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अमरिया में नीलगाय, गजरौला में सांड को बाघ ने बनाया निवाला
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बढ़ती सक्रियता देख किसानों में दहशत
वनकर्मियों ने मौका मुआयना कर पगचिह्न किए ट्रेस
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के जंगल के बाहर निकलकर कई सालों से हमलावर हो रहे बाघों का कोई इंतजाम नहीं किया जा सका है। आबादी के नजदीक उनका दिखाई देना लगातार जारी है। शुक्रवार को भी बाघ ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया। अमरिया क्षेत्र के निवाड़ एठपुर गांव में नीलगाय और गजरौला क्षेत्र में सांड़ को बाघ का निवाला बना। इसकी सूचना मिलने पर पहुंची निगरानी टीमों ने जानकारी जुटाई। घटनाओं के बाद से ग्रामीण दहशतजदा हैं।
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केस एक: अमरिया में हमला
अमरिया/मझोला। निवाड़ एठपुर गांव निवासी कुलदीप सिंह के खेत पर शुक्रवार को नीलगाय पर बाघ ने हमला बोल दिया। आसपास के खेतों पर काम कर रहे मजदूरों की बाघ पर नजर पड़ी तो उनके होश उड़ गए। बाघ नीलगाय को मारने के बाद खींचकर पास के खेत में ले गया। इसके बाद शोर पर बाघ चला गया। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। इस वन दरोगा अवनेश कुमार, शीलेंद्र कुमार, टीकाराम, नवी शेर, राजेश कुमार व पुलिस विभाग से एसआई अवधेश कुमार मौके पर पहुंच गए। वनकर्मियों ने नीलगाय का शव दफन कराया। वन दरोगा अवनेश कुमार ने बताया कि बाघ के पगचिह्न खेत में घास और झाड़ियां अधिक होने के कारण ट्रेस नहीं हो सके हैं। टीम निगरानी में लगी हैं। ग्रामीणों को भी अलर्ट कर दिया गया है। इसके अलावा सूरजपुर फार्म की सीमा में भी बाघ के पगचिह्न मिले हैं। फार्म स्वामी परमवीर सिंह से सूचना मिलने पर वनकर्मियों की निगरानी टीम मौके पर पहुंची और जानकारी जुटाई।
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केस दो: गजरौला में हमला
गजरौला। शुक्रवार को क्षेत्र के विधिपुर गांव की सीमा में पहुंचे बाघ ने आवारा घूम रहे सांड़ पर हमला कर निवाला बना लिया। सांड़ का शोर सुनकर पड़ोस के कुंवरसेन के खेत में गन्ने की छिलाई कर रहे सियाराम, कांता प्रसाद, छोटे लाल सहित आधा दर्जन मजदूर बाहर आए। उन्होंने बाघ को देखा तो पसीने छूट गए। वह वहां से चीखते चिल्लाते भाग खड़े हुए। इसकी सूचना मिलने पर वन कर्मियों ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई। माला रेंज के जंगल से सटे इस इलाके में घटना के बाद से दहशत बनी हुई है। इसके अलावा क्षेत्र के बिनौर फार्म की सीमा क्षेत्र में भी बाघ ने दस्तक दी। फसल देखने खेत पर जा रहे गांव निवासी तेज बहादुर, अमृत सिंह, वीरेंद्र सिंह ने फसल के बीच बाघ के पगचिह्न देखे तो पसीने छूट गए। हालांकि ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को नहीं दी।
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वनकर्मियों ने मौका मुआयना कर पगचिह्न किए ट्रेस
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के जंगल के बाहर निकलकर कई सालों से हमलावर हो रहे बाघों का कोई इंतजाम नहीं किया जा सका है। आबादी के नजदीक उनका दिखाई देना लगातार जारी है। शुक्रवार को भी बाघ ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया। अमरिया क्षेत्र के निवाड़ एठपुर गांव में नीलगाय और गजरौला क्षेत्र में सांड़ को बाघ का निवाला बना। इसकी सूचना मिलने पर पहुंची निगरानी टीमों ने जानकारी जुटाई। घटनाओं के बाद से ग्रामीण दहशतजदा हैं।
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केस एक: अमरिया में हमला
अमरिया/मझोला। निवाड़ एठपुर गांव निवासी कुलदीप सिंह के खेत पर शुक्रवार को नीलगाय पर बाघ ने हमला बोल दिया। आसपास के खेतों पर काम कर रहे मजदूरों की बाघ पर नजर पड़ी तो उनके होश उड़ गए। बाघ नीलगाय को मारने के बाद खींचकर पास के खेत में ले गया। इसके बाद शोर पर बाघ चला गया। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। इस वन दरोगा अवनेश कुमार, शीलेंद्र कुमार, टीकाराम, नवी शेर, राजेश कुमार व पुलिस विभाग से एसआई अवधेश कुमार मौके पर पहुंच गए। वनकर्मियों ने नीलगाय का शव दफन कराया। वन दरोगा अवनेश कुमार ने बताया कि बाघ के पगचिह्न खेत में घास और झाड़ियां अधिक होने के कारण ट्रेस नहीं हो सके हैं। टीम निगरानी में लगी हैं। ग्रामीणों को भी अलर्ट कर दिया गया है। इसके अलावा सूरजपुर फार्म की सीमा में भी बाघ के पगचिह्न मिले हैं। फार्म स्वामी परमवीर सिंह से सूचना मिलने पर वनकर्मियों की निगरानी टीम मौके पर पहुंची और जानकारी जुटाई।
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केस दो: गजरौला में हमला
गजरौला। शुक्रवार को क्षेत्र के विधिपुर गांव की सीमा में पहुंचे बाघ ने आवारा घूम रहे सांड़ पर हमला कर निवाला बना लिया। सांड़ का शोर सुनकर पड़ोस के कुंवरसेन के खेत में गन्ने की छिलाई कर रहे सियाराम, कांता प्रसाद, छोटे लाल सहित आधा दर्जन मजदूर बाहर आए। उन्होंने बाघ को देखा तो पसीने छूट गए। वह वहां से चीखते चिल्लाते भाग खड़े हुए। इसकी सूचना मिलने पर वन कर्मियों ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई। माला रेंज के जंगल से सटे इस इलाके में घटना के बाद से दहशत बनी हुई है। इसके अलावा क्षेत्र के बिनौर फार्म की सीमा क्षेत्र में भी बाघ ने दस्तक दी। फसल देखने खेत पर जा रहे गांव निवासी तेज बहादुर, अमृत सिंह, वीरेंद्र सिंह ने फसल के बीच बाघ के पगचिह्न देखे तो पसीने छूट गए। हालांकि ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को नहीं दी।
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