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अंतरिम बजट-2019: सबको साधने की कोशिश
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पीलीभीत। चुनावी साल को देखते हुए बजट से जैसी उम्मीद थी वही हुआ। मोदी सरकार द्वारा शुक्रवार को पेश किए अंतरिम बजट में वेतनभोगी, पेंशनर्स, छोटे व्यापारियों, किसान और मजदूरों को बड़ा तोहफा दिया गया है। व्यक्तिगत आयकर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दी गई है। किसानों को बड़ी राहत देते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की सौगात दी गई है। इस योजना से दो हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को आमदनी बढ़ाने के लिए हर साल छह हजार रुपये उनके खाते में डाले जाएंगे।
जिले के 2,11,582 किसान पाएंगे सम्मान निधि
मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले बजट के जरिए किसानों को खुश करने की पूरी कोशिश की है। उनके लिए 75 हजार करोड़ की किसान विकास सम्मान योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत छोटे किसान जिनके पास दो हेक्टेयर (लगभग पांच एकड़) तक जमीन है, उनके खाते में हर साल छह हजार रुपये जाएंगे। यह राशि तीन किस्तों में दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2,19,592 किसान हैं। इसमें सीमांत किसानों (एक हेक्टेयर वाले) की संख्या 1,89,680 लघु किसानों (एक से दो हेक्टेयर तक) की संख्या 21,902 और बड़े किसानों की संख्या 8010 हैं। ऐसे में इस योजना के माध्यम से जिले के 2,19,52 किसानों में से 2,11,582 किसान लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही 22 महत्वपूर्ण फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करने का फैसला भी किया गया है। मोदी सरकार की और से इसे किसानों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान है।
फैक्ट फाइल:
जिले में कुल किसान- 2,19,592
सीमांत किसान-1,89,680
लघु किसान-21,902
बड़े किसान-8010
केंद्र सरकार ने पांच एकड़ तक के किसानों को 6000 रुपये सालाना और समर्थन मूल्य बढ़ाने का जो फैसला लिया है, उसमें किसानों के बड़े वर्ग को बहुत फायदा मिलेगा। यदि ये रकम चुनाव से पहले मिले तो किसान और सरकार दोनों खुशहाल होंगे। - ओमकार कुशवाहा, किसान
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हर किसानों को प्रकृति की मार झेलनी पड़ती है। राहत के नाम पर छोटी रकम पकड़ा दी जाती है। मोदी सरकार ने जो छोटे किसानों को अनुदान देने की बात की है, उससे छोटे किसानों को खासा लाभ मिलेगा। -रोशन लाल, किसान
किसान लंबे अरसे से मुसीबतें झेलता आ रहा है। कभी बाढ़ तो कभी ओलावृष्टि से हर साल किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब सरकार सालाना छह हजार रुपये देगी तो इससे किसानों को अब कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी। - रामकुमार, किसान
पिछले कुछ सालों से खेती किसानी घाटे का सौदा साबित होता आ रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता था, लेकिन अब जो छह हजार रुपये सीधे किसानों के खाते में डाले जाएंगे उसका पूरा फायदा किसानों को ही मिलेगा। - रमनपाल सिंह, किसान
नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों को भी राहत
केंद्र सरकार ने अपने आखिरी बजट में छोटे करदाताओं को बड़ा तोहफा दिया है। अब 2.5 लाख के बजाय पांच लाख रुपये की आय तक पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। करीब 20 लाख की आबादी वाले इस जिले के नौकरीपेशा, छोटे व्यापारी, पेंशनर्स, वरिष्ठ नागरिकों समेत अन्य मध्यम वर्गीय लोगों को इसका खासा लाभ मिलेगा। बचत करने पर 6.5 लाख रुपये की सालाना आय पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया है। सरकार की इस घोषणा से मध्यम वर्गीय परिवारों में खुशी दिखाई दे रही है।
कुछ इस तरह मिलेगा टैक्स में छूट का फायदा:
आय/टैक्स/बचत
पांच लाख/00/00
छह लाख/20800/13000
सात लाख/41600/13000
10 लाख/104000/13000
15 लाख/260000/13000
बजट में आयकर छूट की सीमा दोगुनी की गई है। इससे नौकरीपेशा लोगों को खासी राहत मिलेगी। अभी तक ढाई लाख की इनकम पर टैक्स देने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च आदि में समस्याएं आड़े आ रहीं थीं। - सौरभ सक्सेना, लिपिक, बेसिक शिक्षा विभाग
आयकर सीमा में पांच लाख तक की सालाना इनकम पर जो टैक्स छूट मिली है, उससे छोटे व्यापारियों को खासा लाभ मिलेगा। बैंकों से अब बड़ा कर्ज लेने में आसानी होगी। - अमनदीप सिंह जौली, व्यापारी
पांच लाख की आय पर मिली टैक्स छूट सभी कर्मचारियों के लिए काफी राहत देगी। फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज को दस हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये किया गया है। एक हजार से चार हजार टीडीएस नहीं कटेगा। इससे कर्मचारियों और आम जनता को फायदा मिलेगा।
- सौरभ गंगवार, अध्यक्ष, यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन
महिलाओं द्वारा 40 हजार तक का कर्ज लेने पर उन्हें ब्याज नहीं देना होगा। आयकर सीमा में छूट दोगुनी की गई है। ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ाकर के 20 लाख किया है। इससे सभी को लाभ मिलेगा। घर का बजट भी दुरुस्त हो सकेगा। - पारुल जैन, शिक्षिका
विशेषज्ञों की राय:
केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाले अंतरिम बजट को लेकर जो उम्मीद की जा रही थी, वहीं हुआ। छोटे किसानों को सालाना छह हजार रुपये देने की बात की जा रही है। इस हिसाब से किसान को प्रतिमाह 500 रुपये ही मिलेंगे। जबकि महंगाई बढ़ती जा रही है। आयकर सीमा में छूट को फायदा उच्च वेतनभोगियों को नहीं मिलेगा। चुनाव पूर्व अंतरिम बजट देश की एक बड़ी आबादी तक पहुंचने का रास्ता मात्र है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ये एक चुनावी बजट ही है। - डॉ. विनय गुप्ता, अर्थशास्त्री
देश की अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
अंतरिम बजट का मुख्य केंद्र किसान और मध्यम वर्ग रहा। टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर इसका सीधा लाभ मध्यम वर्ग व नौकरीपेशा लोगों को देने की कोशिश की गई। आयकर विभाग और करदाताओं के बीच पारदर्शिता लाने को आने वाले दो सालों के अंदर सभी रिटर्न और नोटिस की जांच ऑनलाइन की जाएगी। मौजूदा सरकार द्वारा इकोनॉमी को सरल और पारदर्शी करने के लिए कुछ बड़े टैक्स रिफार्म किए गए। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती ही मिलेगी। - शुभम गुप्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट
अस्थायी रूप से दी गई सुविधाएं देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत नहीं कर सकतीं। बजट में किसानों की स्थिति में कोई ऐसी बेसिक नीति नहीं है, जिससे उनके भविष्य में सुधार हो। पांच लाख तक आय करमुक्त करने की बात कही गई, लेकिन देश में कितने लोगों की आय पांच लाख है? ये बजट आर्थिक सुधारों वाला नहीं बल्कि वोटर को साधने की कोशिश भर है। - दानिश खां, टैक्स वकील, पूर्व अध्यक्ष, प्रोग्रेसिव बार एसोसिएशन
विरोधियों ने बताया धोखेबाजों का बजट
भाजपा बोली- हर वर्ग का रखा है ध्यान
सरकार ने अंतरिम बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा है। जिसमें देश व हर वर्ग के व्यक्ति का विकास शामिल है। बजट में किसानों, मजदूरों व मध्यम वर्ग को विशेष प्राथमिकता दी गई है। - राकेश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, भाजपा
जुमलेबाज सरकार का जुमलाई बजट
सरकार ने जो बजट पास किया है। वह पूर्णतया राजनीतिक है। बजट में किसी तरह से आम आदमी को राहत नहीं दी गई है। टैक्स पर भी सरकार ने कोई बड़ी राहत नहीं दी है। यह जुमलेबाज सरकार का जुमलाई बजट है। - चंद्रशेखर आजाद, जिलाध्यक्ष, बीएसपी
राहत नहीं, सभी को मिली निराशा
केंद्र सरकार का बजट मोदी जी की जुमलेबाजी की तरह सबित हुआ। बजट में छात्रों, अल्पसंख्यक, किसानों, आदिवासी समेत किसी भी वर्ग के लिए कुछ राहत नहीं है। जनता को कर्ज माफी, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ बेहतर होने की आस थी, लेकिन बजट ने सबको निराश कर दिया। - हरप्रीत सिंह चब्बा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
धोखेबाज सरकार का धोखेबाज बजट
देश की मोदी सरकार ने देशवासियों से बड़े-बड़े वायदे किए थे, इसकी पोल अब खुलती जा रही है। जनधन योजना के खातों में रकम भेजे की बात कही जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ मिलाकर यह धोखेबाज सरकार का धोखेबाज बजट है। - आनंद सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
जिले के 2,11,582 किसान पाएंगे सम्मान निधि
मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले बजट के जरिए किसानों को खुश करने की पूरी कोशिश की है। उनके लिए 75 हजार करोड़ की किसान विकास सम्मान योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत छोटे किसान जिनके पास दो हेक्टेयर (लगभग पांच एकड़) तक जमीन है, उनके खाते में हर साल छह हजार रुपये जाएंगे। यह राशि तीन किस्तों में दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2,19,592 किसान हैं। इसमें सीमांत किसानों (एक हेक्टेयर वाले) की संख्या 1,89,680 लघु किसानों (एक से दो हेक्टेयर तक) की संख्या 21,902 और बड़े किसानों की संख्या 8010 हैं। ऐसे में इस योजना के माध्यम से जिले के 2,19,52 किसानों में से 2,11,582 किसान लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही 22 महत्वपूर्ण फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करने का फैसला भी किया गया है। मोदी सरकार की और से इसे किसानों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान है।
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जिले में कुल किसान- 2,19,592
सीमांत किसान-1,89,680
लघु किसान-21,902
बड़े किसान-8010
केंद्र सरकार ने पांच एकड़ तक के किसानों को 6000 रुपये सालाना और समर्थन मूल्य बढ़ाने का जो फैसला लिया है, उसमें किसानों के बड़े वर्ग को बहुत फायदा मिलेगा। यदि ये रकम चुनाव से पहले मिले तो किसान और सरकार दोनों खुशहाल होंगे। - ओमकार कुशवाहा, किसान
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हर किसानों को प्रकृति की मार झेलनी पड़ती है। राहत के नाम पर छोटी रकम पकड़ा दी जाती है। मोदी सरकार ने जो छोटे किसानों को अनुदान देने की बात की है, उससे छोटे किसानों को खासा लाभ मिलेगा। -रोशन लाल, किसान
किसान लंबे अरसे से मुसीबतें झेलता आ रहा है। कभी बाढ़ तो कभी ओलावृष्टि से हर साल किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब सरकार सालाना छह हजार रुपये देगी तो इससे किसानों को अब कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी। - रामकुमार, किसान
पिछले कुछ सालों से खेती किसानी घाटे का सौदा साबित होता आ रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता था, लेकिन अब जो छह हजार रुपये सीधे किसानों के खाते में डाले जाएंगे उसका पूरा फायदा किसानों को ही मिलेगा। - रमनपाल सिंह, किसान
नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों को भी राहत
केंद्र सरकार ने अपने आखिरी बजट में छोटे करदाताओं को बड़ा तोहफा दिया है। अब 2.5 लाख के बजाय पांच लाख रुपये की आय तक पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। करीब 20 लाख की आबादी वाले इस जिले के नौकरीपेशा, छोटे व्यापारी, पेंशनर्स, वरिष्ठ नागरिकों समेत अन्य मध्यम वर्गीय लोगों को इसका खासा लाभ मिलेगा। बचत करने पर 6.5 लाख रुपये की सालाना आय पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया है। सरकार की इस घोषणा से मध्यम वर्गीय परिवारों में खुशी दिखाई दे रही है।
कुछ इस तरह मिलेगा टैक्स में छूट का फायदा:
आय/टैक्स/बचत
पांच लाख/00/00
छह लाख/20800/13000
सात लाख/41600/13000
10 लाख/104000/13000
15 लाख/260000/13000
बजट में आयकर छूट की सीमा दोगुनी की गई है। इससे नौकरीपेशा लोगों को खासी राहत मिलेगी। अभी तक ढाई लाख की इनकम पर टैक्स देने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च आदि में समस्याएं आड़े आ रहीं थीं। - सौरभ सक्सेना, लिपिक, बेसिक शिक्षा विभाग
आयकर सीमा में पांच लाख तक की सालाना इनकम पर जो टैक्स छूट मिली है, उससे छोटे व्यापारियों को खासा लाभ मिलेगा। बैंकों से अब बड़ा कर्ज लेने में आसानी होगी। - अमनदीप सिंह जौली, व्यापारी
पांच लाख की आय पर मिली टैक्स छूट सभी कर्मचारियों के लिए काफी राहत देगी। फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज को दस हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये किया गया है। एक हजार से चार हजार टीडीएस नहीं कटेगा। इससे कर्मचारियों और आम जनता को फायदा मिलेगा।
- सौरभ गंगवार, अध्यक्ष, यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन
महिलाओं द्वारा 40 हजार तक का कर्ज लेने पर उन्हें ब्याज नहीं देना होगा। आयकर सीमा में छूट दोगुनी की गई है। ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ाकर के 20 लाख किया है। इससे सभी को लाभ मिलेगा। घर का बजट भी दुरुस्त हो सकेगा। - पारुल जैन, शिक्षिका
विशेषज्ञों की राय:
केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाले अंतरिम बजट को लेकर जो उम्मीद की जा रही थी, वहीं हुआ। छोटे किसानों को सालाना छह हजार रुपये देने की बात की जा रही है। इस हिसाब से किसान को प्रतिमाह 500 रुपये ही मिलेंगे। जबकि महंगाई बढ़ती जा रही है। आयकर सीमा में छूट को फायदा उच्च वेतनभोगियों को नहीं मिलेगा। चुनाव पूर्व अंतरिम बजट देश की एक बड़ी आबादी तक पहुंचने का रास्ता मात्र है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ये एक चुनावी बजट ही है। - डॉ. विनय गुप्ता, अर्थशास्त्री
देश की अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
अंतरिम बजट का मुख्य केंद्र किसान और मध्यम वर्ग रहा। टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर इसका सीधा लाभ मध्यम वर्ग व नौकरीपेशा लोगों को देने की कोशिश की गई। आयकर विभाग और करदाताओं के बीच पारदर्शिता लाने को आने वाले दो सालों के अंदर सभी रिटर्न और नोटिस की जांच ऑनलाइन की जाएगी। मौजूदा सरकार द्वारा इकोनॉमी को सरल और पारदर्शी करने के लिए कुछ बड़े टैक्स रिफार्म किए गए। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती ही मिलेगी। - शुभम गुप्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट
अस्थायी रूप से दी गई सुविधाएं देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत नहीं कर सकतीं। बजट में किसानों की स्थिति में कोई ऐसी बेसिक नीति नहीं है, जिससे उनके भविष्य में सुधार हो। पांच लाख तक आय करमुक्त करने की बात कही गई, लेकिन देश में कितने लोगों की आय पांच लाख है? ये बजट आर्थिक सुधारों वाला नहीं बल्कि वोटर को साधने की कोशिश भर है। - दानिश खां, टैक्स वकील, पूर्व अध्यक्ष, प्रोग्रेसिव बार एसोसिएशन
विरोधियों ने बताया धोखेबाजों का बजट
भाजपा बोली- हर वर्ग का रखा है ध्यान
सरकार ने अंतरिम बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा है। जिसमें देश व हर वर्ग के व्यक्ति का विकास शामिल है। बजट में किसानों, मजदूरों व मध्यम वर्ग को विशेष प्राथमिकता दी गई है। - राकेश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, भाजपा
जुमलेबाज सरकार का जुमलाई बजट
सरकार ने जो बजट पास किया है। वह पूर्णतया राजनीतिक है। बजट में किसी तरह से आम आदमी को राहत नहीं दी गई है। टैक्स पर भी सरकार ने कोई बड़ी राहत नहीं दी है। यह जुमलेबाज सरकार का जुमलाई बजट है। - चंद्रशेखर आजाद, जिलाध्यक्ष, बीएसपी
राहत नहीं, सभी को मिली निराशा
केंद्र सरकार का बजट मोदी जी की जुमलेबाजी की तरह सबित हुआ। बजट में छात्रों, अल्पसंख्यक, किसानों, आदिवासी समेत किसी भी वर्ग के लिए कुछ राहत नहीं है। जनता को कर्ज माफी, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ बेहतर होने की आस थी, लेकिन बजट ने सबको निराश कर दिया। - हरप्रीत सिंह चब्बा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
धोखेबाज सरकार का धोखेबाज बजट
देश की मोदी सरकार ने देशवासियों से बड़े-बड़े वायदे किए थे, इसकी पोल अब खुलती जा रही है। जनधन योजना के खातों में रकम भेजे की बात कही जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ मिलाकर यह धोखेबाज सरकार का धोखेबाज बजट है। - आनंद सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, सपा