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भुलाए नहीं भूलते कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:05 AM IST
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भुलाए नहीं भूलते कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा
कारगिल में 19 साल पहले हुए थे शहीद
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। सिख रेजीमेंट के हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा को कारगिल में शहीद हुए 19 साल बीत गए। शहीद का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। शहीद के परिजन फौज की देश सेवा को ही सच्ची देशभक्ति व सेवा मानते हैं। शहीद के बच्चों के फौज में भर्ती के प्रयास हुए, लेकिन वे बाद में घर लौट आए।
तहसील क्षेत्र के गांव हरीपुर में चार जनवरी 1961 को उलागर सिंह के घर जन्मे शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की तमन्ना शुरू से ही फौज में भर्ती होकर देश सेवा करने की थी। 18 अगस्त 1988 को वे सेना में भर्ती हुए। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने को उनकी तैनाती आपरेशन विजय के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में हुई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेड़ हुईं। इस दौरान 29 मई 1999 को वे वतन की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल सहित कई मेडलों से पुरस्कृत किया गया। सरकार ने शहीद परिवार को कृषि भूमि के अलावा आश्रितों को पेट्रोल पंप आवंटित किया। दिल्ली में रहने को एक फ्लैट दिया गया। उनके पुत्र सुखविंदर सिंह का निधन वर्ष 2007 में कश्मीर जाते समय रास्ते में ट्रेन से गिरकर हो गया। परिवार में पत्नी गुरमीत कौर के अलावा पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा सतनाम कौर, सतनाम कौर दस वर्षीय पुत्र गुरुप्रीत सिंह, नौ वर्षीय पुत्री वीरेंद्र कौर, शहीद का दूसरा पुत्र रेशम सिंह, उसकी पत्नी अतेंद्र कौर, छह वर्षीय पुत्री जसवीर कौर, तीन वर्षीय पुत्र अभिजीत सिंह और शहीद की पुत्री पलविंदर कौर है। पलविंदर कौर अविवाहित है।
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पुत्रों को सेना में भर्ती कराने की ख्वाहिश रही अधूरी
शहीद सुरेंद्र सिंह की ख्वाहिश दोनों पुत्रों को सेना में भर्ती कराने की थी। उनके परिवार के लोग भी पुत्रों को सेना में भर्ती करवाना चाहते थे। बकौल परिजन: कुछ साल पहले सेना के अफसर घर आए और उनके दोनों छोटे-छोटे पुत्रों को साथ ले गए। सैनिक स्कूल में बेटों का दाखिला भी कराया गया, लेकिन कुछ दिन बाद दोनों बेटे घर को लौट आए।
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गरीबों को कराया जाता है भोज
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की बरसी पर आज भी उनकी पत्नी गुरमीत कौर की आंखे नम हो जाती हैं। पूरे दिन खाना पीना तक नहीं खाती। बरसी पर शहीद के पसंदीदा भोज को तैयार करवाकर रिश्तेदारों के अलावा करीबियों को भोज कराया जाता है। गरीबों को भी भोज बांटा जाता है।
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बदहाल हो गई शहीद स्मृति वाटिका
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की याद में सामाजिक वानिकी ने नगर के प्रवेश द्वार पर जिला पंचायत की भूमि पर स्मृति वाटिका बनाई थी। स्मृति वाटिका में फल, फूल के पौधे लगाए गए। चारों ओर से कटीले तारों की बाड़ की गई और गेट बनवाया गया। पौधों की सिंचाई को हैंडपंप लगवाया गया। वाटिका देखरेख के अभाव में अब बदहाल है। स्मृति वाटिका झाड़ी का रूप ले चुकी है। असम हाइवे चौड़ीकरण को लेकर वाटिका के कई वृक्षों को भी काट दिया गया।
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नानू फौजी समाजोत्थान समिति ने कारगिल शहीद के परिजनों को किया सम्मानित
विद्यार्थियों ने मोमबत्ती जलाकर शहीदों को किया नमन
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। कारगिल विजय दिवस पर नानू फौजी समाजोत्थान समिति द्वारा कारगिल शहीद के परिवार वालों को सम्मानित किया गया। शहर के स्काउट भवन में बृहस्पतिवार को हुए कार्यक्रम में कारगिल शहीद हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा की पत्नी गुरमीत कौर को दोशाला ओढ़ाकर व तिरंगा भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं रिटायर्ड जवानों को तिरंगा भेंटकर देश हित में उनके द्वारा किए गए कार्यों का बखान किया गया। इस दौरान नानू फौजी ने कारगिल युद्ध में भारतीय फौज की साहसिक कार्रवाई के बारे में बताया गया। कहा कि समिति द्वारा सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए सैन्य सेवा भर्ती अभियान व नि:शुल्क फिजीकल तैयारी करवाई जाती है। नानू फौजी ने बताया कि जो भी धनराशि उन्हें उपहार के तौर पर मिलती है। उसी धनराशि का उपयोग युवाओं में देशभक्ति का जज्बा पैदा करने व भारतीय सेना का प्रचार करने के उपयोग में लाई जाती है। इधर शाम को नानू फौजी समेत समिति सदस्यों ने शहीद दामोदार दास पार्क पहुंचकर शहीदों को श्रृद्धाजंलि दी। मुख्य अतिथि व एसएसबी इंसपेक्टर देवेंद्र सिंह ने भी विचार रखे। इधर ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल में भी कारगिल विजय दिवस मनाया गया। प्रबंधक देवेंद्र सिंह छाबड़ा, पूजा छाबड़ा व प्रधानाचार्य मतलूब अहमद ने शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। विद्यार्थियों ने मोमबत्ती जलाकर शहीदों का नमन किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने ललौरीखेड़ा स्थित एसएसबी कमांडेंट कार्यालय पहुंचकर देशभक्ति पर आधारित नाटक का मंचन समेत कई अन्य कार्यकम पेश किए। कमांडेंट दिलबाग सिंह, डिप्टी कमांडेंट सुशील कुमार रावत ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
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भुलाए नहीं भूलते कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा
कारगिल में 19 साल पहले हुए थे शहीद
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। सिख रेजीमेंट के हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा को कारगिल में शहीद हुए 19 साल बीत गए। शहीद का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। शहीद के परिजन फौज की देश सेवा को ही सच्ची देशभक्ति व सेवा मानते हैं। शहीद के बच्चों के फौज में भर्ती के प्रयास हुए, लेकिन वे बाद में घर लौट आए।
तहसील क्षेत्र के गांव हरीपुर में चार जनवरी 1961 को उलागर सिंह के घर जन्मे शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की तमन्ना शुरू से ही फौज में भर्ती होकर देश सेवा करने की थी। 18 अगस्त 1988 को वे सेना में भर्ती हुए। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने को उनकी तैनाती आपरेशन विजय के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में हुई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेड़ हुईं। इस दौरान 29 मई 1999 को वे वतन की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल सहित कई मेडलों से पुरस्कृत किया गया। सरकार ने शहीद परिवार को कृषि भूमि के अलावा आश्रितों को पेट्रोल पंप आवंटित किया। दिल्ली में रहने को एक फ्लैट दिया गया। उनके पुत्र सुखविंदर सिंह का निधन वर्ष 2007 में कश्मीर जाते समय रास्ते में ट्रेन से गिरकर हो गया। परिवार में पत्नी गुरमीत कौर के अलावा पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा सतनाम कौर, सतनाम कौर दस वर्षीय पुत्र गुरुप्रीत सिंह, नौ वर्षीय पुत्री वीरेंद्र कौर, शहीद का दूसरा पुत्र रेशम सिंह, उसकी पत्नी अतेंद्र कौर, छह वर्षीय पुत्री जसवीर कौर, तीन वर्षीय पुत्र अभिजीत सिंह और शहीद की पुत्री पलविंदर कौर है। पलविंदर कौर अविवाहित है।
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पुत्रों को सेना में भर्ती कराने की ख्वाहिश रही अधूरी
शहीद सुरेंद्र सिंह की ख्वाहिश दोनों पुत्रों को सेना में भर्ती कराने की थी। उनके परिवार के लोग भी पुत्रों को सेना में भर्ती करवाना चाहते थे। बकौल परिजन: कुछ साल पहले सेना के अफसर घर आए और उनके दोनों छोटे-छोटे पुत्रों को साथ ले गए। सैनिक स्कूल में बेटों का दाखिला भी कराया गया, लेकिन कुछ दिन बाद दोनों बेटे घर को लौट आए।
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गरीबों को कराया जाता है भोज
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की बरसी पर आज भी उनकी पत्नी गुरमीत कौर की आंखे नम हो जाती हैं। पूरे दिन खाना पीना तक नहीं खाती। बरसी पर शहीद के पसंदीदा भोज को तैयार करवाकर रिश्तेदारों के अलावा करीबियों को भोज कराया जाता है। गरीबों को भी भोज बांटा जाता है।
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बदहाल हो गई शहीद स्मृति वाटिका
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की याद में सामाजिक वानिकी ने नगर के प्रवेश द्वार पर जिला पंचायत की भूमि पर स्मृति वाटिका बनाई थी। स्मृति वाटिका में फल, फूल के पौधे लगाए गए। चारों ओर से कटीले तारों की बाड़ की गई और गेट बनवाया गया। पौधों की सिंचाई को हैंडपंप लगवाया गया। वाटिका देखरेख के अभाव में अब बदहाल है। स्मृति वाटिका झाड़ी का रूप ले चुकी है। असम हाइवे चौड़ीकरण को लेकर वाटिका के कई वृक्षों को भी काट दिया गया।
26 पीबीटीपी 1, 2, 3
नानू फौजी समाजोत्थान समिति ने कारगिल शहीद के परिजनों को किया सम्मानित
विद्यार्थियों ने मोमबत्ती जलाकर शहीदों को किया नमन
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। कारगिल विजय दिवस पर नानू फौजी समाजोत्थान समिति द्वारा कारगिल शहीद के परिवार वालों को सम्मानित किया गया। शहर के स्काउट भवन में बृहस्पतिवार को हुए कार्यक्रम में कारगिल शहीद हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा की पत्नी गुरमीत कौर को दोशाला ओढ़ाकर व तिरंगा भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं रिटायर्ड जवानों को तिरंगा भेंटकर देश हित में उनके द्वारा किए गए कार्यों का बखान किया गया। इस दौरान नानू फौजी ने कारगिल युद्ध में भारतीय फौज की साहसिक कार्रवाई के बारे में बताया गया। कहा कि समिति द्वारा सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए सैन्य सेवा भर्ती अभियान व नि:शुल्क फिजीकल तैयारी करवाई जाती है। नानू फौजी ने बताया कि जो भी धनराशि उन्हें उपहार के तौर पर मिलती है। उसी धनराशि का उपयोग युवाओं में देशभक्ति का जज्बा पैदा करने व भारतीय सेना का प्रचार करने के उपयोग में लाई जाती है। इधर शाम को नानू फौजी समेत समिति सदस्यों ने शहीद दामोदार दास पार्क पहुंचकर शहीदों को श्रृद्धाजंलि दी। मुख्य अतिथि व एसएसबी इंसपेक्टर देवेंद्र सिंह ने भी विचार रखे। इधर ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल में भी कारगिल विजय दिवस मनाया गया। प्रबंधक देवेंद्र सिंह छाबड़ा, पूजा छाबड़ा व प्रधानाचार्य मतलूब अहमद ने शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। विद्यार्थियों ने मोमबत्ती जलाकर शहीदों का नमन किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने ललौरीखेड़ा स्थित एसएसबी कमांडेंट कार्यालय पहुंचकर देशभक्ति पर आधारित नाटक का मंचन समेत कई अन्य कार्यकम पेश किए। कमांडेंट दिलबाग सिंह, डिप्टी कमांडेंट सुशील कुमार रावत ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।