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उतम मार्दव तपस्या के द्वारा ही मनुष्य का कल्याण संभव ा
Updated Mon, 28 Aug 2017 01:28 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)। नगर स्थित भगवान दिगंबर जैन मंदिर और श्री शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर में दस लक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव विधान का आयोजन हुआ। इस दौरान ब्रह्मचारी अनमोल शास्त्री ने कहा तप ही मनुष्य महान बनता है।
नगर के छोटा बाजार स्थित श्री शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर और जैन कालेज मार्ग स्थित भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर के ज्ञान सागर सभागार में रविवार को दस लक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव विधान का आयोजन किया। इस मौके पर ब्रह्मचारी अनमोल शास्त्री ने कहा जिस प्रकार किसान अपने खेत में बीज बोने से पहले उसकी सफाई, निराई, गुड़ाई, जुताई के साथ खाद डालकर उसे उपजाऊ बनाता है। ठीक उसी प्रकार साधक को भी अपनी तप साधना को सफल बनाने के लिए अपने मन को भूमि की तरह ही शुद्ध करना चाहिए। इसमें संयम और आत्मबल का खाद देकर फलदायी बनाने का सदैव प्रयत्न करें। जैसे एक मरीज कितनी भी कीमती दवा का सेवन करें। यदि वह उसके साथ अपथ्य ग्रहण करता है, तो उत्तम से उत्तम दवा भी निष्प्रभावी हो जाती है। ठीक उसी प्रकार तपस्वी कितनी भी घोर तपस्या क्यों न कर लें। यदि उसके हृदय में कुछ अवगुण स्थान बना लें, तो उसकी तपस्या निरर्थक ही चली जाती है। इस दौरान संजय जैन, प्रवीण जैन, वीरेंद्र जैन, रीना जैन, उर्मिला जैन, नीलम जैन, शोभा जैन, बीना जैन, मधु, अजेश जैन, अंकुश जैन, मुनील जैन, नरेश चंद जैन आदि आदि रहे। रात्रि में शास्त्र वचन, सामूहिक आरती, प्रश्न मंच आदि का आयोजन किया।
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नगर के छोटा बाजार स्थित श्री शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर और जैन कालेज मार्ग स्थित भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर के ज्ञान सागर सभागार में रविवार को दस लक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव विधान का आयोजन किया। इस मौके पर ब्रह्मचारी अनमोल शास्त्री ने कहा जिस प्रकार किसान अपने खेत में बीज बोने से पहले उसकी सफाई, निराई, गुड़ाई, जुताई के साथ खाद डालकर उसे उपजाऊ बनाता है। ठीक उसी प्रकार साधक को भी अपनी तप साधना को सफल बनाने के लिए अपने मन को भूमि की तरह ही शुद्ध करना चाहिए। इसमें संयम और आत्मबल का खाद देकर फलदायी बनाने का सदैव प्रयत्न करें। जैसे एक मरीज कितनी भी कीमती दवा का सेवन करें। यदि वह उसके साथ अपथ्य ग्रहण करता है, तो उत्तम से उत्तम दवा भी निष्प्रभावी हो जाती है। ठीक उसी प्रकार तपस्वी कितनी भी घोर तपस्या क्यों न कर लें। यदि उसके हृदय में कुछ अवगुण स्थान बना लें, तो उसकी तपस्या निरर्थक ही चली जाती है। इस दौरान संजय जैन, प्रवीण जैन, वीरेंद्र जैन, रीना जैन, उर्मिला जैन, नीलम जैन, शोभा जैन, बीना जैन, मधु, अजेश जैन, अंकुश जैन, मुनील जैन, नरेश चंद जैन आदि आदि रहे। रात्रि में शास्त्र वचन, सामूहिक आरती, प्रश्न मंच आदि का आयोजन किया।
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