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सप्ताह में सिर्फ एक दिन खुलता खनंका अस्पताल 15-35-42
Updated Sun, 31 Dec 2017 11:50 PM IST
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अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
बोले जिला होम्योपैथिक अधिकारी, डॉक्टर, कर्मचारियों की है कमी
बीसलपुर। विभागीय उच्चाधिकारियों की अनदेखी के चलते गांव खनंका के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में पिछले सात वर्षों से नियमित स्टाफ के नाम पर कोई भी नहीं है। कनाकोर अस्पताल का एक कर्मचारी इस अस्पताल को सप्ताह में एक दिन खोलता है।
गांव खनंका के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र राजपूत का तबादला वर्ष 2010 में जालौन हो गया था। उन्हें कार्यमुक्त तो उसी समय कर दिया गया था, लेकिन अभी तक उनके स्थान पर किसी नए चिकित्साधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। अस्पताल में फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, चौकीदार और चपरासी के पद पहले से ही रिक्त हैं। विभाग ने काम चलाऊ व्यवस्था के क्रम में राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल कनाकोर के फार्मासिस्ट पुष्कर कुमार को इस अस्पताल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। पुष्कर के पास कुछ अन्य अस्पतालों का भी कार्यभार है। पुष्कर इस अस्पताल में अपनी सुविधा के हिसाब से सप्ताह में केवल एक दिन आते हैं। अन्य दिन अस्पताल बंद रहता है। इससे मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है। रोजाना बहुत मरीज दवा लेने के लिए अस्पताल आते हैं और घंटों भटकने के बाद मायूस होकर लौट जाते हैं। इस बीच जागरूक लोगों ने विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर कई बार आकर्षित कराकर इस अस्पताल में मानक के अनुरूप स्टाफ तैनात कराने की मांग की। विभागीय उच्चाधिकारियों ने मांग पूरी करने आश्वासन तो दिया लेकिन अभी तक मांगें पूरी नहीं की गई। अधिकारियों की इस वादा खिलाफी से क्षेत्र के लोगों में रोष है। इस बाबत जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. आरके चौहान ने बताया कि विभाग के पास डाक्टरों और अन्य कर्मचारियों की काफी कमी है। उपलब्धता होते ही इस अस्पताल में मानक के अनुरूप स्टाफ तैनात कर दिया जाएगा।
इन गांवों के मरीजों को हो रही है दिक्कत-
राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल खनंका में डॉक्टर और कर्मचारी न होने से खनंका के अलावा रोहनिया, अहिरपुरा नगला, चठिया सेवाराम, भदारा, भदारी, अदिलाबाद, करनपुर लायकराम, लुहिचा, पुरैना, हरूनगला, जसकनापुर, भोगापुर, नीवाडांडी, धीमरपुरा और रायपुर आदि गांवों के मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
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बीसलपुर। विभागीय उच्चाधिकारियों की अनदेखी के चलते गांव खनंका के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में पिछले सात वर्षों से नियमित स्टाफ के नाम पर कोई भी नहीं है। कनाकोर अस्पताल का एक कर्मचारी इस अस्पताल को सप्ताह में एक दिन खोलता है।
गांव खनंका के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र राजपूत का तबादला वर्ष 2010 में जालौन हो गया था। उन्हें कार्यमुक्त तो उसी समय कर दिया गया था, लेकिन अभी तक उनके स्थान पर किसी नए चिकित्साधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। अस्पताल में फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, चौकीदार और चपरासी के पद पहले से ही रिक्त हैं। विभाग ने काम चलाऊ व्यवस्था के क्रम में राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल कनाकोर के फार्मासिस्ट पुष्कर कुमार को इस अस्पताल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। पुष्कर के पास कुछ अन्य अस्पतालों का भी कार्यभार है। पुष्कर इस अस्पताल में अपनी सुविधा के हिसाब से सप्ताह में केवल एक दिन आते हैं। अन्य दिन अस्पताल बंद रहता है। इससे मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है। रोजाना बहुत मरीज दवा लेने के लिए अस्पताल आते हैं और घंटों भटकने के बाद मायूस होकर लौट जाते हैं। इस बीच जागरूक लोगों ने विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर कई बार आकर्षित कराकर इस अस्पताल में मानक के अनुरूप स्टाफ तैनात कराने की मांग की। विभागीय उच्चाधिकारियों ने मांग पूरी करने आश्वासन तो दिया लेकिन अभी तक मांगें पूरी नहीं की गई। अधिकारियों की इस वादा खिलाफी से क्षेत्र के लोगों में रोष है। इस बाबत जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. आरके चौहान ने बताया कि विभाग के पास डाक्टरों और अन्य कर्मचारियों की काफी कमी है। उपलब्धता होते ही इस अस्पताल में मानक के अनुरूप स्टाफ तैनात कर दिया जाएगा।
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इन गांवों के मरीजों को हो रही है दिक्कत-
राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल खनंका में डॉक्टर और कर्मचारी न होने से खनंका के अलावा रोहनिया, अहिरपुरा नगला, चठिया सेवाराम, भदारा, भदारी, अदिलाबाद, करनपुर लायकराम, लुहिचा, पुरैना, हरूनगला, जसकनापुर, भोगापुर, नीवाडांडी, धीमरपुरा और रायपुर आदि गांवों के मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
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