सभी आवासों तक विद्युत लाइन के साथ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ओवरहेड टैंक भी है।
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इस कारण नहीं हो सका आवंटन
आवास आवंटन के लिए अधिकारियों की कमेटी गठित नहीं की गई तो इसके साथ ही नियमावली भी नहीं बनाई गई।
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लाभार्थियों के पालिका कार्यालय में जमा हैं आवेदन
पात्र लाभार्थियों के आवेदन पत्र काफी समय से नगरपालिका कार्यालय में जमा है। लाभार्थियों की पात्रता की जांच नगरपालिका और राजस्व विभाग के अधिकारियों के स्तर से हो चुकी है।
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लोगों का दर्द
काफी समय पहले पालिका कार्यालय में आवेदन जमा किया था। 25 सालों से मोहल्ला सराय के एक मकान में किराये पर रह रहे हैं। आवास मिलने की आस टूटने लगी है।
-रामआसरे लाल, मोहल्ला सराय
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पिछले 30 वर्षों से मोहल्ला दुर्गाप्रसाद में किराये के मकान में रहते हैं। आवेदन जांच में सही पाया गया था। आवास प्राप्त करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं।
-नंद किशोर, मोहल्ला दुर्गाप्रसाद
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पिछले 28 वर्षों से मोहल्ला दुबे में किराये के मकान में रह रही हूं। आवेदन पत्र जमा करते समय काफी उम्मीद थी। अब उम्मीद निराशा में बदल गई है।
-कमल कुमारी, मोहल्ला दुबे
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पिछले 17 वर्षों से अलग-अलग मोहल्लों में किराये के मकानों में रहते चले आ रहे हैं। सबसे पहले आवेदन किया था। आवास मिलना अब सिर्फ एक सपना बनकर रह गया है।
-राजीव गुप्ता, मोहल्ला बख्तावरलाल
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मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर इसको दिखवाया जाएगा।
-संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी, पीलीभीत
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जरूरतमंदों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से बसपा शासनकाल में शुरू की गई कांशीराम आवास योजना के तहत यहां आठ करोड़ 10 लाख रुपयों की लागत से 300 कांशीराम आवास बनाए गए थे। इस दौरान नगर के आवासविहीन लोगों में उम्मीद जगी कि अब इस योजना में आवेदन करने पर उन्हें भी रहने के लिए आवास मिल जाएगा, लेकिन सत्ता बदलते ही जरूरतमंदों के सपने टूट गए।
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आवास आवंटन शुरू होता उससे पहले ही बसपा सरकार चली गई। उसके बाद भी पात्रों ने आस नहीं छोड़ी। वे लोग आवास प्राप्त करने के लिए संबंंधित अधिकारियों और राजनेताओं के चक्कर लगाते रहे। आवास उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद बरेली के माध्यम से बनाए गए थे। आवासीय कॉलोनी में कुछ कमियां थीं। सत्ता बदलते ही अधिकारियों ने इस कॉलोनी की ओर से ऐसा मुंह फेरा कि कॉलोनी की यह कमियां दूर नहीं हो पाईं। ऐसे में आवासों का आवंटन भी नहीं हो पाया।
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फिलहाल 13 वर्ष गुजर जाने के बाद आवास जर्जर होने लगे हैं तो अराजक तत्वों ने भी यहां अपना अड्डा बना लिया है। यह और बात है कि कॉलोनी में विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दो ट्रांसफार्मर लगे हैं तो सभी आवासों तक विद्युत लाइन के साथ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ओवरहेड टैंक भी है।
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इस कारण नहीं हो सका आवंटन
आवास आवंटन के लिए अधिकारियों की कमेटी गठित नहीं की गई तो इसके साथ ही नियमावली भी नहीं बनाई गई।
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लाभार्थियों के पालिका कार्यालय में जमा हैं आवेदन
पात्र लाभार्थियों के आवेदन पत्र काफी समय से नगरपालिका कार्यालय में जमा है। लाभार्थियों की पात्रता की जांच नगरपालिका और राजस्व विभाग के अधिकारियों के स्तर से हो चुकी है।
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लोगों का दर्द
काफी समय पहले पालिका कार्यालय में आवेदन जमा किया था। 25 सालों से मोहल्ला सराय के एक मकान में किराये पर रह रहे हैं। आवास मिलने की आस टूटने लगी है।
-रामआसरे लाल, मोहल्ला सराय
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पिछले 30 वर्षों से मोहल्ला दुर्गाप्रसाद में किराये के मकान में रहते हैं। आवेदन जांच में सही पाया गया था। आवास प्राप्त करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं।
-नंद किशोर, मोहल्ला दुर्गाप्रसाद
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पिछले 28 वर्षों से मोहल्ला दुबे में किराये के मकान में रह रही हूं। आवेदन पत्र जमा करते समय काफी उम्मीद थी। अब उम्मीद निराशा में बदल गई है।
-कमल कुमारी, मोहल्ला दुबे
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पिछले 17 वर्षों से अलग-अलग मोहल्लों में किराये के मकानों में रहते चले आ रहे हैं। सबसे पहले आवेदन किया था। आवास मिलना अब सिर्फ एक सपना बनकर रह गया है।
-राजीव गुप्ता, मोहल्ला बख्तावरलाल
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मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर इसको दिखवाया जाएगा।
-संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी, पीलीभीत

राजीव गुप्ता ।

राजीव गुप्ता ।

राजीव गुप्ता ।

राजीव गुप्ता ।