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पक्षपात पूर्ण रवैय्या अपना रही है सरकार: वसी
Updated Mon, 18 Sep 2017 03:07 PM IST
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पीलीभीत। आल इंडिया मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय अध्यक्ष वसी अहमद ने कहा कि अपराध और भ्रष्टाचार जैसे कई अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सूबे की सरकार धर्म विशेष के लोगों के साथ पक्षपात पूर्ण रवैया अपना कर मुस्लिमों का उनका उत्पीड़न कर रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आवास विकास स्थित एक आवास पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकारी सहायता से चलने वाले मदरसों की संख्या 560 है। जिनमें सरकार ने 46 मदरसों की सहायता को प्रतिबंधित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि सरकार 1290 मदरसों के संचालकों से 30 दिन में हिसाब मांग रही है। क्या यह सवाल नहीं उठता कि जो मदरसे सरकारी अनुदान प्राप्त ही नहीं करते वह हिसाब क्यों दें। उनका कहना था कि सरकार सिर्फ मदरसों को ही अनुदान नहीं देती, बल्कि गुरुद्वारा कमेटियों, संस्कृत संस्थानों, बौद्ध संस्थानों, शिशु मंदिरों, विद्या मंदिरों और विद्या भारती के स्कूलों को भी अनुदान देती है। इन संस्थानों से हिसाब क्यों नहीं लिया जा रहा।
उन्होंने रायन स्कूल में हुए हादसे पर कहा कि इस स्कूल का प्रबंधन 130 स्कूलों का संचालन कर रहा है, देश में सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं, क्या इन सबकी जांच कराया जाना जरूरी नहीं है। देश भर में चल रहे मठों, डेरों और धार्मिक संस्थाओं की भी जांच आवश्यक नहीं है, खास तौर पर तब, जब ऐसे संस्थानों से एके 47 की बरामदगी हुई हो। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ मुसलमानों से जुड़े संस्थानों की ही जांच क्यों ? क्या यह प्रताणित करने वाला कदम नहीं है।
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राष्ट्रीय सचिव मुस्तकीम अहमद मंसूरी ने कहा कि सरकार किसी वर्ग विशेष की नहीं होती, बल्कि सबकी होती है। मौजूदा सरकार के फैसले पक्षपात पूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि मुसलमानों का उत्पीड़न कर भय का वातावरण बनाया जा रहा है। असल मुद्दों से जनता का ध्यान हटाया जा रहा है, ताकि जनता यह न पूछ सके कि उत्तर प्रदेश अपराध मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश क्यों नहीं बन पाया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार गौशालाओं के संचालन के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट देती है। फिर गायें भूख और बीमारियों से क्यों मर रही हैं? इसके लिए भी तो जिम्मेदारी तय होना चाहिए। इसकी भी सीबीआई जांच होना चाहिए। उन्होंने बताया कि गाय की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ मुसलमानों का उत्पीड़न हो, यह न्याय तो नहीं है। प्रेस वार्ता में उत्तराखंड के प्रदेशाध्यक्ष मो. अशरफ, बरेली जिलाध्यक्ष डा. सरताज हुसैन अब्बासी, जिला महासचिव अतीक करम इदरीसी भी उपस्थित रहे। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर अनीस कुरैशी, सलमान मलिक, मो. आरिफ, दानिश फरीदी, अबरार अहमद, मो. आसिफ, मो. अलीम मंसूरी, हसन रजा आदि ने मजलिस के नेताओं का स्वागत किया।
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आवास विकास स्थित एक आवास पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकारी सहायता से चलने वाले मदरसों की संख्या 560 है। जिनमें सरकार ने 46 मदरसों की सहायता को प्रतिबंधित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि सरकार 1290 मदरसों के संचालकों से 30 दिन में हिसाब मांग रही है। क्या यह सवाल नहीं उठता कि जो मदरसे सरकारी अनुदान प्राप्त ही नहीं करते वह हिसाब क्यों दें। उनका कहना था कि सरकार सिर्फ मदरसों को ही अनुदान नहीं देती, बल्कि गुरुद्वारा कमेटियों, संस्कृत संस्थानों, बौद्ध संस्थानों, शिशु मंदिरों, विद्या मंदिरों और विद्या भारती के स्कूलों को भी अनुदान देती है। इन संस्थानों से हिसाब क्यों नहीं लिया जा रहा।
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उन्होंने रायन स्कूल में हुए हादसे पर कहा कि इस स्कूल का प्रबंधन 130 स्कूलों का संचालन कर रहा है, देश में सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं, क्या इन सबकी जांच कराया जाना जरूरी नहीं है। देश भर में चल रहे मठों, डेरों और धार्मिक संस्थाओं की भी जांच आवश्यक नहीं है, खास तौर पर तब, जब ऐसे संस्थानों से एके 47 की बरामदगी हुई हो। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ मुसलमानों से जुड़े संस्थानों की ही जांच क्यों ? क्या यह प्रताणित करने वाला कदम नहीं है।
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राष्ट्रीय सचिव मुस्तकीम अहमद मंसूरी ने कहा कि सरकार किसी वर्ग विशेष की नहीं होती, बल्कि सबकी होती है। मौजूदा सरकार के फैसले पक्षपात पूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि मुसलमानों का उत्पीड़न कर भय का वातावरण बनाया जा रहा है। असल मुद्दों से जनता का ध्यान हटाया जा रहा है, ताकि जनता यह न पूछ सके कि उत्तर प्रदेश अपराध मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश क्यों नहीं बन पाया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार गौशालाओं के संचालन के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट देती है। फिर गायें भूख और बीमारियों से क्यों मर रही हैं? इसके लिए भी तो जिम्मेदारी तय होना चाहिए। इसकी भी सीबीआई जांच होना चाहिए। उन्होंने बताया कि गाय की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ मुसलमानों का उत्पीड़न हो, यह न्याय तो नहीं है। प्रेस वार्ता में उत्तराखंड के प्रदेशाध्यक्ष मो. अशरफ, बरेली जिलाध्यक्ष डा. सरताज हुसैन अब्बासी, जिला महासचिव अतीक करम इदरीसी भी उपस्थित रहे। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर अनीस कुरैशी, सलमान मलिक, मो. आरिफ, दानिश फरीदी, अबरार अहमद, मो. आसिफ, मो. अलीम मंसूरी, हसन रजा आदि ने मजलिस के नेताओं का स्वागत किया।
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