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नवरात्र में 45 कन्याओं ने लिया जन्म
Updated Thu, 18 Oct 2018 07:00 PM IST
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नवरात्र में 45 कन्याओं ने लिया जन्म
जिला महिला अस्पताल में गूंजी 45 बच्चियों की किलकारी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलभीत। शारदीय नवरात्रों में जिला महिला अस्पताल में 45 कन्याओं का जन्म हुआ। माता रानी के खास दिनों में घर में कन्या के आगमन से परिजनों में खुशी का माहौल है। नवरात्र में घर-घर कन्याओं का पूजन किया जाता है। हर किसी को कन्या की जरूरत होती है। ऐसे में किसी घर में कन्या जन्म ले तो उसे देवी का अवतार माना जाता है।
शारदीय नवरात्र शुरू होते ही कई त्योहारों की आमद हो जाती है। इससे यह पर्व लोगों के लिए खास महत्व रखते हैं। नौ दिनों तक मंदिर के अलावा घरों में साफ-सफाई पर ध्यान रखने के साथ ही लोग व्रत रखते हैं। इन दिनों कन्याओं का विशेष महत्व होता है लोग कन्याओं को देवी का रुप मानकर पूजा करते हैं और उनको भोजन कराते हैं। महिला अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला है। शारदीय नवरात्र के दौरान 95 से अधिक प्रसूताओं की डिलवरी की गई। इस दौरान 45 घरों में मां कन्या के रुप में पैदा हुई। इनमें कुछ तो माता-पिता की पहले संतान थी तो कुछ भाइयों में सबसे छोटी बनकर आई। सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने कहा कि नवरात्र के दिनों में सभी को बेटी पैदा होनी की चाहत होती है। बेटी के पैदा होने पर हिंदू परिवार खुशियां मनाते हैं। प्रसूताओं की डिलीवरी के बाद अस्पताल में मिठाई का वितरण किया गया।
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जिला महिला अस्पताल में गूंजी 45 बच्चियों की किलकारी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलभीत। शारदीय नवरात्रों में जिला महिला अस्पताल में 45 कन्याओं का जन्म हुआ। माता रानी के खास दिनों में घर में कन्या के आगमन से परिजनों में खुशी का माहौल है। नवरात्र में घर-घर कन्याओं का पूजन किया जाता है। हर किसी को कन्या की जरूरत होती है। ऐसे में किसी घर में कन्या जन्म ले तो उसे देवी का अवतार माना जाता है।
शारदीय नवरात्र शुरू होते ही कई त्योहारों की आमद हो जाती है। इससे यह पर्व लोगों के लिए खास महत्व रखते हैं। नौ दिनों तक मंदिर के अलावा घरों में साफ-सफाई पर ध्यान रखने के साथ ही लोग व्रत रखते हैं। इन दिनों कन्याओं का विशेष महत्व होता है लोग कन्याओं को देवी का रुप मानकर पूजा करते हैं और उनको भोजन कराते हैं। महिला अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला है। शारदीय नवरात्र के दौरान 95 से अधिक प्रसूताओं की डिलवरी की गई। इस दौरान 45 घरों में मां कन्या के रुप में पैदा हुई। इनमें कुछ तो माता-पिता की पहले संतान थी तो कुछ भाइयों में सबसे छोटी बनकर आई। सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने कहा कि नवरात्र के दिनों में सभी को बेटी पैदा होनी की चाहत होती है। बेटी के पैदा होने पर हिंदू परिवार खुशियां मनाते हैं। प्रसूताओं की डिलीवरी के बाद अस्पताल में मिठाई का वितरण किया गया।
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